सबरीमाला के अलावा दूसरे अयप्पा मंदिरों में महिलाओं से कैसा होता है सलूक

सबरीमाला के अलावा दूसरे अयप्पा मंदिरों में महिलाओं से कैसा होता है सलूक
प्रतीकात्मक तस्वीर

पौराणिक मान्यता है कि भगवान अयप्पा भगवान शंकर और मोहिनी (विष्णु जी का एक रूप) का पुत्र हैं. इन्हें हरिहरपुत्र के नाम से भी जाना जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 2, 2019, 11:07 AM IST
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केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत नहीं थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इस मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के दरवाजे जरूर खोले लेकिन इसके बाद भी विरोध के चलते यहां कोई भी महिला प्रवेश नहीं कर पाई है. ये जानना चाहिए कि देश में भगवान अयप्पा के दूसरे मंदिरों में महिलाओं के साथ क्या किया जाता है.

जब सुप्रीम कोर्ट में चार जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी. तब सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने मंदिर की ओर से कहा था कि देश के बाकी हिस्सों में ऐसे 999 अयप्पा मंदिर हैं, महिलाएं उनमें जा सकती हैं.

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अभिषेक मनु सिंघवी ने जो 999 मंदिरों वाली बात कही, वो क्यों कही? इसलिए कही, क्योंकि देश के बाकी अयप्पा मंदिरों में महिलाओं के आने जाने पर कोई रोकटोक नहीं है.
दिल्ली में आरके पुरम में अयप्पा का मंदिर
दिल्ली में भी आरके पुरम में भगवान अयप्पा का बड़ा मंदिर है, जिसमें हर उम्र की महिलाएं जाती हैं. सबरीमाला को छोड़ देशभर के अन्य अयप्पा मंदिरों में महिलाओं के साथ क्या होता है, ये जानने के लिए हमने दो अयप्पा भक्तों से बातचीत की.

27 साल की जयश्री वरदराजन का कहना है कि,' उनकी मां बताती हैं कि जन्म के बाद जब पहली बार उनका मुंडन हुआ था तो वो दिल्ली के भगवान् अयप्पा के मंदिर में ही हुआ था, जहां घर की सभी उम्र की महिलाएं मौजूद थीं.'

दिल्ली के आरके पुरम में भगवान अयप्पा का मंदिर


जयश्री बताती हैं, वो तमिलनाडु से हैं लेकिन दिल्ली में रहती हैं, इसलिए लगातार दिल्ली एनसीआर के सभी अयप्पा मंदिरों में गई हैं. उन्हें कभी किसी ने नहीं रोका या टोका. किसी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है.

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यहां तक कि पीरियड्स के दौरान भी आने पर कोई अलग से रोक नहीं होती. हालांकि जयश्री इस दौरान खुद वहां जाना पसंद नहीं करतीं, क्योंकि ये खुद उनकी आस्था का सवाल है.

क्या कहती हैं दिल्ली की एक और भक्त 
31 साल की अम्मु नायर केरल से हैं, दिल्ली में ही रहती है. वे भी भगवाल अयप्पा के मंदिर जाती रहती हैं. उनका कहना है कि इस बात पर बहुत विमर्श की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि मेरे घर में कोई भी महिला पीरियड्स में मंदिर नहीं जाती. शायद हिंदू धर्म में भी सभी मंदिरों में ऐसा ही है.

जयश्री सबरीमाला कभी नहीं गई हैं लेकिन पूरा विवाद ख़त्म होने के बाद जाना ज़रूर चाहेंगी.

मुंबई में भगवान अयप्पा का मंदिर


जहां प्रवेश पर रोक नहीं 
कुलतुपुजा शष्ठ मंदिर, अचनकोली मंदिर भी अयप्पा के ही हैं, जिसमें महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है. सभी के बारे में फेसबुक, यूट्यूब या ट्रैवल वेबसाइट पर ढेरों तस्वीरें और वीडियो मिल जाते हैं. जिनमें अच्छी खासी तादाद में महिलाएं मंदिर में दिखती हैं.

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क्या महिलाओं के विरोधी हैं अयप्पा
भगवान अयप्पा से जुड़ी किसी दंतकथा में अयप्पा को महिलाओं के विरोधी या दूरी बनाए रखने वाला वर्णन नहीं मिलता है. एक तर्क दिया जा रहा है कि अयप्पा ब्रह्मचारी हैं. सबरीमाला सहित कई जगह अयप्पा के ब्रह्मचारी रूप की पूजा होती है.

हनुमान भी ब्रह्मचारी हैं. उनके मंदिर में महिलाओं के जाने पर रोक नहीं है. सबरीमाला देश में अयप्पा का इकलौता मंदिर नहीं है. केरल में अयप्पा के कई और मंदिर हैं जहां महिलाओं के प्रवेश पर रोक नहीं है.

कौन हैं अयप्पा भगवान
पौराणिक मान्यता है कि भगवान अयप्पा भगवान शंकर और मोहिनी (विष्णु जी का एक रूप) का पुत्र हैं. इन्हें हरिहरपुत्र के नाम से भी जाना जाता है. दरअसल, हरि भगवान विष्णु को कहते हैं और हर शिव को. इन दोनों के नामों के आधार पर ही हरिहरपुत्र नाम रखा गया. भगवान अयप्पा को अयप्पन, शास्ता, मणिकांता नाम से भी जाना जाता है.

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