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Indo-Pak War 1971: एटीजीएम ने छंब को बनाया पाक टैंकों का कब्रिस्‍तान, नेस्‍तनाबूद हुए 17 'बख्‍तरबंद'

50th Anniversary of Indo-Pak War 1971: छंब 1965 और 1971 में भारत और पाकिस्‍तान के बीच लड़े गए युद्ध का गवाह रहा है. छंब ...अधिक पढ़ें

50th Anniversary of Indo-Pak War 1971: भारत और पाकिस्‍तान के बीच छंब 1965 और 1971 में लड़े गए युद्ध (बैटल ऑफ छंब)  का गवाह रहा है. छंब के लिए इन दोनों युद्धों के मायने बिल्कुल अलग थे. दरअसल, 1965 के बैटल ऑफ छंब में दोनों देशों के बीच टैंक से टैंक का भीषण संग्राम हुआ था. इस युद्ध में पाकिस्‍तानी सेना अमेरिकी कोबरा एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों (एटीजीएम) से लैस थी, जबकि भारत के पास एटीजीएम जैसा कोई हथियार नहीं था.

1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद, एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) को भारतीय सेना में शामिल करने और दो एटीजीएम बटालियन बनाने का निर्णय लिया गया. फरवरी 1968 में, पहली एटीजीएम बटालियन के रूप में 12 गार्ड्स का गठन किया गया था. इस बटालियन में ENTAC-58 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों से लैस करीब 75 विलीज जीप के साथ 40 अन्‍य वाहनों को शामिल किया गया था. ये मिसाइलें करीब 2,000 मीटर की दूरी पर मौजूद टैंक को तबाह करने की क्षमता रखती थीं.

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पाक की कोबरा मिसाइल से बेहतर थीं भारतीय ENTAC-58 मिसाइलें
पाकिस्‍तानी सेना की अमेरिकी कोबरा एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल की अपेक्षा ENTAC-58 मिसाइलें न केवल छोटी थीं, बल्कि जीप पर विशेष रूप से तैयार किए गए फायरिंग प्लेटफॉर्म से दागी जा सकती थीं. इतना ही नहीं, दलदली या माइन फील्‍ड वाले इलाकों में इन मिशाइलों को मैन-पैक आधार पर जंग के मैदान पहुंचाया जा सकता था और लंगर डालकर इसे इस्‍तेमाल किया जा सकता था. ENTAC-58 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों की यह खूबी बैटल ऑफ छंब में बेहद मददगार शाबित हुई थी.

2 किमी के दायरे में खतरे से निपटने में सक्षम थी इंडियन एटीजीएम
1971 के भारत पाक युद्ध के दौरान,12 गार्ड्स बटालियन में तीन एटीजीएम कंपनियां थीं. युद्ध के दौरान, 12 गार्ड्स की चार्ली कंपनी को छंब में और बाकी बची दो अन्‍य कंपनियों को जम्मू और पंजाब में अलग-अलग सेक्‍टरों में तैनात किया गया था. मेजर आरसी भाटिया की कमान वाली चार्ली कंपनी में तीन प्लाटून थीं, जिन्‍हें 30-30 ENTAC-58 मिसाइलें उपलब्‍ध कराई गई थीं. ये ENTAC-58 मिसाइलें 2 किमी के इलाके में मौजूद किसी भी खतरे से निपटने के लिए सक्षम थीं.

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बैटल ऑफ छंब को लेकर भारत-पाक सीमा पर सेना की तैनाती
भारत और पाकिस्‍तान की सीमा पर स्थिति छंब क्षेत्र के इस इलाके को उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली मुन्नावर तवी नदी दो भागों में विभाजित करती है. युद्ध को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी 191 इन्फैंट्री ब्रिगेड और 10 इन्फैंट्री डिवीजन को नदी के पश्चिम में भारत-पाक सीमा पर तैनात किया गया था. इसके अलावा, पल्लनवाला, जौरियन और अखनूर के क्षेत्रों में नदी के पूर्व में जवानों की तैनाती की गई थी. इस युद्ध में भारतीय और पाकिस्‍तानी सेना के अपने अलग अलग मकसद थे.

बैटल ऑफ छंब को लेकर दोनों सेनाओं का अपना मकसद
भारतीय सेना किसी भी स्थिति में पाकिस्‍तान के खारियान छावनी, गुजरांवाला और लाहौर की कम्‍युनिकेशन लाइनों पर कब्‍जा करना चाहती थी. जबकि पाकिस्‍तानी सेना अखनूर पर कब्‍जा कर जम्‍मू और कश्‍मीर को शेष भारत से अलग करना चाहता था. 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्‍तानी सेना ने इसी मकसद के साथ छंब पर हमला किया था. हालांकि यह बात दीगर है कि दोनों युद्धों में भारतीय सेना के जांबाजों के युद्ध कौशल और बहादुरी के चलते पाकिस्‍तान के मंसूबे पूरे नहीं हो पाए थे.

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पाकिस्‍तान सेना को नहीं मिल सकी टैंक ब्रिगेड की मदद
इस लड़ाई में 12 गार्ड्स की चार्ली कंपनी ने ENTAC-58 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों की मदद से छंब को पाकिस्‍तानी टैंकों का कब्रिस्‍तान बना दिया था. इस लड़ाई में भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के 17 टैंक और एक रिकॉइल-लेस गन से लैस एक जीप को नेस्तनाबूद कर दिया था. ENTAC-58 एंटी टैंक गाइडेड मिसाइलों के खौफ के चलते पाकिस्‍तानी सेना को अपने टैंक छंब की लड़ाई से पीछे खींचने पड़े थे. भारतीय एटीजीएम के चलते पाक सेना को टैंक रेज‍ीमेंट की मदद नहीं मिल सकी थी.

कंपनी स्‍तर पर भारतीय जांबाजों की थी दुर्लभ उपलब्धि
छंब की लड़ाई में शौर्य का उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन करने के लिए 12 गार्ड्स की चार्ली कंपनी को एक महावीर चक्र, एक वीर चक्र, एक सेना मेडल और थिएटर सम्मान से सम्मानित किया गया. युद्ध के इतिहास में, कंपनी स्तर के एक छोटे बल के लिए यह एक बेहद दुर्लभ उपलब्धि थी.

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