यहां बनता है भारत रत्न, जानें इस सम्मान से जुड़ी खास बातें

भारत रत्न देने की परंपरा देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने 2 जनवरी 1954 से शुरू की थी. शुरुआत में ये सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान और सामाजिक क्षेत्र में किसी शख्सियत के उसके विशिष्ट योगदान के लिए दी जाती थी.

News18Hindi
Updated: August 8, 2019, 9:35 AM IST
यहां बनता है भारत रत्न, जानें इस सम्मान से जुड़ी खास बातें
1954 से हुई भारत रत्न देने की शुरुआत
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Updated: August 8, 2019, 9:35 AM IST
आज भारत के तीन विशिष्ट शख्सियतों को भारत रत्न दिया जाएगा. भारत सरकार ने 25 जनवरी को घोषणा की थी कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, भारतीय जनसंघ के नेता नानाजी देशमुख (मरणोपरांत) और मशहूर कवि, गायक और गीतकार भूपेन हजारिका (मरणोपरांत) को भारत रत्न प्रदान किया जाएगा. भारत के इस सर्वोच्च सम्मान को पाने वाले इन तीनों शख्सियतों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में देश को अमूल्य योगदान दिया है.

भारत रत्न का इतिहास

भारत रत्न देने की परंपरा देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने 2 जनवरी 1954 से शुरू की थी. शुरुआत में ये सम्मान साहित्य, कला, विज्ञान और सामाजिक क्षेत्र में किसी शख्सियत के उसके विशिष्ट योगदान के लिए दी जाती थी. बाद में इसका दायरा बढ़ाकर किसी भी क्षेत्र में देशसेवा में दिए योगदान की वजह से भारत रत्न दिया जाने लगा. यह सम्मान भारत के किसी भी नागरिक को दिया जा सकता है, चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, व्यवसाय या लिंग से संबंध रखता हो.

हर साल तीन व्यक्तियों को ये सम्मान दिया जाता है. हालांकि ये जरूरी नहीं है कि ये सम्मान हर साल दिया जाए. शुरुआत में भारत रत्न मरणोपरांत देने का प्रावधान नहीं था. बाद में इस प्रावधान को भी शामिल किया गया.

कैसे दिया जाता है भारत रत्न

भारत रत्न जिन शख्सियतों को दिया जाना होता है, उनके नाम प्रधानमंत्री द्वारा भेजे जाते हैं. भारत के प्रधानमंत्री उन नामों को राष्ट्रपति को भेजते हैं. भारत रत्न देने पर आखिरी फैसला राष्ट्रपति ही लेते हैं.
देश के सबसे पहले भारत रत्न
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bharat ratna a brief history of indias highest honour and its winners
इस साल भारत रत्न पाने वाली शख्सियतें


देश के पहले भारत रत्न

1954 में देश के सबसे पहले भारत रत्न बने राजनीतिज्ञ सी राजगोपालाचारी, भारत के पहले उपराष्ट्रपति और डॉ राजेन्द्र प्रसाद के बाद दूसरे राष्ट्रपति बनने वाले सर्वपल्ली राधाकृष्णन और मशहूर साइंटिस्ट सी वी रमन. सीवी रमन को 1930 में फीजिक्स में उनके योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका था.

1955 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, स्वतंत्रता सेनानी भगवान दास और मैसूर के दीवान रहे सर विश्वेसवरैया को भारत रत्न दिया गया. सर विश्वेसवरैया को भारत में सिविल इंजीनियरिंग का पिता कहा जाता है.

भारत रत्न के डिजाइन में बदलाव

भारत रत्न के डिजाइन में वक्त के साथ बदलाव भी किए गए हैं. शुरुआत में ये 35 मिलीमीटर का गोलाकर स्वर्ण पदक हुआ करता था. जिस पर समाने की तरफ सूर्य का चित्र होता था, ऊपर भारत रत्न लिखा होता था और नीचे एक फूलों का हार बना होता था. पदक के पिछले हिस्से पर सत्यमेव जयते लिखा होता था.

भारत रत्न पश्चिम बंगाल के अलीपुर में बनाया जाता है. ये पीपल के पत्ते के आकार का होता है. ये तांबे का बना होता है और इस पर प्लैटिनम से बना सूर्य का चित्र होता है. इसके नीचे चांदी से भारत रत्न लिखा होता है. इसे सफेद धागे के साथ गले में पहनाया जाता है.

विदेशियों को भी मिला है भारत रत्न

इतिहास में ऐसे मौके भी आए हैं, जब भारत रत्न से किसी विदेशी को सम्मानित किया गया. स्वतंत्रता सेनानी खान अब्दुल गफ्फार खान, जो बाद में पाकिस्तान चले गए, को भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है. 1987 में सम्मान पाने वाले वो पहले विदेशी थे. साउथ अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे नेल्सन मंडेला को भी उनके मानवीय कार्यों के लिए इस सम्मान से नवाजा जा चुका है. उन्हें 1990 में ये सम्मान दिया गया. इसके 3 साल बाद 1993 में उन्हें नोबेल पीस प्राइज से सम्मानित किया गया.

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सचिन तेंदुलकर भारत रत्न पाने वाले पहले खिलाड़ी


1980 में मदर टेरेसा को भारत रत्न प्रदान किया गया. वो पहली न्यूट्रीलाइज्ड सिटीजन थीं, जिन्हें ये सम्मान दिया गया.

2018 तक कुल 45 महान विभूतियों को भारत रत्न मिल चुका है. इनमें से 12 को ये सम्मान मरणोपरांत दिया गया. लाल बहादुर शास्त्री पहले शख्सियत थे, जिन्हें ये सम्मान मरणोपरांत दिया गया.

सचिन तेंदुलकर भारत रत्न पाने वाले पहले खिलाड़ी हैं. वो भारत रत्न पाने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के व्यक्ति रहे हैं.

कई बार विवादों में घिरा सम्मान

भारत रत्न को लेकर कई बार विवाद भी हुए हैं. कई बार सम्मान नहीं दिए गए. 1977 से 1980 तक और फिर 1992 से लेकर 1995 तक भारत रत्न देने पर रोक लगा दी गई थी. 1977 में आपातकाल के दौरान सभी तरह के सम्मान पर रोक लगा दी गई थी. 1980 में प्रधानमंत्री बनने के बाद इंदिरा गांधी ने ये रोक हटा दी.

1992 में भारत रत्न की वैधता को लेकर सवाल उठाए गए. इसको लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई. जिसकी वजह से 92 से लेकर 95 तक भारत रत्न नहीं दिए गए. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत रत्न देने का सिलसिला फिर से शुरू हुआ.

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First published: August 8, 2019, 9:35 AM IST
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