Birthday Hydarabad Nizam : निजाम की 05 शादियों से लेकर दो कमरे में रहने की कहानी

हैदराबाद के आठवें और आखिरी निजाम मुकर्रम जेह, जिनका आज जन्मदिन है.
हैदराबाद के आठवें और आखिरी निजाम मुकर्रम जेह, जिनका आज जन्मदिन है.

हैदराबाद (Hyderabad) के आठवें निजाम (Last Nizam) मुकर्रम जेह (Mukarram Jah) का आज यानि 06 अक्टूबर को जन्मदिन है. वो दशकों पहले ही उस शहर को छोड़ चुके हैं, जहां उनके बाबा और वंश के लोग शासन किया करते थे, जिनके वैभव और दौलत की कहानियां अब भी बिखरी पड़ी हैं. कहां और किस हाल में हैं हैदराबाद के आखिरी निजाम

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 2:50 PM IST
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हैदराबाद (Hyderabad) के मौजूदा निजाम मुकर्रम जेह का आज यानि 06 अक्टूबर को जन्मदिन होता है. वो अब इतिहास का हिस्सा बेशक हो चुके हैं लेकिन एक जमाना था जब उनका परिवार दुनिया का सबसे धनी परिवार कहलाता था. उनकी रंगीन और लग्जरी से भरी जिंदगी अखबारों में चर्चाओं में रहती है. अब शायद किसी को मालूम हो कि वो कहां हैं, किस हाल में रहते हैं. हां, कुछ समय पहले वो जरूर चर्चाओं में आए थे.

फ्रांस के नीस में एक महल में पैदा हुए मुकर्रम अब 87 साल के हो चुके हैं. वो हैदराबाद के आखिरी निजाम थे. उनके बाद कोई निजाम नहीं हुआ. मुकर्रम का जन्म 05 अक्टूबर 1933 में हुआ था. उनके पिता की जगह उन्हें आठवां निजाम बनाया है. वो अपने पिता आजम जेह की सबसे बड़ी संतान थे. वो अब भी हैदराबाद में कई ट्रस्टों के प्रमुख हैं और कई संपत्तियों के मालिक लेकिन इनमें से ज्यादातर कानूनी लड़ाइयों में उलझी हैं.

जानकारों का कहना है कि आखिरी हैदराबाद निजाम को लंबा समय हो गया, अपने उस शहर में आए हुए, जहां के वो आखिरी निजाम थे. ये भी कहा जाता है कि वो मोटे कर्जदार हो चुके हैं. अब उनकी जिंदगी तुर्की के आलीशान दो कमरे के फ्लैट में बीतती है. हालांकि वो तन्हा जिंदगी गुजार रहे हैं. उन्होंने अपनी जिंदगी में 05 शादियां कीं. कई औलाद पैदा कीं लेकिन कोई उनके साथ नहीं है. तुर्की में उनकी ननिहाल भी है. उनकी मां यहां के खलीफा वंश से ताल्लुक रखती थीं. मां धुर्रशहवर सुल्तान को एक जमाने में दुनिया की सबसे सुंदर महिलाओं में गिनी जाती थीं.



पिछले दिनों वो तब चर्चाओं में आए जबकि लंदन के हाईकोर्ट में निजाम परिवार और भारत सरकार ने मिलकर पाकिस्तान को उस मोटी रकम से वंचित किया था, जिसे उनके पिता और सातवें निजाम ने 1948 में बैंक के जरिए पाकिस्तान को ट्रांसफर किया. फिर अपना इरादा बदल लिया. जब ये मुकदमा जीता गया, तब वो रकम 300 करोड़ के आसपास हो चुकी थी.
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आखिरी निजाम की कहानी भी खासी दिलचस्प है. 1948 में जब भारतीय फौजों ने ऑपरेशन पोलो के जरिए हैदराबाद रियासत पर कब्जा किया, तब तक ये रियासत देश की सबसे बड़ी, ताकतवर और सबसे धनी रियासत थी. तब सातवें निजाम उस्मान अली खान सत्ता में थे. उनकी गिनती दुनिया के सबसे रईस लोगों में होती थी.

बेहिसाब दौलत थी कभी निजाम के पास 

कहा जाता है कि इस निजाम के पास बेहिसाब दौलत थी. कहा जाता है कि उसके अपने निजी खजाने में किलो में हीरे तौले जाते थे और टनों में सोने के जेवर थे. बहुमूल्य सामान तो ना जाने कितने थे और साथ में थी लंबी चौड़ी प्रॉपर्टी, महल और नगदी.

उस जमाने में कहा जाता था कि बैंक में जितना पैसा और घर में जितनी नकदी निजाम के पास थी, उतनी देश में शायद किसी के पास नहीं रही होगी. लेकिन इस निजाम को उतना ही कंजूस भी माना जाता था, जिसकी कंजूसी के भी ना जाने कितने ही किस्से प्रचलित थे.  इस निजाम के बारे ये भी कहा जाता है कि उनकी कई बीवियां हैं.

सातवें निजाम का निधन 1967 में हुआ. उसके बाद कायदे से निजाम के पद पर उनके सबसे बड़े बेटे आजम जाह को बैठना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं बल्कि आठवें निजाम के तौर पर जिस शख्स की ताजपोशी हुई वो आजम के ही सबसे बड़े बेटे मुकर्रम जेह थे.

पहले दून स्कूल और फिर लंदन में पढ़ाई 
मुकर्रम को पढ़ने के लिए दून स्कूल भेजा गया. फिर हैरो लंदन और कैंब्रिज. उन्होंने बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में भी दाखिला लिया. जब 1967 में मुकर्रम की ताजपोशी हुई, उस समय वो खुद भारत के सबसे रईस लोगों में गिने जाते था. मुकर्रम की जीवनशैली खासी खर्चीली थी. हैदराबाद में रहने से उसको अरुचि थी.

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आस्ट्रेलिया में जाकर बस गए थे
70 के दशक में खबर आई कि नए निजाम ने ऑस्ट्रेलिया में एक बहुत बड़ा एस्टेट खरीद लिया है, जहां उसका फॉर्म हाउस है, जिसमें भेडों का एक बड़ा फॉर्म भी है. मुकर्रम ने पर्थ में एक आलीशान बंगला भी खरीदा.

आस्ट्रेलिया के मीडिया में उन्हें लेकर चटखदार खबरें अक्सर चर्चा में रहती थीं. निजाम वहां अपनी पहली बीवी इजरा के साथ ही जाना चाहते थे लेकिन बीबी ने जब मना कर दिया तो उन्होंने उसे तलाक दे दिया. जिसकी एवज में मोटा मुआवजा देना पड़ा.

वर्ष 1967 आठवें निजाम के रूप में मुकर्रम जेह की ताजपोशी हुई लेकिन उन्हें हैदराबाद से अऱुचि थी. वो जल्दी ही आस्ट्रेलिया में जाकर बस गए.


निजाम ने एयरहोस्टेस से रचाई दूसरी शादी 
बस यहीं से निजाम के जिंदगी की अजब कहानी शुरू होती है. आस्ट्रेलिया में वो बेहिसाब पैसा लुटा रहे थे. लाइफ स्टाइल ऐसी कि कोई भी रश्क करे. वहां उनका दिल एक एयर होस्टेस सिमोंस पर आया. जो बीबीसी में भी काम कर चुकी थी. बला की खूबसूरत थी सिमोंस, शादी के बाद उसने अपना धर्म बदला.वो आयशा बन गई. इस शादी की ऑस्ट्रेलिया में बड़ी चर्चा हुई थी.

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बाद में ये भी खबर आई कि आयशा की एड्स से मौत हो गई. लेकिन इससे भी बड़ी खबर ये थी कि मुकर्रम को आस्ट्रेलिया में अपने खर्च के लिए जब भी पैसे की जरूरत होती थी वो तुरंत हैदराबाद में महल और प्रॉपर्टी की देखभाल कर रहे लोगों से पैसा भेजने को कहते थे. उन्हें कितना पैसा भेजा गया, इसका हिसाब किसी के पास नहीं है लेकिन ये जरूर हुआ कि उनके महल से बेशकीमती सामान और आभूषण गायब होने लगे. एक समय ये आया कि खजाना करीब खाली हो चुका था.

कर्ज में डूबने लगे निजाम, हाथ से निकल गई ऑस्ट्रेलिया की प्रॉपर्टी
90 का दशक आते आते आठवां निजाम कर्ज में डूबने लगा था. तब उसने हैदराबाद के एक बड़े ज्वैलर सरादुद्दीन जवेरी को अपनी प्रापर्टी का मैनेजर बनाया. उससे पैसा लेने लगा. ये 90 का दशक था. जवेरी बेशक पैसा दे रहा था लेकिन उसकी कीमत भी उसे वसूल करनी थी. जब ये कर्ज की रकम बहुत ज्यादा हो गई तो जवेरी ने आस्ट्रेलिया की दोनों प्रापर्टी पर कब्जा कर लिया. हालांकि उसका कहना था कि अब भी निजाम ने उसके कर्ज की पूरी रकम चुकाई नहीं है. निजाम के साथ उसका मुकदमा चल रहा है.

