जानिए कैसे कई सौंदर्य उत्पादों से बर्बाद कर रहे हैं हम अपना ग्रह

जानिए कैसे कई सौंदर्य उत्पादों से बर्बाद कर रहे हैं हम अपना ग्रह
हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने में हमारे सौंदर्य उत्पादों का भी योगदान रहता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अनजाने में हम कई ऐसे सौंदर्य उत्पादों (Beauty Products) का उपयोग कर लेते हैं जो हमारे पर्यावरण (Environment) को बहुत ज्यादा नुकसान पहुचाते हैं.

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नई दिल्ली. विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर हम सभी के पास एक और मौका है कि हम सोचें कि हम अपने ही ग्रह पृथ्वी (Earth) को नष्ट करने में कितना योगदान दे रहे हैं. मानव और तकनीकी विकास की अंधी दौड़ में संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए हम यह भी नहीं सोच रहे हैं कि हमारी आने वाले पीढ़ियों के लिए जीवन के कितने प्रतिकूल हालात छोड़ कर जा रहे हैं. हम कई ऐसी चीजों का उपयोग भी करते हैं जिनके बारे में हम नहीं जानते कि वे पर्यावरण (Environment) के लिए कितनी हानिकारक हैं.

कई उत्पाद होते हैं पर्यावरण के लिए नुकसानदायक
अगर हमें पता चला जाए कि हमारे जीवन की छोटी-छोटी चीजें किस तरह से हम तक पहुंचती हैं तो हमें पता चलेगा कि जाने अनजाने हम भी हमारे पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं. इन उत्पादों के निर्माण में बहुत सी ऐसी चीजों का उपयोग होता है जिससे हमारे ग्रह पर रहने वाले जानवरों और हमारे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंचता है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी कहा है कि जैवविविधता वह जटिल व्यवस्था है जिसमें से एक हिस्सा भी हटा दिया जाए तो पूरे के पूरे जीवन चक्र को तबाह कर सकती है.

ये उत्पाद पहुंचाते हैं नुकसान



आमतौर पर हम इस तरह के कई उत्पादों का उपयोग करते हैं जिनमें झाग होता है, जैसे शैम्पू, टूथपेस्ट या फेसवॉश. इन उत्पादों में एक पदार्थ होता है जिसे सोडियम लॉरिल सल्फेट (SLS) कहते हैं. यही झाग बनाता है. इसे बनाने के लिए निर्मातों को ताड़ के तेल की जरूरत होती है. इसे निकालने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई होती है. इस पूरी प्रक्रिया में वायुमंडल की ऑक्सीजन तो कम होती है, लेकिन कई जीवों का प्रवास भी नष्ट होता है जिनमें कुछ विलुप्त होते जा रहे हैं. इसका एक ही उपाय है कि ऐसे उत्पादों का उपयोग किया जाए जिनमें 100 प्रतिशत संधारणीय ताड़ के तेल का उपयोग हुआ हो. इसकी जानकारी उत्पाद के लेबल पर दी जाती है.



World Environment Day
विश्व पर्यावरण दिवस पर संयुक्त राष्ट्र लोगों में जैवविविधता की जागरूकता पैदा करना चाहता है.


आपकी सनस्क्रीन भी हो सकती है हानिकारक
हम आप जिस सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं उसमें ऑक्सोबेनजोन नाम के पदार्थ का उपयोग होता है. यह वह केमिकल है जो अल्ट्रावॉयलेट किरणों के दोनों प्रकार UVA और UVB को अवशोषित कर लेता है. हालांकि यह केमिकल आपको सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाता है, लेकिन इसका कोरल रीफ यानी प्रावल शैल श्रेणियों पर बहुत विपरीत असर होता है. यह पदार्थ कोरल रीफ में ब्लीचिंग का असर देता है. यानी उसका रंग उड़ा कर उसे सफेद कर देता है या रंगहीन कर देता है. जब लोग सनस्क्रीन को लगा कर समुद्र में तैरने चले जाते हैं तो यह सनस्क्रीन समुद्र में घुलकर कोरल रीफ के डीएनए को नुकसान पहुंचाते हैं और उनकी वृद्धि को भी रोकते हैं. कोरल रीफ हजारों समुद्री जीवों का वास है और ये बहुत से जीवों का भोजन भी हैं. इस नुकसान को रोकने का एक उपाय यह है कि जब भी आप सनस्क्रीन लें तो यह सुनिश्चित करें कि उसमें टाइटेनियम डाइऑक्साइड और जिंक ऑक्साइड हो.

वेट वाइप्स भी होते हैं नुकसानदेह
वेट वाइप्स का चलन आजकल काफी बढ़ रहा है. ज्यादातर वेट वाइप्स सिंथेटिक फाइबर के बने होते हैं और वे बायोडिग्रेडेबल नहीं होते यानी कि वे प्राकृतिक तरीके से नष्ट नहीं होते. ये आमतौर पर फ्लश के जरिए सीवेज सिस्टेम में जाते हैं और उसे चोक कर देते हैं. लेकिन ज्यादातर नदियों के रास्ते समुद्र में पहुंचते हैं. नदियों और समुद्रों में जीव इन्हें खा लेते हैं और मर जाते हैं. इससे और प्रदूषण फैलता है. समुद्र किनारे भी ये प्रदूषण में योगदान देते पाए गए हैं. इसे रोकने के लिए प्राकृतिक तरीके से नष्ट होने वाले वेट वाइप्स का प्रयोग करना चाहिए जो बांस की लकड़ी या कपास आदि से बने होते हैं.

कब है पर्यावरण दिवस
कई उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया भी हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती है.


इन उत्पादों के लिए कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स में ऐसे केमिकल्स का उपयोग होता है जो अंततः नदियों और समुद्र में पहुंच कर वहां के जीवों के लिए जहर का काम करते हैं. इनमें स्क्रब्स, मॉइसच्राइजर, नेल पॉलिश, डियो आदि शामिल हैं.

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First published: June 5, 2020, 7:03 PM IST
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