इन यूरोपीय देशों ने टूरिस्टों से कर ली तौबा, ये है वजह

इस देश की कुल आबादी 17 मिलियन है और बीते साल यहां 18 मिलियन से ज्यादा पर्यटक आए. साल 2030 में पर्यटकों का आंकड़ा 42 मिलियन पार कर सकता है.

News18Hindi
Updated: June 13, 2019, 6:17 PM IST
इन यूरोपीय देशों ने टूरिस्टों से कर ली तौबा, ये है वजह
भीड़ का नियंत्रण इन देशों की बड़ी समस्या है
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Updated: June 13, 2019, 6:17 PM IST
ट्यूलिप के फूलों और नहर किनारे बसे घरों के ख्यात देश नीदरलैंड्स अब टूरिज्म से तौबा कर रहा है. इसी कतार में एक और यूरोपीय देश बेल्जियम भी है. क्या वजह है कि कई दशकों तक टूरिस्ट डेस्टिनेशन माने जाने वाले ये देश अब पर्यटकों के लिए अपना दरवाजा बंद करना चाह रहे हैं!

डच अर्थव्यवस्था में पर्यटन टॉप 13वें नंबर पर है. इससे हर साल देश को लगभग £ 70 बिलियन कमाई होती है. साल 2018 में पर्यटन ने यहां साढ़े सात लाख के लगभग नौकरियां दीं. हालांकि नुकसान इतने ज्यादा हैं कि डच सरकार अब पर्यटन से हाथ खींच रही है. यहां टूरिस्टों का आना-जाना इतना बढ़ चुका है कि अगर इसपर रोक नहीं लगी तो साल 2030 तक यहां सालाना 42 मिलियन पर्यटकों के आने का अनुमान है.



पिछले साल यानी 2018 में पर्यटकों की आमद 18 मिलियन से ज्यादा थी. यहां ये बता दें कि खुद इस देश की कुल आबादी 17 मिलियन है. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में विदेशियों के आने के कारण सरकार को अपना लगभग सारा ध्यान ट्रांसपोर्ट पर फोकस करना पड़ा है और दूसरी दिशाओं में उतना विकास नहीं हो पा रहा है.

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यहां टूरिस्ट बोर्ड पॉलिसी से जुड़ा एक दस्तावेज ने साल 2018 में कहा कि विजिटर्स फ्लो को नियंत्रित करने के लिए अब हमें कोई न कोई कार्रवाई करनी होगी.



दरअसल इस डच देश में पर्यटन इतना बढ़ चुका है कि अब डेस्टिनेशन प्रमोशन की बजाए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट की नीति अपनाने की जरूरत महसूस की जा रही है. कुछ खास जगहों पर लोगों के आने-जाने को कम करने या रोकने के लिए सरकार कई नीतियां अपना रही है. इसमें टूरिस्ट टैक्स लगाने या बढ़ाने जैसी बातें शामिल हैं. कई टूरिस्ट डेस्टिनेशन को बंद किया जा रहा है. इसकी एक वजह ये भी है कि रोज सैकड़ों-हजारों की संख्या में आने वाले पर्यटकों के कारण वहां रहने वालों की जिंदगी प्रभावित हो रही है.
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एक छोटे से गांव गिएथोर्न में स्थानीय लोगों से कई गुना ज्यादा पर्यटक हर वक्त भरे रहते हैं. ऐसे में आवागमन, रहने, खाने सबपर बुरा असर हो रहा है. सबसे बड़ी मुश्किल रोजाना आने और चले जाने वाली भीड़ की वजह से क्राइम का डर है. इसके अलावा पर्यावरण पर बुरा असर हो रहा है. पहले इस देश में ट्यूलिप के खेत खुले में फैले होते थे लेकिन सेल्फी खींचने के शौकीन पर्यटकों ने खेतों में घुसकर उन्हें नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. इसके बाद खेतों के चारों ओर बाड़ लगाई जाने लगी.



एम्स्टर्डम में, पर्यटन अधिकारियों ने हाल ही में शहर के केंद्र से प्रसिद्ध "आई एम्स्टर्डम" को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया, क्योंकि यह चिन्ह इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर लोकप्रिय हो गया था. इससे ज्यादा टूरिस्टों के आने का डर है.

बेहद लोकप्रिय एक अन्य यूरोपीय देश बेल्जियम की सरकार भी अब और पर्यटकों को लेने से कतरा रही है. ये वही बेल्जियम है, जहां का टूरिज्म लगभग 42% यूरोपीय नागरिकों को लुभाता है. लेकिन इसकी लोकप्रियता अब देश के स्थानीय नागरिकों पर भारी पड़ रही है. ब्रुग्स और फ्लैंडर्स जैसे शहरों के लिए.

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ये शहर अपनी समृद्ध वास्तुकला और खानपान के लिए काफी पसंद किए जाते हैं. साथ ही घूमने के लिहाज से ये दूसरे यूरोपीय शहरों से काफी सस्ते हैं. ऐसे में शहर पर भारी दबाव है. होटलों, खाने और आवागमन को संभालने के लिए शहरों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. साथ ही पर्यटकों की वजह से पर्यावरण में बदलाव भी दिख रहा है.



ऐसे में ब्रुग्स शहर के वर्तमान मेयर ने फैसला लिया कि पर्यटन को और बढ़ावा नहीं दिया जाएगा. क्रूज शिप्स की संख्या 5 से घटाकर 1 या 2 कर दी जाएगी. दिन में पर्यटन को हतोत्साहित करने की योजना बनाई जा रही है. वर्तमान में ये हो रहा है कि टूरिज्म को प्रमोट करने की वजह से पास के शहरों जैसे पेरिस और ब्रुसेल्स जैसे शहरों से लोग दिनभर या एक दिन के लिए घूमने आते हैं. इससे शहर पर डे-ट्रिपर्स का दबाव रहता है. एक नुकसान ये भी है कि पर्यटक तो दिन में घूमकर चले जाते हैं और होटलों को कोई रेवेन्यू नहीं मिल पाती है. भीड़ पर नियंत्रण के लिए एक और योजना ये भी है कि टूरिज्म वीकेंड के लिए सीमित न रहकर पूरे वीक चले. इससे भीड़ बंट जाएगी और स्थानीय लोगों की जीवनशैली कम से कम प्रभावित होगी.

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ब्रुग्स के इस फैसले पर यूरोप के दूसरे देश भी विचार कर रहे हैं, जिनपर मास-टूरिज्म का असर है. रोम भी ऐसा ही एक देश है. ये टूरिस्टों के उन कामों पर रोक लगाने जा रहा है, जिससे किसी भी तरह की गंदगी या प्रदूषण होता है. इसमें पब में आवाजाही और शहर के ख्यात फाउंटेन्स में नहाना भी शामिल है.
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