बीजिंग के नीचे बसा खुफिया शहर, जिसे लाखों लोगों ने हाथों से खोदकर बनाया

बीजिंग के नीचे बसा खुफिया शहर, जिसे लाखों लोगों ने हाथों से खोदकर बनाया
बीजिंग में 20 हजार एकड़ में फैला एक खुफिया शहर है

दिक्सिया चेंग (Dìxià Chéng) बीजिंग के ठीक नीचे 20 हजार एकड़ में फैला खुफिया शहर (secret underground city) है. इसे 3 लाख से ज्यादा लोगों ने हाथों से खोदकर बनाया था.

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फिलहाल चीन सबसे ज्यादा कोरोना की वजह से चर्चा में हैं. इसके अलावा दुनियाभर में अपने व्यापार और अपनी सीमाओं का विस्तार करने की चाह भी चीन को सुर्खियों में लाए हुए हैं. वैसे इन सबके अलावा चीन अपने-आप में काफी रहस्यमयी देश भी है. यहां जमीन के नीचे एक पूरा का पूरा शहर बसा हुआ है. बीजिंग के ठीक नीचे बसे शहर दिक्सिया चेंग (Dìxià Chéng) में सुरंगों के भीतर लाखों की आबादी अमानवीय हालातों में रहती है. हालांकि इनकी बातें शायद ही कभी दुनिया के सामने आती हों.

अब तक ये पता नहीं चल सका है कि जमीन के नीचे बसे शहर में कितने घर हैं या कितनी सुरंगें बनी हुई हैं. लेकिन माना जाता है कि दिक्सिया चेंग 20 हजार एकड़ में फैला हुआ है. जमीन के नीचे ही से ये बीजिंग की सारी सरकारी और जरूरी इमारतों से जुड़ता है. अनुमान है कि किसी समय यहां पर जमीन से बाहर निकलते के लिए 900 से ज्यादा प्रवेश और एग्जिट द्वार रहे होंगे.

चीन के इस शहर के हालात का मतलब उसके नाम से ही लगा सकते हैं. दिक्सिया चेंग (Dìxià Chéng) का चीनी अर्थ है कालकोठरी या अंधेरा तहखाना. इसे अंडरग्राउंड ग्रेट वॉल भी कहते हैं.



दिक्सिया चेंग (Dìxià Chéng) का चीनी अर्थ है कालकोठरी या अंधेरा तहखाना

साल 1969 से पूरे 10 सालों तक इसे बनाने का काम चलता रहा. जमीन के भीतर शहर बसाने का एक खास मकसद था. तब चीन और रूस के बीच संबंध खासे खराब थे और कोल्ड वॉर के बीच चीन को डर था कि रूस उसपर परमाणु हमला कर सकता है. चीन के इस डर को चीन-रूस के बीच कई महीनों तक लगातार चली सैन्य मुठभेड़ से भी बल मिला. चीन को यकीन था कि लड़ाई किसी भी वक्त शुरू हो सकती है. ऐसे में चीन के कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग (माओ जेडोंग) ने अपने नागरिकों से जमीन खोदने की अपील की.

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उनका संदेश था- “Shenwadong, chengjiliang, buchengba”. यानी गहरी सुरंगें खोदो, खाना जमा करो और लड़ाई के लिए तैयार हो जाओ. माओ का चीन की जनता पर गहरा असर था. अपील पर 3 लाख से ज्यादा लोग हाथों से ही जमीन खोदने में जुट गए. बीजिंग के ठीक नीचे इस शहर को बनाने में मिलिट्री के इंजीनियरों ने भी मदद की. परमाणु बम गिरे तो लोग बच सकें, इसके लिए जमीन के काफी नीचे 10 हजार एटॉमिक बंकर तैयार किए गए. रेस्त्रां बने ताकि काफी दिनों तक भीतर रहना पड़े तो लोग ऊबे न. यहां फैक्ट्री, थिएटर, गोदाम, मशरूम फार्म्स और खेल के मैदान भी थे. कुल मिलाकर 20 हजार एकड़ में जमीन के नीचे वे सारे स्ट्रक्चर बनाए गए, जिनके बारे में सोचा जा सका कि परमाणु युद्ध छिड़ा तो जीने के लिए जरूरी होंगे.

जमीन के काफी नीचे 10 हजार एटॉमिक बंकर तैयार किए गए ताकि युद्ध छिड़ने पर जान बचाई जा सके


सत्तर के दशक में चीन की सरकार ने कहा था कि ये जगह इतनी बड़ी और इस तरह से डिजाइन की गई है कि इसमें पूरे बीजिंग की आबादी समा जाएगी. तब बीजिंग की आबादी लगभग 60 लाख थी.

परमाणु युद्ध नहीं छिड़ा और इस शहर के नीचे रहने की जरूरत भी नहीं आई. इसके कई हिस्सों को दफ्तरों के काम में दे दिया गया. हालांकि वक्त के साथ गरीब आबादी जमीन के नीचे बसने लगी. ये वो आबादी थी, जो गांव से शहर काम की तलाश में आ रही थी. बीजिंग में पहले से ही घनी आबादी थी इसलिए लोगों को जमीन के नीचे बसाया जाने लगा. चीन की एक जनजाति रैट ट्राइब यहां तभी से रह रही है, जब से ये तैयार हुआ है. बाकी लोग सस्ता होने की वजह से यहां बसते हैं और जब भी पैसे आएं और जमीन से बाहर बसने का मौका मिले, इस शहर को छोड़ देते हैं.

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जमीन के नीचे बसे इस शहर के हालात काफी खराब हैं. बंकरों के भीतर छोटे-छोटे घर बने हुए हैं और आमतौर पर भीतर रहने वाले तभी बाहर आते हैं, जब उन्हें कोई काम करना हो. साल 2010 में खुद बीजिंग के स्थानीय प्रशासन ने किसी बीमारी के डर से लोगों से नीचे रहना बंद करने के लिए कहा लेकिन तब भी कोई जगह न होने के कारण लोग यहां से बाहर नहीं जा सके.
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