Birthday Bhikaiji Cama : विदेशी जमीं पर पहली बार भारतीय झंडा फहराने वाली महिला

भीकाजी कामा (फाइल फोटो). भारतीय डाक विभाग ने 1962  में उन पर एक डाक टिकट जारी किया था.
भीकाजी कामा (फाइल फोटो). भारतीय डाक विभाग ने 1962 में उन पर एक डाक टिकट जारी किया था.

भीकाजी कामा मुंबई (Mumbai) में पैदा हुईं थीं. पारसी (Paresis) धर्म की थीं. विदेश में भारत की आजादी की आवाज उठाने वालों में वो प्रमुख लोगों में थीं. 1907 में पहली बार विदेशी धरती पर भीकाजी कामा (Bhikaji Cama) ने भारतीय झंडा (Indian Flag) फहराया था. उस वक्त भीकाजी कामा द्वारा बनाया गया झंडा आज के झंडे से बिल्कुल अलग था...

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 10:42 AM IST
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ऐ दुनियावालों देखो, यही है भारत का झंडा. यही भारत के लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, इसे सलाम करो. इस झंडे को भारत के लोगों ने अपने खून से सींचा है. इसके सम्मान की रक्षा में जान दी है. मैं इस झंडे को हाथ में लेकर आजादी से प्यार करने वाले दुनियाभर के लोगों से अपील करती हूं कि वो भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों का समर्थन करें.

विदेशी धरती पर पहली बार भारतीय झंडा (Indian Flag) फहराने के बाद भीकाजी कामा (Bhikaji Cama) ने यही स्पीच दी थी. तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनके ओजस्वी भाषण का वहां मौजूद लोगों ने स्वागत किया था. भीकाजी कामा ही वो पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने 1907 में पहली बार विदेशी धरती पर भारतीय झंडा लहराया था.

भीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टुटगार्ट में हुई दूसरी इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस में ये झंडा फहराया था. ये आज के झंडे से बिल्कुल अलग था. बताया जाता है कि इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस में हिस्सा लेने वाले सभी देशों का झंडा लगा हुआ था. भारत के लिए ब्रिटिश झंडा लगा था. मैडम भीकाजी कामा को ये मंजूर नहीं था. उन्होंने एक नया झंडा बनाया और सभा में फहराया. वो पहला मौका था, जब विदेशी जमीं पर पहली बार कोई भारतीय झंडा लहराया गया था.



कैसा था भीकाजी कामा का बनाया झंडा?
भीकाजी कामा द्वारा बनाया झंडा आज के झंडे से बिल्कुल अलग था. इसमें हरे, पीले और लाल रंग की तीन पट्टियां थीं. सबसे ऊपर हरा रंग था, जिसपर 8 कमल के फूल बने हुए थे. ये आठ फूल उस वक्त भारत के 8 प्रांतों को दर्शाते थे. बीच में पीले रंग की पट्टी थी. पीली पट्टी पर वंदे मातरम लिखा था. सबसे नीचे नीले रंग की पट्टी थी, जिस पर सूरज और चांद बने थे. पुणे की केसरी मराठा लाइब्रेरी में ये झंडा अब भी सुरक्षित रखा है.

bhikaji cama the lady who unfurled indian flag on foreign land first
भीकाजी कामा


भीकाजी कामा ब्रिटिश कालीन बॉम्बे में एक अमीर पारसी भीकाई सोराब जी पटेल के घर 24 सितंबर 1861 को पैदा हुई थीं. भीकाई पटेल उस वक्त पारसी समुदाय के एक मशहूर शख्सियत थे. भीकाजी ने अपनी पढ़ाई एलेक्जेंड्रा नेटिव गर्ल्स इंग्लिश इंस्टीट्यूशन से की. 1885 में उनकी शादी रुस्तम कामा से कर दी गई. रुस्तम ब्रिटिश समर्थक वकील थे जो आगे चलकर नेता बनना चाहते थे. उनके विचारों की वजह से भीकाजी की उनसे नहीं पटी. वो अपना ज्यादातर समय सामाजिक कार्यों में ही देने लगीं.

अपनी समाजसेवा के लिए जानी गईं भीकाजी कामा
1896 में तत्कालीन बॉम्बे राज्य में प्लेग बीमारी ने अपना प्रकोप दिखाया. पीड़ितों की सेवा के दौरान भीकाजी खुद भी इस बीमारी की चपेट में आ गईं. उनकी तबियत बहुत ज्यादा खराब हो गई. बाद में उन्हें बेहतर इलाज के लिए ब्रिटेन भेज दिया गया. वहीं पर वो भारतीय राष्ट्रवादी श्याम जी कृष्ण वर्मा के संपर्क में आईं. उस समय श्याम जी कृष्ण वर्मा ब्रिटेन के भारतीय समुदाय में काफी मशहुर हुआ करते थे.

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भीकाजी कामा द्वारा बनाया भारतीय झंडा


कुछ सालों बाद भीकाजी की जिंदगी में वो क्षण भी आया जिसके लिए उन्हें आजतक याद किया जाता है. 22 अगस्त 1907 जब दुनिया भर की सोशलिस्ट पार्टियों के प्रतिनिधि स्टुटगार्ड में इकट्ठा हुए तो भीकाजी कामा ने भारत में फैले अकाल की पूरी स्थिति वहां मौजूद लोगों के सामने रखी. उन्होंने मानवाधिकारों, समानता और ब्रिटेन से आजादी की दुहाई देकर दुनिया भर के बड़े समाजवादी नेताओं के सामने भारतीय झंडा लहराया. भीकाजी कामा के इस साहस ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं.

भीकामजी कामा और श्याम जी कृष्ण वर्मा द्वारा डिजाइन किए गए इस झंडे को वर्तमान भारतीय झंडे की आधारशिला के तौर पर भी देखा जाता है.
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