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पढ़ें क्यों आज अपनी ही हवेली में कैद हैं अमीर ख़ुसरो

फाइल फोटो- दरगाह हज़रत निज़ामउद्दीन औलिया.  यहां हज़रत अमीर ख़ुसरो का मज़ार है.
फाइल फोटो- दरगाह हज़रत निज़ामउद्दीन औलिया. यहां हज़रत अमीर ख़ुसरो का मज़ार है.

कस्बे के लोग मूर्ति लगवाना चाहते थे. लेकिन सियासत के चलते विवाद खड़ा हो गया. इस तरह वो मूर्ति हवेली में चल रही तहसील के कोषागार में बंद कर दी गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2018, 11:42 AM IST
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“छाप तिलक सब छीनी रे, मोसे नैना मिलाइके”
अमीर ख़ुसरो

सूफी संत और गायकों की न सिर्फ भारत और पाकिस्तान में बल्कि पूरी दुनिया में इज्जत है. सूफी गीत-संगीत कभी किसी एक धर्म के दायरे में बंधे नहीं रहे, बल्कि हर धर्म ने उन्हें बराबरी से अपनाया.

अमीर खुसरो हों या बाबा बुल्ले शाह हों, भारतीय उपमहाद्वीप में शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जिसने इन मशहूर सूफी संतों के नाम न सुने हों. गुजरे वक्त में गद्दी पर बैठने वाले बादशाह भले ही बदल गए हों, लेकिन इन सूफी संतों की विरासत ज्यों की त्यों न सिर्फ बरकरार रही बल्कि इनकी लोकप्रियता वक्त के साथ बढ़ती गई.
शायद ही किसी ने इस आपसी मेलजोल और ईश्वर तक पहुंचने की इस खूबसूरत विधा को खत्म करने की कोशिश की हो.



पटियाली की इसी तहसली में बंद है अमीर ख़ुसरो की मूर्ति.


इसी सूफी परंपरा के लोकप्रिय संत अमीर खुसरो को हालांकि आज के दौर में सियासत की पेचीदियों से दो-चार होना पड़ रहा है. अमीर खुसरो का जन्म 27 दिसंबर 1253 को उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के पटियाली में हुआ था. हालांकि जन्म तिथि को लेकर भी विवाद है. पटियाली में उनके नाम पर स्कूल, लाइब्रेरी और एक पार्क है और उनकी मजार दिल्ली में है.

अमीर खुसरो अपनी पहेलियों के लिए भी बहुत मशहूर थे और उनकी एक मशहूर पहेली की आखिरी लाइन थी, “अमीर खुसरो यों कहें बता पहेली मोरी” लेकिन, इस बार शायद खुद खुसरो सियासत की एक पहेली में फंस गए हैं.

पटियाली के रहने वाले एडवोकेट अनवर अली उर्फ इशार मियां बताते हैं, “कस्बे के लोग मूर्ति लगवाना चाहते थे. लेकिन सियासत के चलते विवाद खड़ा हो गया. इस तरह वो मूर्ति पार्क या लाइब्रेरी में तो नहीं लगी, अलबत्ता हवेली में चल रही तहसील की ट्रेजरी में बंद कर दी गई.

तहसील में कोषागार के इस कमरे में बंद है अमीर ख़ुसरो की मूर्ति.


करीब 13-14 साल पहले यहां खुसरो महोत्सव शुरू हुआ था. फिर बाद में बंद हो गया. अभी बीच में एक बार और हुआ था. अभी कुछ दिन पहले कस्बे की सराफा कमेटी ने डीएम को एक ज्ञापन दिया था. मांग की थी कि कोषागार में बंद मूर्ति को लगवाया जाए.

अमीर ख़ुसरो की मूर्ति लगवाने के लिए एसडीएम को ज्ञापन सौंपते पटियाली के लोग.


खुसरो के जन्म स्थान को लेकर उठे विवाद पर भी अनवर अली बताते हैं, “जिस किले या हवेली के हिस्से में तहसील चल रही है ये राजा द्रुपद का किला हुआ करता था. इतिहास के दस्तावेज बताते हैं कि खुसरो का जन्म इसी किले की चाहरदीवारी में हुआ था.”

एक बार पटियाली में गाना चाहते हैं एआर रहमान

अनवर बताते हैं, “मेरे एक दोस्त के जरिए संगीतकार एआर रहमान से बात हुई थी. उनकी ख्वाहिश थी कि मैं एक बार पटियाली में गाऊं. इसके लिए उन्होंने मुझसे कहा था कि आज कार्यक्रम आयोजित किजिए मैं आऊंगा. जिस पर बड़े खर्च को देखते हुए हमने मना किया तो बोले कि यहां आने के लिए मैं कोई पैसा नहीं लूंगा. यहां गाकर तो मेरे संगीत का हज हो जाएगा. एक्टर सलमा आगा ने भी यहां आने की ख्वाहिश ज़ाहिर की थी. कवि नीरज के भी कुछ इसी तरह के ख्याल थे.”

 

अमीर ख़ुसरो स्कूल के बच्चों ने भी मूर्ति लगवाने के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा.


एसडीएम (उपजिलाधिकारी) धीरेन्द्र सिंह का कहना है, “अमीर ख़ुसरो की मूर्ति कोषागार में सुराक्षित रखी हुई है. मूर्ति लगवाने की मांग की जा रही है. इस मामले को डीएम के सामने रख दिया गया है. जैसे भी निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.”

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