Birth Anniversary: Nobel Prize के रिकॉर्ड में कोई सानी नहीं है मैडम क्यूरी का

मैडम क्यूरी (Madame Curie) की पूरी दुनिया (World) के लिए समर्पण की एक मिसाल हैं.
मैडम क्यूरी (Madame Curie) की पूरी दुनिया (World) के लिए समर्पण की एक मिसाल हैं.

मैडम क्यूरी (Madame Curie) महिला वैज्ञानिक के रूप एक बहुत बड़ी मिसाल हैं. दो नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) जीतने वाली एकमात्र महिला रहीं मैडम क्यूरी का 7 नवंबर को जन्म हुआ था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 4:56 PM IST
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मैडम क्यूरी (Madame Currie) का जन्म  7 नवंबर 1868 में हुआ था. वे रोडियोएक्टिविटी (Radioactivity) की खोज करने के लिए मशहूर हैं. इसके लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) से नवाजा गया था. उन्हें दो बार नोबेल प्राइज मिला और ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली एकमात्र महिला (Women) हैं. उनका जीवन दुनिया के कई वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा रहा है.

कैसा था मैडम क्यूरी की बचपन
मैरी स्क्लोदोवास्का शिक्षक माता पिता के घर पोलैंड के वर्सा में पैदा हुईं थी जो उस समय रूस का हिस्सा था. बचपन से ही उन्हें पढ़ाई का माहौल मिला. उन्हें बचपन से ही अध्ययन का शौक भी था. 10 साल की उम्र में टीबी की बीमारी की वजह से उनकी मां का देहांत हो गया जो गणित की शिक्षिका थीं. उनके पिता विज्ञान के शिक्षक थे जिन्होंने अपनी बेटी की जिज्ञासा को पनपने में मदद की  बड़े होने और शादी के बाद भी उन्हें लैब में ही काम करना पसंद था और वे अपना अधिकांश समय लैब में ही गुजारती थीं.

शादी बाद पति के साथ किया काम
पेरिस में जब वे आगे की पढ़ाई करने गईं तो वहां उन्हें पियरे क्यूरी से उनकी मुलाकात हुई और उनकी लैब में काम करने के दौरान उनकी दोस्ती रिश्ते में बदल गई और 1895 में दोनों ने शादी कर ली. पति के साथ मिलकर उन्होंने रेडियो एक्टिविटी की खोज की यह नाम भी उन्होंने ही दिया.



Madame Curie, Pierre Curie, Nobel prize
मैडम क्यूरी (Madame Curie) ने अपने पति की मौत के बाद उनके काम को आगे बढ़ाया.


पति की मौत के सदमे के बाद भी काम
रेडियो एक्टिविट की  खोज के लिए क्यूरी दम्पत्ति को 1903 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. इसके एक साल बाद पति की एक्सिडेंट में मौत के बाद उन्हें ने अपने काम के जुनून को नहीं छोड़ा और रेडियम के शुद्धिकरण के लिए उन्हें 1911 में नोबेल प्राइज मिला. और एक वे दो बार नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाली पहली महिला बन गईं.

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ये खास रिकॉर्ड
इसके साथ ही मैडम क्यूरी ने कई रिकॉर्ड बना लिए जो आज तक नहीं टूटे हैं. वे नोबेल पुरस्कार जीतने वाली पहली महिला थीं. आज भी वे ही एकमात्र महिला हैं जिसने दो नोबेल पुरस्कार जीते हैं और दो अलग क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार जीते हैं. साल 1955 में उनकी बेटी आइरीन ने भी नोबेल पुरस्कार हैं. इस तरह  वे इकलौती ऐसी व्यक्ति हैं जिनकी संतान ने नोबेल पुरस्कार जीता है.

Madame Curie, Pierre Curie, Nobel prize
मैडम क्यूरी (Madame Curie) की बेटियों ने उनके कामों में उनका हमेशा हाथ बटाया था.


इन दो तत्वों की खोज
मैडम क्यूरी ने दो नए तत्वों पोलोनियम और रेडियम की खोज की. 2011 में रेडियम के शुद्धिकरण पर नोबेल पुरस्कार पाने के बाद प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने एक्स रे रेडियोग्राफी के विकास में अपना समय लगा दिया. इसके  बाद उन्होंने अपना बहुत सारा समय रेडियोएक्टिविटी के चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग को समर्पित कर दिया.

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4 जुलाई 1934 को उन्होंने अंतिम सांस ली. उनकी मौत रेडिएशन के कारण अप्लास्टिक एनिमिया से हुई थी. वे नाभकीय भौतिकी और रसायन शास्त्र में अतुलनीय योगदान के लिए जानी जाती हैं
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