चीन में भिखारियों ने बंद की पैसों की मांग, ई-वॉलेट से करते हैं कमाई

चीन में भिखारियों ने खुद को डिजिटल बना लिया और ई-वॉलेट से पैसे लेते हैं - सांकेतिक फोटो (pixabay)

चीन में भिखारियों ने खुद को डिजिटल बना लिया और ई-वॉलेट से पैसे लेते हैं - सांकेतिक फोटो (pixabay)

भारत में भिक्षावृत्ति को अपराध (begging as crime) मानने, न मानने पर बहस जारी है. इधर कैशलेस अर्थव्यवस्था (cashless economy) में टॉप पर खड़े चीन में भिखारी भी ई-वॉलेट और QR कोड (beggars use e-wallet in China) के जरिए पैसे ले रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 10, 2021, 2:15 PM IST
  • Share this:
एक ओर चीन अपने यहां गरीबी पूरी तरह से खत्म हो जाने का दावा कर रहा है, तो दूसरी ओर वहां  भिखारी ज्यादा आधुनिक होते जा रहे हैं. वे ई-वॉलेट (e-wallet) के जरिए भीख मांगते हैं और लगभग हर महीने हजारों रुपए कमा रहे हैं. चूंकि चीन में तकनीक काफी उन्नत है तो लोग कैश की बजाए आमतौर पर कार्ड लेकर चलते हैं. ऐसे में भिखारी लोगों से पैसे नहीं मांग पाते थे, यही देखते हुए उन्होंने मांगने का तरीका बदलते हुए खुद को डिजिटल बना लिया.

चीन के भिखारियों का जिक्र क्यों आ रहा है?

इसकी वजह है भारतीय अदालत में आई एक याचिका. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र समेत कुछ राज्यों से एक याचिका पर जबाव मांगा है. याचिका में भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से हटाने के निर्देश देने की बात कही गई है. याचिकाकर्ता ने कहा कि अगर भीख मांगना अपराध हो जाएगा तो लोगों के पास वाकई में क्रिमिनल बन जाने या भूखे मरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.

Beggars with QR code China
चीन की दो सबसे बड़ी ई-वॉलेट कंपनियां भीख मांगने वालों के लिए डिजिटल वॉलेट बनाए हुए हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

कोर्ट ने इन राज्यों से मांगा जवाब 

सुप्रीम कोर्ट ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से हटाने की इस याचिका पर 5 राज्यों से जवाब मांगा है. इन्हें 3 हफ्ते में जवाब देना होगा. जिन राज्यों से जवाब मांगा गया है वो हैं- बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब और हरियाणा. बता दें कि साल 2011 की जनगणना में देश में भिखारियों की कुल संख्या 4,13,670 बताई गई थी, जो अब बढ़ी ही है.

ये भी पढ़ें: दुनिया के वे हिस्से, जहां बोतलबंद पानी सबसे महंगा है, ये है वजह 



भीख मांगने वाले हुए डिजिटल

इधर चीन में डिजिटल क्रांति के बीच भिखारी भी आधुनिक हो चुके हैं. वे अपने साथ ई-पेमेंट की सुविधा लिए चलते हैं ताकि कोई छुट्टे पैसे न होने का भी बहाना न कर सके. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से बताया गया है. वे QR कोड के साथ एक पेपर लिए रहते हैं और इसे लेकर वे शहर के पर्यटन स्थलों या शॉपिंग मॉल जैसी जगहों पर खड़े हो जाते हैं. ऐसी जगहों पर काफी सैलानी और स्थानीय लोग भी आते रहते हैं. ऐसे में उन्हें ज्यादा से ज्यादा भीख मिल पाती है.



Beggars with QR code China
क्यूआर कोड के जरिए ही भिखारी सारी खरीददारी कर लेते हैं- सांकेतिक फोटो


ई-वॉलेट कंपनियां खुद कर रही मदद

चीन की दो सबसे बड़ी ई-वॉलेट कंपनियां इसमें भिखारियों की मदद करती हैं. एलिपे और वीचैट वॉलेट ने भिखारियों से साठगांठ कर ली है. इससे होता ये है कि भिखारी जैसे ही QR कोड की मदद से पैसे लेते हैं, देने वालों का डाटा कंपनियों के पास चला जाता है. ये कंपनियां फिर इस डाटा का इस्तेमाल अपने विज्ञापनों या फिर ऐसे ही किसी फायदे के लिए करती हैं.

ये भी पढ़ें: वाराणसी की Gyanvapi मस्जिद, जिसके नीचे हिंदू मंदिर का विवाद चला आ रहा है?  

QR कोड से ही कर रहे खरीद-फरोख्त

सबसे दिलचस्प बात ये है कि चीन के भिखारियों को ई-वॉलेट ऑपरेट करने के लिए मोबाइल फोन रखने की भी जरूरत नहीं. लोगों से मिले हुए पैसे सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में चले जाते हैं, जो इन्हीं कंपनियों ने बना रखे हैं. इसी QR कोड को लेकर भिखारी खाने की दुकानों या जरूरत के दूसरे सामान लेते बाजार जाते हैं और दुकानों में वो कोड दिखा देते हैं.

xi jinping China poverty free
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल की शुरुआत में अपने राष्ट्र को गरीबी-मुक्त घोषित किया


खुद को बताया गरीबी-मुक्त

इस तरह से कैशलेस इकनॉमी की तरफ चीन ने अनोखे ही तरीके से कदम बढ़ाया हुआ है. वैसे चीन में भिखारियों के भी डिजिटली मजबूत होने के बीच बता दें कि देश के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इसी साल की शुरुआत में अपने राष्ट्र को गरीबी-मुक्त घोषित किया है. ऐसा दावा करना वाला चीन दुनिया का पहला राष्ट्र बन चुका है. जिनपिंग के स्टेटमेंट के मुताबिक सत्तर के दशक से अर्थव्यवस्था में सुधार के बाद से 770 मिलियन गरीबों को आर्थिक खुशहाली मिल सकी. इसके अलावा जिनपिंग ने यह भी कहा कि उनके देश ने पिछले 8 सालों में ही गरीबी हटाने के लिए लगभग 1.6 ट्रिलियन युआन लगाए.

ये भी पढ़ें: Explained: क्या NASA का अगला टेलीस्कोप धरती पर तबाही ला सकता है?  

विरोधाभास है तस्वीरों में

चीन के आर्थिक तौर खुद को मजबूत बताने के दावे के बीच खबर आती रहती है कि देश में अनाज की भारी कमी के कारण भुखमरी के हालात बन चुके हैं. अनाज की कमी के कारण ही चीन अपने यहां से अनाज निर्यात करने संबंधी सारे एग्रीमेंट रद्द कर चुका है. यहां तक वो अनाज की खरीदी में लग गया है. साथ ही साथ अन्न की मांग और सप्लाई में फर्क कम करने के लिए चीन दूसरे देशों में खेती लायक जमीन लीज पर लेने की शुरुआत कर चुका है. बहरहाल सख्त सेंसरशिप वाले देश चीन में गरीबी खत्म होने की हकीकत जो भी हो, इतना तो सच है कि चीन के भिखारी अब पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज