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Bhopal Gas Tragedy : मुख्य आरोपी एंडरसन को क्यों बचाया गया, ये अब भी सवाल

Bhopal Gas Tragedy : मुख्य आरोपी एंडरसन को क्यों बचाया गया, ये अब भी सवाल

भोपाल गैस कांड में सभी आरोपी सजा से मुक्त हो गए. पीड़ितों को अब तक सही तरीके से न्याय नहीं मिल सका (ShutterStock)

भोपाल गैस कांड में सभी आरोपी सजा से मुक्त हो गए. पीड़ितों को अब तक सही तरीके से न्याय नहीं मिल सका (ShutterStock)

Bhopal Gas Tragedy, Union carbide : ये बड़ा सवाल है कि 37 साल बीतने के बाद भी भोपाल गैस पीड़ितों (Bhopal Gas Victims) को अब तक न्याय नहीं मिल पाया. इससे संबंधित जो आरोपी थे, वो बचे रहे, घटना के मुख्य आरोपी पुलिस हाथ डाल नहीं पाई. यूनियन कार्बाइड का तत्कालीन प्रमुख वारेन एंडरसन (Warren Anderson) सजा से बच निकला. हालत ये भी है कि पीड़ितों का संघर्ष अब भी जारी है. उन्हें ढंग से मुआवजा भी नहीं मिल सका.

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    भोपाल गैस कांड (Bhopal Gas Tragedy) के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन (Warren Anderson) की मौत 07 साल पहले ही हो चुकी है. आज भी ये अबूझ सवाल है कि इस भयावह हादसे के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को भारत सरकार ने क्यों बचकर जाने दिया. क्यों उसे गिरफ्तार नहीं किया गया. बाद में अदालत में भी उस पर ढंग से मुकदमा नहीं चल सका. घटना के समय प्लांट में मौजूद शकील कुरैशी को तो आज तक पकड़ा तक नहीं जा सका.

    2 और 3 दिसंबर 1984 की आधी रात पुराने भोपाल के सघन इलाके छोला में यूनियन कार्बाइड के कारखाने से मिक गैस का रिसाव हुआ था. 3 दिसंबर की सुबह पुराने भोपाल और नए भोपाल की सड़कों पर जगह-जगह लाशें पड़ी थीं. पूरी दुनिया को इस रासायनिक त्रासदी ने हिला कर रखा दिया.

    तब यूनियन कार्बाइड के चेयरमैन वारेन एंडरसन थे. वे त्रासदी के बाद भोपाल आए लेकिन उन्हें सुरक्षित भोपाल से बाहर जाने दिया गया.

    बताया जाता है कि पुलिस और प्रशासन के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने वारेन एंडरसन को विशेष विमान तक सरकारी वाहन से खुद छोड़ा. इस पूरे मामले की जांच राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सीबीआई से कराई थी.

    घटना की तीन साल तक जांच करने के बाद सीबीआई ने वारेन एंडरसन सहित यूनियन कार्बाइड के 11 अधिकारियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी. वारेन एंडरसन को कभी भारत नहीं लाया जा सका. उसकी अनुपस्थिति में ही पूरा केस चला. जून 2010 में इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया. फैसले में कार्बाइड के अधिकारियों को जेल और जुर्माने की सजा सुनाई. अधिकारियों ने जुर्माना भरा और सेशन कोर्ट में अपील दायर कर दी.

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    भोपाल गैस कांड के बाद यूनियन कार्बाइड का प्लांट बंद पड़ा है. हालांकि वहां खतरनाक रसायन अवशेषों की सफाई का काम अब तक भी नहीं कराया जा सका है (फाइल फोटो)

    क्यों पकड़ा नहीं जा सका कुरैशी
    इस पूरी घटना का अहम किरदार शकील अहमद कुरेशी था. जो उस समय प्लांट पर ड्यूटी पर था. शकील अहमद को भी कोर्ट ने दो साल की सजा सुनाई थी. शकील अहमद कौन है और कैसा दिखता है, यह आज भी रहस्य है.

    शकील अहमद को 37 साल बाद भी सीबीआई तलाश नहीं कर पाई है. उसकी फोटो भी सीबीआई के पास नहीं है. एक तरह से देखा जाए तो विश्व की इस भीषण गैस त्रासदी के गुनाहगारों के जेल जाने की संभावनाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं.

    वारेन एंडरसन की मौत कई साल पहले अमेरिका में हो चुकी है. निचली अदालत ने जिन्हें सजा सुनाई, उन्होंने अपील कर अपने आपको जेल जाने से बचा लिया है.

