क्या नेपाल के बाद अब भूटान भी भारत से बढ़ा रहा है दूरी?

क्या नेपाल के बाद अब भूटान भी भारत से बढ़ा रहा है दूरी?
कोरोना के बीच भारत लगातार अपने पड़ोसी देशों से भी जूझ रहा है- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

लगभग 67 सालों बाद पहली बार भूटान ने असम की ओर आने वाले नदियों का पानी रोक (water supply from Bhutan to Assam was blocked) दिया है. इससे किसान खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे.

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कोरोना के बीच भारत लगातार अपने पड़ोसी देशों से भी जूझ (India's dispute with neighbors amid coronavirus) रहा है. लद्दाख सीमा (Ladakh border) पर चीन की सेना ने भारतीय जवानों से हिंसक झड़प की. चीन लगातार उल्टे-फुल्टे बयान दे ही रहा है. दूसरी ओर नेपाल भी उत्तराखंड के तीन हिस्सों पर दावेदारी दिखा (territorial disputes between India and Nepal) रहा है. वहां भारतीय बहुओं के लिए नागरिकता कानून में भी बदलाव हो सकता है. अब भूटान (Bhutan) की ओर से एक नई मुसीबत दिख रही है. उसने अपने सीमावर्ती असम में अपनी नदियों का पानी जाने से रोक दिया. इससे असम के करीब 25 गांवों के लोगों के लिए सिंचाई की समस्या हो गई है.

बता दें कि 1953 के बाद से ही असम के बक्सा जिले किसान धान के अपने खेतों की सिंचाई के लिए भूटान की नदियों पर निर्भर रहे हैं. तो क्या नेपाल की तरह भूटान भी चीन की किसी साजिश का हिस्सा बन चुका है?  या इसके पीछे कुछ और है?

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इसके लिए सबसे पहले भारत से उसके पड़ोसी देशों के रिश्ते को समझना होगा. नेपाल से भारत के रिश्तों में लगातार उतार-चढ़ाव आते रहे. फिलहाल विवाद गहराने से पहले भी नेपाल कई बार कह चुका है कि भारत में बने बांधों के कारण उसके देश में बरसात में निचले हिस्सों में बाढ़ आ जाती है. दूसरी ओर नेपाल लगातार चीन की तरफ जाता दिख रहा है. जैसे चीन के वन-बेल्ट, वन-रोड प्रोजेक्ट का भी नेपाल हिस्सा बना, जबकि भारत से इसका बहिष्कार किया. चीन ने एशिया, यूरोप और अफ्रीका को सड़क मार्ग, रेलमार्ग, गैस पाइप लाइन और बंदरगाह से जोड़ने की योजना बनाई. इसके तहत 6 गलियारे बनाए जाने की योजना है, जिनपर काम भी शुरू हो चुका है. इसमें पीओके में भी निर्माण हो सकता है, जिसपर भारत लगातार विरोध कर रहा है. ऐसे प्रोजेक्ट में नेपाल का चीन के साथ शामिल होना भी चीन से उससे ज्यादा जुड़ाव को बताता है.
भारतीय सेना भूटान की शाही सेना को ट्रेनिंग देती रही है (Photo-flickr)


अब बात करें भूटान की. तो चीन और भूटान के बीच खास राजनयिक संबंध नहीं. इसके उलट भारत और भूटान में गहरे संबंध हैं. दोनों के बीच साल 1949 में फ्रेंडशिप ट्रिटी हुई. इससे भूटान को विदेशों से अपने संबंधों के मामले में भारत को भी शामिल करना पड़ता था. हालांकि बाद में साल 2007 में इसमें संशोधन हुआ. इसके तहत ये सुधार हुआ कि भूटान भारत को सारे नहीं, लेकिन उन्हीं मामलों में बताएगा जिसमें भारत सीधे तौर पर जुड़ा हो.

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इसके बाद भी राजनयिक रिश्ते मजबूत ही हुए. अपने पहले कार्यकाल में पीएम मोदी ने पहली यात्रा भूटान की ही की. साल 2018 में भूटान के प्रधानमंत्री डॉ. लोते शेरिंग ने पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना.

भूटान में पानी की प्रचुर मात्रा का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए होता है, जिसमें भारत उसकी मदद करता रहा (Photo-pixabay)


भारत-भूटान के बीच पनबिजली समझौता भी है. इसके तहत भूटान में पानी की प्रचुर मात्रा का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए होता है, जिसमें भारत उसकी मदद करता है. चीन को हमेशा से दोनों देशों की निकटता खटकी. बीबीसी के मुताबिक चीन की मीडिया ये फैलाती रही है कि भारत नेपाल और भूटान जैसे छोटे पड़ोसी देशों में मनमानी करता रहता है. हालांकि चीन ने नेपाल को तो भड़का दिया लेकिन भूटान के मामले में सीमा को लेकर ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा. बता दें कि भारत-भूटान की सीमा 606 किलोमीटर के लगभग है लेकिन दोनों में इसे लेकर आपस में कोई विवाद नहीं रहा. यहां तक कि भारतीय सेना भूटान की शाही सेना को ट्रेनिंग देती रही है.

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तो अब एकाएक क्या हुआ? चीन भारत को तगड़े प्रतिद्वंदी के तौर पर देखता है इसलिए वो उन सारे देशों से अपने संबंध मजबूत करना चाह रहा है, जो भारत से जुड़े हों ताकि बाद में उन देशों को भारत के खिलाफ खड़ा किया जा सके. हालांकि फिलहाल भारत की ओर आती नदियों का पानी रोकने में भूटान की कोई बुरी मंशा नहीं दिख रही. माना जा रहा है कि अपने देश को कोरोना वायरस से बचाने के लिए भूटान ने बाहरी लोगों की एंट्री रोक दी है और इसी के तहत नदियों का पानी भी रोक दिया गया है.

भूटान के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर सिरे से इनकार किया है कि वे पानी रोक रहे हैं


बता दें कि साल 1953 के बाद से ही बक्सा जिले के लगभग 26 गांवों के किसान खेतों की सिंचाई के लिए भूटान की काला नदी के पानी पर ही निर्भर रहे हैं. पानी डायवर्ट करने के लिए किसान सीमा पर समद्रूप जोंगखार इलाके में जाते रहे थे. अब भूटान सरकार के अधिकारियों ने कोरोना के कारण भारतीय किसानों को अपने यहां पहुंचने से रोक दिया. फिलहाल इसी बात पर बवाल मचा हुआ है.

हालांकि भूटान के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर सिरे से इनकार किया है कि वे पानी रोक रहे हैं. उनका कहना है कि पानी प्राकृतिक तौर पर ब्लॉक हुआ है और उसपर काम चल रहा है.

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इसके अलावा एक बदलाव ये दिख रहा है कि अब भूटान जाने पर भारतीयों को फीस देनी होगी. इससे पहले भारतीयों के लिए वहां एंट्री फ्री थी. इसी साल की शुरुआत में भूटान सरकार ने भारतीय पासपोर्ट धारकों (Indian Passport Holders) के लिए देश में फ्री एंट्री (Free Entry) बंद करने का फैसला लिया. सस्टेनेबल डेवलपमेंट फीस (SDF) के नाम पर दिन के हिसाब से एक भारतीय वयस्क को रोज के 1200 रुपए देने होंगे. इससे पहले सिर्फ वोटर आईडी या पासपोर्ट से भी काम बन जाता था.
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