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क्या माता सीता की दो नहीं, केवल एक ही संतान थी?

जानकी नवमी के दिन कई जगहों पर व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है.

जानकी नवमी के दिन कई जगहों पर व्रत रखने की परंपरा चली आ रही है.

रामायण (Ramayana) के कई संस्करणों में जिक्र मिलता है कि देवी सीता (devi Sita) की दो नहीं बल्कि एक ही संतान थी, जिसका नाम लव (Luv) था. बाद में महर्षि वाल्मीकि (Valmiki) की वजह से सीता को दूसरी संतान के रूप में कुश (Kush) मिला. हालांकि वाल्मीकि रामायण में इसका कोई उल्लेख नहीं है.

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    वाल्मीकि रामायण (Valmiki Ramayana ) के अलावा भी राम-सीता (Ram-Sita) पर कई ग्रंथ लिखे गए हैं, जैसे अद्भुत रामायण, देवीभार्गव पुराण और जैन रामायण (Jain Ramayana). इन सबमें राम-सीता के कई वर्णन एक समान हैं लेकिन कहीं-कहीं कई दूसरी कहानियां भी मिलती हैं. जैसे जैन रामायण में बताया गया कि रावण को लक्ष्मण ने मारा था, न कि राम ने. इसी तरह से अद्भुत रामायण में मंदोदरी को सीता की मां बताया गया है. रामायण के एक और संस्करण जिसे आनंद रामायण कहते हैं, में राम को एक कठोर राजा बताया गया है, जिसके राज्य में प्रजा को हंसने की भी इजाजत नहीं थी. ऐसे ही कहीं-कहीं ये भी जिक्र मिलता है कि सीता माता ने एक ही पुत्र को जन्म दिया था.

    इन ग्रंथों में बताया गया है कि राम-सीता के अयोध्या लौटने के बाद सीता गर्भवती होती हैं. ये समाचार मिलते ही पूरा राजपरिवार प्रसन्न हो जाता है और उत्सव मनाने लगता है. लेकिन यही बात जब महल से होते हुए प्रजा तक पहुंचती है तो उनकी प्रतिक्रिया अलग थी.

    सबको ये बात पता था कि सीता सालों तक लंका में रहकर लौटी हैं


    सबको ये बात पता था कि सीता लंका में रहकर लौटी हैं. ऐसे में लोग सीता के चरित्र पर बात करने लगे. साथ ही ये सवाल भी उठने लगा कि राम ने सीता को क्योंकर अपनी पत्नी के रूप में रखा हुआ है, जबकि पराए पुरुष के साथ रहने के कारण उनका त्याग होना चाहिए था. उस युग में पति से अलग रहने वाली स्त्रियों के साथ यही किया जाता था. सीता के हवाले से प्रजा और खासकर स्त्रियां सवाल करने लगीं. आखिरकर जब माता सीता को ये बात पता चली तो उन्होंने खुद ही अयोध्या छोड़ने का फैसला ले लिया.

    इसके बाद का हिस्सा वाल्मीकि रामायण जैसा ही है, जिससे अनुसार लक्ष्मण सीता को छोड़ने जंगल आए, जहां महर्षि वाल्मीकि सीता का इंतजार कर रहे थे. आश्रम पहुंची गर्भवती सीता का दुख देखते हुए वाल्मीकि ने उन्हें धीरज रखने और आम संन्यासिनों की तरह जीवन बिताने की सलाह दी. सीता दूसरी स्त्रियों की तरह रहने लगी और आश्रम के कामकाज में हाथ बंटाने लगीं.

    सीता दूसरी स्त्रियों की तरह रहने लगी और आश्रम के कामकाज में हाथ बंटाने लगीं


    इस बीच अयोध्या में सीता का त्याग कर चुके राम की हालत कुछ अच्छी नहीं थी. अपनी गर्भवती पत्नी को छोड़ने के कारण वे काफी दुखी थे और उसी तरह से रहते जैसे जंगलों में दूसरे संन्यासी रहते हैं. वे राजमहल का भोजन नहीं करते थे और जमीन पर कुश बिछाकर सोया करते. हालांकि वे राज्य का कामकाज अच्छी तरह से संभाल रहे थे.

    इस बीच सीता का गर्भ पूरा हुआ और उन्होंने एक मनोहारी पुत्र को जन्म दिया. वैसे सीता के पुत्र जन्म को लेकर कई ग्रंथों में अलग-अलग कहानियां हैं. जैसे लोक कथाओं में कहा जाता है कि सीता ने जुड़वा पुत्रों को जन्म दिया था, जबकि वाल्मीकि रामायण में दो पुत्रों के जन्म का जिक्र नहीं है. एक कथा में कुश ने किस तरह से जन्म लिया, इसका जिक्र मिलता है. कथा के अनुसार आश्रम की दूसरी संन्यासी स्त्रियों की तरह काम कर रही सीता को लव के जन्म के कुछ वक्त बाद लकड़ी लाने जंगल जाना था.

    हूबहू लव की तरह दिखने वाला बालक कुश लव के जुड़वा भाई की तरह जाना गया


    कुछ जगहों पर ये भी लिखा है कि सीता को स्नान के लिए नदी पर जाना था. अब नन्हे लव को लेकर तो वे जा नहीं सकती थीं इसलिए थोड़ा सोचकर उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को कुछ देर के लिए उसे संभालने को कहा. वाल्मीकि उस समय किसी काम में जुटे हुए थे. उन्होंने हां तो कह दिया लेकिन सीता ने देखा कि उनका ध्यान लव पर नहीं था. ये देखते हुए मां ने लव को अपने साथ ही ले जाने का फैसला किया और निकल पड़ी.

    इधर काम खत्म करने के बाद वाल्मीकि का ध्यान जब बिछौने पर गया तो वहां लव नहीं दिखा. उन्हें ये नहीं पता था कि झुंझलाई हुई सीता पुत्र को साथ लेकर जा चुकी हैं. वे घबरा गए कि पहले से ही दुखी सीता का पुत्र भी गायब हो चुका है और लौटने पर वे और ज्यादा दुखी हो जाएंगी. काफी सोचने के बाद महर्षि वाल्मीकि ने एक उपाय निकाला. उन्होंने कुश (एक तरह की पवित्र घास, जिसका उपयोग पूजा-पाठ में होता है) को हाथ में लेकर मंत्र पढ़ा और कुश एक शिशु में बदल गया. ये शिशु बिल्कुल लव की तरह ही दिखता था. वाल्मीकि ने इरादा किया कि सीता के लौटने पर वे इसी पुत्र को लव कहते हुए उन्हें सौंप देंगे.

    सीता लौटीं तो ऋषि उनके पास लव को देखकर भौंचक्का रह गए. इधर सीता एक और पुत्र को पाकर काफी प्रसन्न थीं. उन्होंने कुश से जन्मे बालक का नाम कुश ही रखा. हूबहू लव की तरह दिखने वाला ये बालक लव के जुड़वा भाई की तरह जाना गया.

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