    अमेरिका तक लड़ी गई लड़ाई
    भोपाल में 3 दिसंबर को गैस कांड की बसरी मनाई जाती है. सेंट्रल लाइब्रेरी में सर्वधर्म सभा होती है. भोपाल के सभी सरकारी कार्यालय भी बंद रहते हैं. 35 साल से यह परंपरा चल रही है. इन 35 सालों में कई गैर सरकारी संगठनों ने मुआवजे की लड़ाई अमेरिका तक में जाकर लड़ी.

    एंडरसन को भारत लाए जाने की मांग को लेकर भी अदालती कार्यवाही हुई. लेकिन, कोई भी सरकार एंडरसन को भारत नहीं ला सकी.

    सरकारी आकंड़ों के अनुसार इस घटना में पंद्रह हजार से अधिक लोग मारे गए थे. गैर सरकारी आंकड़े इससे काफी अधिक बताया जाता है. इतनी बड़ी संख्या में हुईं मौतों के जिम्मेदार लोगों को कानून कोई बड़ी सजा नहीं दे पाया. इसकी मुख्य वजह मामूली धाराओं में केस दर्ज करना भी रहा.

    तत्कालीन डीएम ने किताब में लिखा वाकया
    भोपाल गैस कांड के समय कलेक्टर रहे मोती सिंह ने अपनी किताब “भोपाल गैस त्रासदी का सच” में उस सच को भी उजागर किया, जिसके चलते वारेन एंडरसन को भोपाल से जमानत देकर भगाया गया. मोती सिंह ने अपनी किताब में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए लिखा, ” वारेन एंडरसन को अर्जुन सिंह के आदेश पर छोड़ा गया था. वारेन एंडरसन के खिलाफ पहली FIR गैर जमानती धाराओं में दर्ज की गई थी. इसके बाद भी उन्हें जमानत देकर छोड़ा गया. शकील अहमद कुरेशी के बारे में कोई नहीं जानता. कुरेशी एमआईसी प्रोडक्शन यूनिट में ऑपरेटर था. कुरेशी के सामने न आने से पूरी घटना का खुलासा नहीं हो सका है.”

    घटना के जिम्मेदार कार्बाइड के अधिकारी ज्यादा से ज्यादा 14 दिन ही जेल में रहे हैं. जबकि घटना से प्रभावित हजारों लोग आज भी तिलतिल कर मर रहे हैं.

    मुआवजे पर ही रहा सरकारी फोकस
    भोपाल गैस दुर्घटना के आरोपियों को सजा दिलाने के बजाए सरकार की दिलचस्पी पीड़ितों के लिए कार्बाइड कंपनी से मुआवजा वसूल करने में ज्यादा रही है. जब भी भोपाल में आरोपियों को कानून से बचाने को लेकर हल्ला मचा सरकार बचाव में मुआवजे की बात करने लगती है.

    वर्ष 1989 में हुए समझौते के तहत यूनियन कार्बाइड ने 705 करोड़ रुपये का मुआवजा पीड़ितों के लिए मध्यप्रदेश सरकार को दिया था. इस समझौते के लगभग 21 साल बाद केंद्र सरकार ने एक विशेष अनुमति याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर 7728 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया.

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    भोपाल में इस त्रासदी के आरोपियों को पकड़ने के लिए अब भी प्रदर्शन किए जाते हैं.

    बाद में बिक गई यूनियन कार्बाइड भी
    यूनियन कार्बाइड एक बहुराष्ट्रीय कंपनी थी. बाद में इसका विलय डाव केमिकल कंपनी, (यू.एस.ए.) में हो गया. अगस्त 2017 से डाव केमिकल कंपनी, (यू.एस.ए.) का ई.आई डुपोंट डी नीमोर एंड कंपनी के साथ विलय हो जाने के बाद यह अब डाव-डुपोंट के अधीन है.

    मौजूदा हालात में मुआवजा भी बढ़ सकेगा इसकी भी संभावना कम है. आरोपियों के खिलाफ फौजदारी मुकदमे दो स्तरों पर चल रहे हैं. पहला तीन भगोड़े आरोपियों के खिलाफ और दूसरा उन 9 आरोपियों के खिलाफ जो भोपाल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सी.जे.एम.) के समक्ष हाजिर हुए थे.

    जून 2010 के आदेश और फैसले के तहत सी.जे.एम. ने इन 8 आरोपियों (एक अब मृत है) पर भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए, 336, 337 और 338 के तहत सजा सुनाई है. अदालत में चल रहे मामलों की गति काफी धीमी है. भोपाल गैस त्रासदी पीड़ित महिला उद्योग संगठन, भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉरमेशन एंड एक्शन गैस त्रासदी प्रभावितों की कानूनी लड़ाई लगातार लड़ रहे हैं.

    Tags: Bhopal, Bhopal Gas Tragedy, Gas leak

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