कैसा है बिहार के सीमांचल का वो इलाका, जहां ओवैसी की पार्टी को मिलीं 05 सीटें

ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की  पार्टी ने पिछले बिहार विधानसभा उपचुनाव (By election) में एक सीट जीत खाता खोला था, इस बार उसने पूर्वांचल की पांच सीटें जीत कर चौंकाया है.
ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ने पिछले बिहार विधानसभा उपचुनाव (By election) में एक सीट जीत खाता खोला था, इस बार उसने पूर्वांचल की पांच सीटें जीत कर चौंकाया है.

बिहार विधानसभा चुनावों (Assembly Election) में इस असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी AIMIM ने चौंकाने वाला प्रदर्शन करते हुए सीमांचल की 5 सीटें जीती हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 6:20 PM IST
  • Share this:
विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) नतीजों में असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ने अप्रत्याशित रूप शानदार प्रदर्शन किया और पांच विधानसभा सीटों में जीत हासिल की. इस बार भी बिहार विधानसभा चुनाव अप्रत्याशित रहे और सभी एक्जिट पोल्स की राय को दरकिनार करते हुए बिहार ने नतीजों ने कांटे की टक्कर के नतीजे दिखाए हैं जिसमें ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस ए इतेहद उल मुस्लिमीन ने तीसरी बार शिरकत करते  हुए बेहतरीन प्रदर्शन किया है.

चौंकाने वालों में औवेसी की पार्टी
यूं तो इस बार ओवैसी के अलावा कई लोगों और पार्टियों ने चौंकाया है लेकिन ओवैसी की पार्टी ने अमौर, कोचाधान, जोकिहाट, बायसी और बहादुरगंज में जीत दर्ज की है. ये सभी सीटें बिहार के उत्तरपूर्वी इलाके में पश्चिम बंगाल और नेपाल की सीमा के पास स्थिति हैं.

क्या है सीमांचल का इलाका
बिहार का सीमांचल इलाके में पुर्णिया, कठिहार, किशनगंज, और अरैया जिले शामिल हैं जिसमें कुल 24 विधानसभा सीट आती हैं,. इस इलाके में ज्यादातर पिछड़ी जाति के लोग आते हैं. इसमें 47 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है. इस लिहाज से मुस्लिम वोट इस क्षेत्र में अहम माना जाता है. इसी लिए ओवैसी ने सीमांचल के इलाकों में अपने ज्यादातर प्रत्याशी उतारे थे और उन्होंने पांचों सीटें इसी इलाके की हैं.





क्या था ओवैसी की पार्टी का दाव
AIMIM ने इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 20 उम्मदीवार खड़े किए थे जिसमें 14 मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में थे. बाकी सीटें मिथिलांचल की थीं. सीमांचल के मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू की जगह असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को तरजीह दी है.  AIMIM को बिहार की पांच सीटों पर जीत मिली है, जिनमें अमौर, कोचाधाम, जोकीहाट, बायसी और बहादुरगंज सीट है. ये सभी सीटें सीमांचल के इलाके की हैं.

Asaduddin Owaisi, Assembly Election 2020, AIMIM, Seemanchal, Muslim Vote,
ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ने बिहार (Bihar)के सीमांचल (Seemanchal) में अपनी मजबूत उपस्थिति का प्रमाण दिया है.- (Photo-news18 English via PTI)


मुस्लिम फैक्टर कितना
किशनगंज में मुस्लिम जनसंख्या 70 प्रतिशत है. वहीं पूर्णिया के अरैया में 42, कठिहार में 38 प्रतिशत मुस्लिम हैं. कहा जाता है कि सीमांचल का क्षेत्र महागठबंधन के लिए बहुत अहम था. औवेसी को चुनकर ही सीमांचल के लोगों ने महागठबंधन के तेजस्वी यादव की राह में बाधा डाल दी.

Bihar Election Result: जानिए बिहार में लेफ्ट ने किस तरह किया कमाल

कैसी थी ओवैसी की तैयारी
ओवैसी ने भी बिहार चुनावों के ऐलान से काफी पहले अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी थी. उनके करीबी मासिद हुसैन दो महीने पहले से ही अपनी पार्ट के लिये जमीन बनानी शुरू कर दी थी. ओवैसी इससे पहले सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर एक बार रैली इस क्षेत्र में कर ही चुके थे.  पार्टी ने उन मुस्लिम संबंधी मुद्दों पर मुखरता दिखाई जिसपर महागठबंधन के नेता खामोश से दिखे और इसी वजह से धीरेधीरे ओवैसी की पार्टी ने मुस्लिमों के दिलों में जगह बना ली.

Asaduddin Owaisi, Assembly Election 2020, AIMIM, Seemanchal, Muslim Vote,
बिहार (Bihar)के सीमांचल (Seemanchal) मुस्लिम बहुल इलाका है.हैं (न्यूज़ 18 ग्राफिक्स)


आरजेडी को कितना किया बेअसर
लेकिन यह कहना कि ओवैसी की पार्टी ने आरजेडी के वोट काटे हैं यह कहना पूरी तरह से सही नहीं है. पार्टी को अपनी जीती पांच सीटों के अलावा बाकी सीटों पर बहुत वोट नहीं मिले हैं. अमौर और बहादुरगंज में उसने कॉन्ग्रेस से सीट छीनी है तो बायसी में उसने आरजेडी से सीट छीनी जबकि जोकिहाट और कोचीधाम में जेडीयू से सीटें छीनी. यानी एआईएमआईएम ने आरजेडी से केवल एक ही सीट छीनी है. तो जेडीयू और कांग्रेस की दो-दो सीटें काटी हैं.

क्यों हर चुनाव के बाद पार्टियां EVM हैकिंग का राग अलापने लगती हैं?

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार मुस्लिम मतदाता अपनी नई पहचान तलाश रहे थे. इसीलिए 36 से 16 साल से यहां की सीटों पर जमे विधायक अपनी सीटें गंवा बैठे. इसके अलावा वे नहीं चाहते थे कि उन्हें केवल बीजेपी के खिलाफ वोट बैंक की तरह देखा जाए. वे विकास चाहते हैं जो उनके इलकों में कहीं दिखाई नहीं देता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज