77 के बाइडन, 74 के ट्रंप- अमेरिकी ज्यादा उम्र के नेता क्यों चुन रहे हैं

अमेरिका अब अपने इतिहास के सबसे उम्रदराज नेताओं को क्यों राष्ट्रपति बनने के लिए चुन रहा है.
अमेरिका अब अपने इतिहास के सबसे उम्रदराज नेताओं को क्यों राष्ट्रपति बनने के लिए चुन रहा है.

अमेरिकी में चुनाव नतीजे (US Elections2020 result) कुछ भी आएं लेकिन जो भी राष्ट्रपति बनेगा, वो अमेरिका का सबसे उम्रदराज प्रेसीडेंट (Most aged President of USA) होगा. अगर बाइडन (Joe Biden) जनवरी में 78 साल के होंगे तो ट्रंप (Donald Trump) 74 साल के. आखिर क्यों अमेरिका में उम्रदराज लोगों के हाथों में ताकत बढ़ रही है और वो अनुभवी राष्ट्रपति बनाने की ओर जा रहे हैं

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 8:59 PM IST
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अमेरिका में राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों की जो उम्र है, उसमें भारत में सियासत से रिटायर होने की बात होने लगती है. भारतीय जनता पार्टी ने तो 75 साल की उम्र अपने नेताओं के लिए रिटायरमेंट की उम्र बना दी है. अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रेसीडेंट प्रत्याशी जो बाइडन 77 साल के हैं. अगर वो चुनाव जीते तो जब अमेरिका में राष्ट्रपति बनेंगे तब 78 के हो जाएंगे. वहीं मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 74 साल के हैं.

इस बात को लेकर हमेशा दुनियाभर में बहस होती रही है कि देश के नेता की उम्र क्या होनी चाहिए. किस उम्र तक वो ज्यादा ऊर्जा और मानसिक क्षमता के साथ काम कर सकता है, फैसला ले सकता है. ब्लूमबर्ग का एक डाटा कहता है कि वर्ष 2019 में वर्ल्ड लीडर की औसत उम्र 65 साल के आसपास है. यूरोप में औसत उम्र कम हो रही है. ये अब 59 साल के आसपास है.

हैरानी की बात ये है कि पिछले कुछ दशकों में वर्ल्ड लीडर्स की औसत उम्र दुनियाभर में बढ़ी है. ब्लूमबर्ग के ही डाटा के अनुसार 1950 के दशक में वर्ल्ड लीडर्स की औसत उम्र 59 साल थी. अगर दुनिया में नेताओं की मौजूदा उम्र देखें तो 89 साल के राउल कास्त्रो क्यूबा के राष्ट्रप्रमुख हैं और बखूबी अपने देश की बागडोर संभाले हुए हैं. हालांकि यूरोप में अब युवा राष्ट्रप्रमुखों की नई हवा चलने लगी है. वहां ज्यादातर देशों में नए राष्ट्रप्रमुख 30 साल से लेकर 50 साल के बीच के हैं.




अमेरिका के लोग उम्रदराज प्रेसीडेंट क्यों चुन रहे हैं
ऐसे में ये सवाल जरूर उठता है कि क्या अमेरिका के लोग अब उम्रदराज यानि अनुभवी शख्स को राष्ट्रप्रमुख के तौर पर देखना चाहते हैं. ट्रंप इस समय 74 साल के थे. चार साल पहले जब उन्होंने सत्ता संभाली थी, तब उनकी उम्र 70 साल थी लेकिन फिटनेस कभी ट्रंप के काम में आडे़ नहीं आई. वो सुपर फिट लगते हैं. वहीं बाइडेन 77 साल के हैं. फिटनेस के मोर्चे पर वो एकदम फिट लगते है.

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अमेरिका में पिछले तीन दशकों में अलग अलग उम्र के प्रेसीडेंट
दिलचस्प बात ये है कि पिछले 30 सालों में अमेरिका ने ही अलग अलग उम्र के राष्ट्रपति देखे हैं. अगर तीन दशक पहले जार्ज डब्ल्यू बुश सीनियर 64 साल का होने के बाद राष्ट्रपति बने थे और उनके फिटनेस पर चिंता जाहिर करने वाली खबरें आती रहती थीं. तो उनके बाद 1992 में उनको चुनाव में हराने वाले बिल क्लिंटन महज 46 साल के युवा थे. उनमें जबरदस्त एनर्जी थी और व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण.



इसके बाद जार्ज बुश जूनियर 54 साल की उम्र में राष्ट्रपति बने. बराक ओबामा जब अमेरिका के राष्ट्रप्रमुख बने तो महज 47 साल के थे. यानि अमेरिका पिछले 03 दशकों में अलग अलग उम्र वाले लोगों को राष्ट्रपति बनाता रहा है. हाल में जब अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई तो वहां भी ये बहस का विषय था कि क्या अमेरिका का राष्ट्रपति इतना उम्रदराज होना चाहिए, जितने ट्रंप या बाइडन हैं.

क्या बाइडन पर उम्र का कुछ असर दिखा है
हालांकि बाइडन पर उम्र का कुछ असर तब जरूर नजर आया था जब इसी साल के शुरू में सुपर ट्यूजडे पर उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रेसीडेंट उम्मीदवार चुना गया. तब तीन बातें हुईं. भीड़ ने इसका जबरदस्त स्वागत किया. बाइडन अपनी बीवी और बहन का अंतर करने में कन्फ्यूज हो गए. तीसरा ये है कि उनके भाषणों में भी हाल के दिनों में कुछ कमियां नजर आईं. लेकिन बाद में उन्होंने अपने पूरे चुनाव कैंपेन को बहुत स्मार्टली पूरा किया. ऐसा ही डोनाल्ड ट्रंप ने भी किया. दोनों ने जिस तरह से चुनाव अभियान में अपनी ऊर्जा झोंकी, उससे उनकी उम्र कहीं आड़े नहीं आई.