अब हैदराबाद की प्रापर्टी चाहकर भी नहीं बेच सकते निजाम

निजाम की हालत अब ये है कि उनके पास हैदराबाद अचल संपत्तियां महल और प्रापर्टी जरूर हैं लेकिन वो सब ट्रस्ट के जरिए संचालित, जिसे वो चाहकर भी बेच नहीं सकते. 90 के दशक के आखिर तक जब इन महलों और प्रापर्टी का बुरा हाल होने लगा तो पहली बीबी इजरा ने इसे ट्रस्ट के साथ मिलकर अपने हाथों में लिया और सही किया. काफी हद तक ट्रस्ट और राजशाही की आर्थिक स्थिति को भी उबारना शुरू किया. फलकनुमा पैलेस को होटल ताज ग्रुप को दे दिया गया.

आठवें निजाम मुकर्रम जेह अब सालों से हैदराबाद नहीं आए. यहां वो कई संपत्तियों के ट्रस्टी जरूर हैं लेकिन इसमें से किसी पर उनका अकेले का मालिकाना हक नहीं


फिर निजाम ने तीन और शादियां रचाईं
निजाम मुकर्रम ने तीसरी शादी 1992 में रचाई. ये शादी उन्होंने "मिस तुर्की" रह चुकी ओत्तोमान वंश की शहजादी मनोलिया ओनुर से रचाई, जो केवल पांच साल चली. फिर तलाक हो गया. इसमें भी काफी पैसा हर्जाने के तौर पर देना पड़ा. मुकर्रम यहीं नहीं रुके, इसके बाद दो और शादियां रचाईं. आठवें निजाम के कुल पांच बच्चे हैं.

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अब दो कमरों के फ्लैट में रहते हैं अकेले 
अब वो लंबे समय से तुर्की में एक दो कमरे के फ्लैट में रह रहे हैं. हैदराबाद बहुत कम आते हैं. हैदराबाद के ट्रस्टों से जो कमाई होती है, उसका कुछ हिस्सा उनके पास जाता है लेकिन माना जाता है कि वो 87 की उम्र में भी कर्जों से दबे हुए हैं. ढेर सारी बीमारियां उन्हें घेर चुकी हैं. याददाश्त साथ नहीं देती.  आमतौर पर वो सबसे कटे हुए हैं. जिंदगी अकेलेपन के बीच बीत रही है.

हालांकि माना जाता है कि वो अब भी करीब 700 करोड़ की संपत्ति का मालिक है लेकिन कानूनी तौर पर वो अकेले इनमें किसी भी संपत्ति को बेच नहीं सकते. मुकर्रम के बारे में पिछले कुछ सालों में जो कुछ प्रकाशित हुआ, उससे लगता है कि वो अपनी जिंदगी में फिर आस्ट्रेलिया लौटना चाहते थे. वहां की खोई प्रापर्टी हासिल करना चाहते थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका.

अब आठवें निजाम मुकर्रम जेह जिंदगी आमतौर पर तुर्की के दो कमरे के फ्लैट में बीत रही है और वो भी तन्हा. 87 की उम्र में याददाश्त उनका साथ देती नहीं, वो कई बीमारियों के भी शिकार हो चुके हैं


मुकर्रम जाह ने कभी कहा था, वो नेहरू के दोस्त थे. जब नेहरू प्रधानमंत्री थे तब उन्होंने उनके सामने मुस्लिम देश में भारत का राजदूत बनने का प्रस्ताव भी रखा था, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया था.

वो भारत का एक ऐसा वैभवपूर्ण अतीत हैं, जिसकी ना जाने कितनी ही कहानियां अब भी बिखरी हैं. हैदराबाद जाने पर उनके परिवार की ताकत और बेहिसाब दौलत का अंदाज हो सकता है. हैदराबाद शहर में एक नहीं कई जगहों पर निजाम परिवार से जुड़ी छाप नजर आती है. हालांकि निजाम के किस्से-कहानियां कहने वाली पीढ़ी भी अब बूढ़ी हो रही है.
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