जन्मदिन विशेष: जानिए मोतीलाल नेहरू के बारे में कुछ कम सुने तथ्य

मोतीलाल नेहरू  (Motilal Nehru)अपने जमाने के सबसे अमीर वकीलों में से माने जाते थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru)अपने जमाने के सबसे अमीर वकीलों में से माने जाते थे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

मोतीलाल नेहरू (Motinlal Nehru) भारत के सबसे अमीर वकीलों (Lawyer) में एक गिने जाते थे. गांधीजी (Mahatma Gandhi) के संपर्क में आने के बाद उन्होंने अपनी ठाठबाट वाली जिंदगी छोड़ दी थी.

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मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru) भारतीय इतिहास (Indian History) में एक अहम शख्सियत हैं. उन्हें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) के पिता के रूप में ज्यादा जाना जाता है. उनके बारे में मशहूर है कि वे भारत के सबसे अमीर वकील हुआ करते थे. उनकी अमीरी के बहुत सारे किस्से मशहूर हैं, लेकिन आज हम उनके बारे में उन तथ्यों के बारे में चर्चा करेंगे जिनके बारे में लोग कम जानते हैं.

पिता को नहीं देख सके थे मोतीलाल

मोतीलाल नेहरू का जन्म 6 मई 1861 को प्रयागराज, या उस समय के इलाहबाद में हुआ था. उनके पिता का नाम गंगाधर नेहरू और माता का नाम इंद्राणी थी. उनके पैदा होने के तीन महीने पहले ही उनके पिता का देहांत हो गया था जो दिल्ली में कोतवाल थे. उनके लालन पालन उनके बड़े भाई नंदलाल नेहरू ने किया था जो राजस्थान के खेतड़ी में दीवान थे.

मुश्किल हालातों में जन्म
1857 के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के समय ही गंगाधर को दिल्ली छोड़ना पड़ा. बगावत के दौरान उनका घर लूटकर जला दिया गया था. वे सपरिवार अपने रिश्तेदारों के साथ आगरा आ गए. पिता की मौत के समय नंदलाल 16 और बंसीधर 19 साल के थे.  मामा ने परिवार की मदद की लेकिन जल्द ही नंदलाल को राजस्थान के खेतड़ी में क्लर्क की नौकरी मिली और उन्होंने परिवार के साथ मोतीलाल को अपने ही वंशज की तरह पाला.

मोतीलाल भी गए थे कैम्ब्रिज

बाद में नंदलाल खेतड़ी के दीवन बने और उन्होंने मोतीलालकी सारी शिक्षा का खर्चा उठाकर कैम्ब्रिज यूनिवसिटी भेजा जहां उन्होंने मोतीलाल ने कानून की डिग्री हासिल की. वे पाश्चात्य शिक्षा पाने वाले पहले भारतीयों में से एक माने जाते हैं. उससे पहले पूरा परिवार आगरा चला गया.



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मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru) विदेश में पढ़े सबसे पहले भारतीयों में एक माने जाते हैं. (फाइल फोटो)

कानपुर से की शुरू की वकालत

वकील की परीक्षा पास करने के बाद मोतीलाल ने पहले कानपुर में प्रैक्टिस की लेकिन बाद में इलाहबाद हाइकोर्ट में प्रैक्टिस के लिए इलाहबाद चले आए. मोतीलाल ने दीवानी मुकदमों में खूब नाम और पैसा कमाया. उनके क्लाइंट बड़े रईस परिवार हुआ करते थे जिनसे वे खूब मोटी फीस लिया करती थे. धीरे धीरे वे देश के सबसे धनी वकीलों में गिने जाने लगे.

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चरम पर वकालत

साल 1900 में उन्होंने इलाहबाद के सिविल लाइन में एक आलीशान बंगला खरीदा जिसे आनंद भवन नाम दिया जो आज नेहरू गांधी परिवार का संग्रहालय है. उन्होंने 1909 में ब्रिटेन के प्रिवी काउंसिल में वकालत करने की योग्यता हासिल कर ली थी. लेकिन उनका बार बार यूरोप जाना भी कम चर्चा में नहीं रहा.

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कांग्रेस की वह मशहूर नेहरू रिपोर्ट जिसमें पूर्ण स्वराज की मांग की थी, मोतीलाल नेहरू (Motilal Nehru) ने लिखी थी. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

गांधी जी से मुलाकात और परिवर्तन

मोतीलाल और महात्मा गांधी की मुलाकात साल 1918 में हुई उससे पहले वे कांग्रेस में आ चुके थे और एक अखबार भी शुरू कर चुके थे. गांधी जी से मुलाकात के बात मोतीलाल भव्यता छोड़ने वालों में सबसे आगे रहे और पूरी तरह से स्वदेशी कपड़े अपना लिए. लेकिन परिवार के खर्चों के लिए उन्होंने वकालत जारी रखी.

फिर आजादी के लिए सक्रियता

मोतीलाल 1919 में और 1928 में कांग्रेस के अध्ययक्ष भी चुने गए. 1922 में असहयोग आंदोलन में वे गिरफ्तार भी हुए. उन्होंने देशबंधु चितरंजन दास के साथ मिलकर स्वराज पार्टी का भी निर्माण किया और यूनाइटेड प्रोविंसेस लेजिस्लेटिव काउंसिल के विपक्ष के नेता भी बने.

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बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीयों के द्वारा लिखा गया जो पहला संविधान माना जाता है वह नेहरू रिपोर्ट वास्तव में मोतीलाल नेहरू ने ही लिखी थी. इस रिपोर्ट में ही सबसे पहले डोमिनियन स्टेट की खुल कर मांग की गई थी.

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