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ट्रंप और बाइडन दोनों ज्यादा उम्र वाले 
अब चाहे ट्रंप राष्ट्रपति बनें या फिर बाइडन-दोनों ही अमेरिकी इतिहास में सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति होंगे. दोनों 40 के दशक में पैदा हुए हैं यानि भारत और इजरायल की आजादी से भी पहले. जैसा कि पहले भी जिक्र किया जा चुका है कि दोनों ही शख्स अमेरिका के पिछले तीन प्रेसीडेंट की तुलना में कहीं अधिक उम्र वाले हैं.

अमेरिका का ज्यादा वोटर्स भी उम्रदराज हो रहा है
अमेरिकी मीडिया ने इसका जबरदस्त जवाब पिछले दिनों तलाशने की कोशिश की. उनका मानना था कि चूंकि अमेरिकी वोटर्स भी धीरे धीरे ज्यादा उम्रदराज होता जा रहा है, इसीलिए उनका प्रेसीडेंट कैंडीडेट भी पुराना है. आमतौर पर अमेरिका में 65 साल से ऊपर उम्र वाले वोट डालने में बहुत पाबंद हैं. वो अपने मताधिकार का इस्तेमाल जरूर करते हैं.
अमेरिकी मैगजीन अटलांटिक में प्रकाशित एक लेख में कहा गया, राजनीतिक शास्त्र की एक रिसर्च कहती है कि आमतौर पर मतदाता ऐसे कैंडीडेट को पसंद करते हैं, जो उनकी उम्र के आसपास हो. ये बात हर नजर आ रही है कि ज्यादा बुर्जग होते देशों में बुजुर्ग राजनेता पसंद किए जा रहे हैं.



यूरोप में उल्टा हो रहा है, वहां युवा राष्ट्रप्रमुख बढ़ रहे हैं
हालांकि ये बात यूरोप के मामले में अलग लगती है. 1980 के दशक से यूरोप में बुर्जुर्गों की भीड़ बढ़ रही है लेकिन यूरोपीय यूनियन के नेता ज्यादा युवा चुने जा रहे हैं. ब्रिटेन से लेकर यूरोप के ज्यादातर देशों की यही हालत है. यानि जाहिर है कि जो फार्मूला अमेरिका में फिट बैठता है उसको यूरोप ने कमोवेश नकार दिया.

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अमेरिका की मैगजीन द इकोनॉमिस्ट कहती है, अमेरिका में बूढ़े मतदाता युवाओं की तुलना में ज्यादा हैं. ये बात काफी हद तक सही है. पालिटिको मैगजीन भी इसकी तस्दीक करती है कि अमेरिका में औसत वोटर की उम्र 57 साल है.

ये ग्राफ बताता है कि दुनिया में राष्ट्रप्रमुखों की औसत उम्र में किस तरह बदलाव हो रहा है तो यूरोप में नेताओं की उम्र किस तरह बदल रही है.


अमेरिकी मीडिया का ये भी कहना है कि 1996 के बाद आमतौर पर अमेरिका का जो भी राष्ट्रपति बना वो अमेरिका की राष्ट्रीय राजनीति को लेकर पूर्ववर्तियों की तुलना में कम अनुभवी था, लिहाजा ज्यादा उम्र के राष्ट्रपति को चुनने के पीछे कहीं ना कहीं अनुभव भी एक बड़ा फैक्टर है.



अमेरिकी मशीन के अहम पुर्जे 75 साल से ऊपर के
अमेरिका एक ऐसी मशीन है, जिसे चलाने वाले सारे अहम पुर्जे आमतौर पर विंटेज कहे जा सकते हैं. कांग्रेस के सदस्यों की उम्र इस सबसे आलटाइम सबसे ज्यादा है. हाउस स्पीकर, हाउस में बहुमत दल का नेता, विपक्ष का नेता और सीनेटर ज्यादातर सभी नेता 75 साल से ऊपर के हैं.

अमेरिकी की दो-तिहाई दौलत एक-तिहाई बुर्जुर्गों के हाथों में
अमेरिका में अगर बिजनेस की बात करिए या साइंस या फिर फाइनेंस की - सारी ताकत उम्रदराज लोगों के हाथों में है. पिछले 40 सालों से अमेरिका में किसी भी क्षेत्र में नोबल पुरस्कार पाने वालों की औसत उम्र बढ़ी है.

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पिछले 14 सालों में तमाम कंपनियों में जो सीईओ बन रहे हैं वो भी पहले से 14 साल अधिक उम्र के लोग बन रहे हैं. बेशक अमेरिका में 55 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोग एक तिहाई से कम हो सकते हैं लेकिन अमेरिका की दो-तिहाई दौलत उनके हाथों में है.

ज्यादा जी रहे हैं और ज्यादा काम कर रहे हैं अमेरिकी बुजुर्ग
अधिक इनकम वाले अमेरिकी अधिक उम्र जी रहे हैं और कहीं अधिक लंबे समय तक काम कर रहे हैं. बेशक देश की अगुवाई करना थकाने वाला काम हो सकता है लेकिन ये फैक्ट्री या कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में काम करने जैसा नहीं है. ये साफ है कि काम वर्कफोर्स में अब ज्यादा उम्र वालों की संख्या बढ़ रही है. उनका अनुभव जगह जगह काम ही नहीं आ रहा है बल्कि वो खुद को साबित कर रहे हैं और असल बात ये है कि अमेरिका की असल ताकत अब 70 पार उम्र के लोगों के हाथों में ज्यादा है.
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