अगर आप हमेशा बिजी रहते हैं तो हो जाएं सावधान, बड़ी बीमारी की निशानी

कई तरीके हैं जिनसे हम अपनी चेतना पर हमारा ध्यान आकर्षित कर सकते हैं. इतने व्यस्त समय में खुद को व्यस्त होने से रोकने की कोशिश हमें करते रहनी होती है.

News18Hindi
Updated: March 16, 2019, 5:35 PM IST
अगर आप हमेशा बिजी रहते हैं तो हो जाएं सावधान, बड़ी बीमारी की निशानी
कई तरीके हैं जिनसे हम अपनी चेतना पर हमारा ध्यान आकर्षित कर सकते हैं. इतने व्यस्त समय में खुद को व्यस्त होने से रोकने की कोशिश हमें करते रहनी होती है.
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Updated: March 16, 2019, 5:35 PM IST
लगातार बिजी रहना मानसिक और भावनात्मक रूप से थकाने वाला तो होता ही है, साथ ही सेहत के लिए खतरनाक भी होता है. अपनी नई पुस्तक में, जॉन कबाट-जिन्न लिखते हैं कि आप हमेशा व्यस्त रहकर खुद के साथ नाइंसाफी करते हैं. बिजी रहना अक्सर आपके विचारों के साथ अकेले होने की असुविधा के लिए बनाया गया बहाना होता है.

पिछली शताब्दी की जिन सभी पुस्तकों में इस मुद्दे पर बात की गई है, उनमें एलन वाट्स की The Wisdom of Insecurity: A Message for an Age of Anxiety (असुरक्षा का ज्ञान) बेहतरीन किताब है. 1951 में प्रकाशित किताब के लेखक वाट्स को पता था कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका अस्थिर सामाजिक और तकनीकी की ओर तेजी बढ़ रहा था. अधिक लोग बिजी रहने का बहाना पेश करने लगे थे और अधिक घंटे काम कर रहे थे. वास्तव में क्यों का जवाब उनके पास नहीं था.





वाट्स ने लिखा है कि लोग पैसे बनाना और बचाना तो जानते हैं लेकिन उसका इस्तेमाल करना नहीं. वे जिंदगी की आनंद लेने में असफल रहते हैं क्योंकि वे हमेशा जीने की तैयारी कर रहे होते हैं. एक जीवित कमाई करने के बजाय वे अधिक कमाई कर रहे हैं, और इस प्रकार जब आराम करने का समय आता है तो वे ऐसा करने में असमर्थ होते हैं.  70 वर्षों में भी कुछ बदला नहीं है.

जॉन कबाट-जिन्न ने अपना पूरा करियर में व्यस्तता की बीमारी को रोकने की कोशिश में लगा दिया है. साठ के दशक में एमआईटी में एक छात्र ने फिलिप कपलेऊ के काम के माध्यम से ध्यान की खोज की, जो वाट्स की तरह, बढ़ती गति के खतरों को पहचानते थे, जिस पर समाज चल रहा था. सत्तर के दशक के अंत तक, कबाट-जिन्न ने मैसाचुसेट्स मेडिकल स्कूल विश्वविद्यालय में माइंडफुलनेस-आधारित तनाव न्यूनीकरण (एमबीएसआर) में आठ सप्ताह का कोर्स लॉन्च किया, जो उनके करियर का आधार बन गया.

ध्यान और दिमागी कसरत पर आधा शताब्दी तक मेहनत करने के बाद, कबाट-जिन्न को खुद को व्यस्त होने की आवश्यकता है, अपनी नई पुस्तक द हीलिंग पावर ऑफ माइंडफुलनेस में उदाहरण के रूप में प्रदर्शित करता है. वो कहते हैं कि मैं खुद को व्यस्त नहीं रख रहा हूं बल्कि जिंदगी का आनंद ले रहा हूं.


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कई तरीके हैं जिनसे हम अपनी चेतना पर हमारा ध्यान आकर्षित कर सकते हैं. इतने व्यस्त समय में खुद को व्यस्त होने से रोकने की कोशिश हमें करते रहनी होती है.

किताबें ज़रूर पढ़ें. अच्छी कहानियां आपको अनजान जगहों पर ले जाती हैं. 60-90 मिनट के लिए योग का अभ्यास करें. संगीत सुनें. अपने दोस्तों से मिलें. पैदल टहलें. टीवी और फ़ोन से दूर रहे.

हमारे तंत्रिका तंत्र और पर्यावरण के बीच का रिश्ता है जो सबसे महत्वपूर्ण है. वहां बहुत कुछ हम नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, फिर भी हम यह कर सकते हैं कि हम इस दुनिया के माध्यम से कैसे आगे बढ़ते हैं. हमेशा जल्दी, परेशान, विचलित, चिंतित, वर्तमान में व्यस्तता हमें मार रही है. सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट माना जाना चाहिए.
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