बिहार चुनाव रिजल्ट : महिलाएं किस तरह रहीं NDA की जीत में निर्णायक?

कोविड 19 के बीच बिहार चुनाव के दूसरे फेज़ की वोटिंग के दौरान महिला मतदाता.
कोविड 19 के बीच बिहार चुनाव के दूसरे फेज़ की वोटिंग के दौरान महिला मतदाता.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) के रुझान आते वक्त एक चुनाव विश्लेषक की भविष्यवाणी थी कि अगली सरकार तेजस्वी यादव के महागठबंधन (Grand Alliance) की होगी, लेकिन बाद में उन्हें मानना पड़ा कि महिलाओं के वोटों के रोल को आंकने में उनसे भूल हुई.

  • News18India
  • Last Updated: November 11, 2020, 3:00 PM IST
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बिहार चुनाव नतीजों में कांटे की टक्कर के बाद आखिरकार एनडीए ने बहुमत (NDA Win) के जादुई आंकड़े को छुआ और एक बार फिर नीतीश कुमार सरकार (Nitish Kumar Government) बनने की बारी आई. दिलचस्प बात यह है कि इस बार भी नीतीश सरकार की जीत का आधार वही वोट बैंक रहा, जो पहले भी बिहार में एनडीए का भरोसेमंद वोटर (NDA Vote Bank) रहा है. इस साल बिहार में 119 विधानसभा क्षेत्रों में महिला वोटर भारी संख्या में वोट डालने के लिए घरों से निकलीं. 118 विस क्षेत्र ऐसे रहे, जहां पुरुषों ने ज़्यादा वोट किया, लेकिन नंबर साफ हैं कि वोटिंग में महिलाओं (Women Voters) का पलड़ा भारी रहा.

इस साल अगर वोटरों के आंकड़ों को देखा जाए तो बिहार में 59.9 फीसदी महिलाओं ने वोट किया जबकि 54.7 फीसदी पुरुषों ने. पहले भी होता रहा है कि बिहार में महिलाएं ज़्यादा वोट करती रही हैं और पिछले कुछ चुनावों में एनडीए को इससे मदद मिली है. इस बार भी दूसरे और तीसरे चरण की वोटिंग में चूंकि महिला वोटर ज़्यादा रहीं, इसलिए इसी फेज़ के वोट एनडीए की जीत में निर्णायक रहे.





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एनडीए के पीछे नारी शक्ति का अर्थ
बिहार में जब पहले चरण का मतदान हुआ था, तब 54.4 फीसदी महिलाओं ने वोटिंग की थी. इस आंकड़े को देखकर एनडीए ने और आक्रामक रणनीति बनाई और ज़्यादा से ज़्यादा म​हिलाओं को वोटिंग के लिए प्रेरित किया. अंजाम यह हुआ कि दूसरे चरण के मतदान में 58.8 और तीसरे में 65.5 फीसदी महिलाएं वोट करने के लिए निकलीं. इसका सीधा फायदा एनडीए के पक्ष में रहा.



महिलाएं क्यों हैं एनडीए के साथ?
डेटा और विश्लेषणों के आधार पर कहा जाता है कि 2010 से ही बिहार में एनडीए ने महिलाओं को लेकर अहम योजनाएं बनाईं. चाहे स्कूली बालिकाओं को मुफ्त साइकिल देने की योजना रही हो या पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण की या फिर स्वसहायता संबंधी योजना के रूप में नीतीश सरकार की चर्चित 'जीविका दीदी' स्कीम, एनडीए सरकार को महिलाओं का काफी सपोर्ट मिलता रहा.

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इसके अलावा, एक बड़ा फैक्टर शराबबंदी का फैसला रहा. बिहार की महिलाओं ने इस फैसले के लिए दबाव बनाया था और यह भी एक फैक्ट है कि महिलाएं नहीं चाहतीं कि कोई और सरकार आए और शराबबंदी का फैसला सरकारी स्तर पर पलट दिया जाए. इन तमाम बातों के साथ ही, केंद्र सरकार की उज्ज्वला जैसी योजनाएं भी बिहार की महिलाओं के बीच लोकप्रिय बताई जाती हैं.

बिहार चुनाव के लिए प्रचार के सिलसिले में अपनी रैलियों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महिला वोटरों को केंद्र में रखते हुए बार बार जन धन, नलों में पानी, बिजली, मुफ्त राशन और उज्ज्वला जैसी कई योजनाओं के फायदे गिनाए थे. बिहार के सबसे बड़े त्योहार छठ तक मुफ्त अनाज स्कीम चालू रहने की पीएम की घोषणा भी काफी अहम रही.

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बिहार चुनाव के बाद पुरुषों की तुलना में 5% ज़्यादा महिला वोटर होने के आंकड़े पर ज़ोर देते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एनडीए की सरकार बनने के पीछे महिलाओं के आशीर्वाद को बड़ा फैक्टर बताया और धन्यवाद दिया.
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