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Birthday JRD Tata : कांग्रेस ज्वाइन करना चाहते थे जेआरडी ने लेकिन क्योंं ऐसा नहीं किया

जेआरडी टाटा (JRD Tata) हमेशा देश को आर्थिक तौर पर मजबूत और खुशहाल देखना चाहते थे.

जेआरडी टाटा (JRD Tata) हमेशा देश को आर्थिक तौर पर मजबूत और खुशहाल देखना चाहते थे.

भारत को औद्योगिक देश बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले जेआडी टाटा (JRD Tata) का आज जन्मदिन है. वो ऐसे शख्स थे, जो हमेशा अपनी राय को बेबाकी से रखते रहे. आजादी के साथ उनके कई भारतीय प्रधानमंत्रियों से नजदीकी रिश्ते भी रहे. कैसे थे उनके रिश्ते, किस प्रधानमंत्री की उन्होंने तारीफ

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    जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा यानी जेआरडी या ‘जेह’ का आज जन्मदिन है. उन्होंने एयर इंडिया को खड़ा किया. टाटा इंजीनियरिंग एंड लोकोमोटिव कंपनी (टेल्को) बनाई. अपनी सारी संपत्ति टाटा संस के नाम कर दी. टाटा देश के सबसे उद्योगपतियों में थे. भारतीय प्रधानमंत्रियों के साथ आखिर उनके रिश्ते कैसे थे. उन्होंने अपने युवाकाल में कांग्रेस भी ज्वाइन करने की सोची लेकिन बाद में ये इरादा छोड़ दिया.

    एसए सबावाला और रुसी एम लाला की क़िताब, ‘कीनोट’ में जेआरडी के हवाले से लिखा है, ‘जब मैं जवान था तब कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने का विचार आया था. पर जब देखा कि नेता बनकर जेल जाना होगा, वहां रखकर कुछ ख़ास नहीं कर पाऊंगा और न ही जेल के जीवन से अभ्यस्त हो पाऊंगा, इसलिए मैंने उद्योग के ज़रिये देश की सेवा करने का निश्चय किया.’

    कैसे थे देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू से रिश्ते
    जेआरडी देश के पहले प्रधानमंत्री के समाजवाद से प्रभावित नहीं थे. हालांकि जेआरडी उनके प्रशंसक और दोस्त थे. एक इंटरव्यू में जेआरडी ने बताया था कि वे जब भी आर्थिक मसलों पर बात करते, तब आमतौर पर नेहरू उस पर ध्यान नहीं देते थे. एयर इंडिया के राष्ट्रीयकरण को लेकर दोनों में मतभेद था. जेआरडी नहीं चाहते थे कि एयर इंडिया को सरकार चलाये. आखिरकार जीत नेहरू की हुई.

    नेहरू से पूछा था कि राजाजी की पार्टी को फंड करूं या नहीं
    टाटा समूह कांग्रेस पार्टी को फंड करता था. 1961 में राजा गोपालाचारी ने जेआरडी को ख़त लिखकर ‘स्वतंत्र पार्टी’ के लिए चंदा मांगा. तब जेआरडी ने नेहरू को ख़त लिखा. जेआरडी की दलील थी कि वे नहीं चाहते कि कम्युनिस्ट पार्टी देश में दूसरे नंबर की पार्टी बनी रहे क्योंकि उसकी आत्मा में लोकतंत्र नहीं है, लिहाज़ा उन्होंने ‘स्वतंत्रता पार्टी’ को चंदा देकर मज़बूत बनाने का निर्णय लिया है. नेहरू ने इसके लिए रजामंदी दी लेकिन ये भी लिखा, ‘स्वतंत्र पार्टी’ देश में कभी मज़बूत स्थिति में नहीं आ पायेगी.

    जेआरडी टाटा (JRD Tata) देश के पहले भारतीय थे, जिन्हें कामर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल हुआ था. जब टाटा एयरलाइंस ने सबसे पहले इस देश में आपरेशन शुरू किए, तब वो खुद भी विमान उड़ाते थे.

    मोरारजी देसाई को कभी माफ नहीं किया
    जेआरडी के जीवन में सबसे ख़राब क्षण, जिसे उन्होंने खुद माना, वो ये था जबकि उनके एक समय के दोस्त और तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन्हें एयर इंडिया से बाहर कर दिया. उनकी जगह उनके जूनियर अधिकारी को चेयरमैन बना दिया. ये भी नहीं सोचा कि एक बार इस बारे में जेआरडी को भी बता दें. जब अखबारों ने इस मामले में देसाई की खिंचाई की तो मोरारजी ने उन्हें चिट्ठी लिखी और सरकार के फैसले के बारे में बताया. जेआरडी इतने आहत हुए कि मोरारजी को कभी माफ़ नहीं कर सके.

    इंदिरा गांधी की तारीफ भी की
    जेआरडी उन कुछ लोगों में थे, जिन्होंने इंदिरा गांधी के आपातकाल को ठीक माना था. क्योंकि इस दौरान हड़तालें और प्रदर्शन रुक गए थे, जिसका फायदा उद्योग जगत को फ़ायदा हुआ. पिछले दिनों हमने ये पढ़ा है कि किस तरह इंदिरा गांधी ने जेआरडी को एक पत्र लिखकर कहा था आप जब भी मुझसे मिलना चाहें या राय देना चाहें, आपका स्वागत है. हालांकि जब इंदिरा के राष्ट्रीयकरण की पहल की तो दोनों के बीच इसे लेकर मतभेद भी थे.

    इंदिरा गांधी से उनके रिश्ते अच्छे जरूर थे लेकिन राष्ट्रीयकरण को लेकर मतभेद भी थे. नेहरू की भी बहुत सी नीतियों को लेकर वो सहमत नहीं थे.

    राजीव गांधी के साथ रिश्ते
    राजीव गांधी जब अर्थव्यवस्था के बंद दरवाज़े खोल रहे थे तो उन्होंने आर्थिक मसलों पर उद्योगपतियों की राय जानने की कोशिश की. 1991 में जब अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खुली तो तब 87 वर्ष के जेआरडी ने कहा था कि उन्हें इस बात से ख़ुशी और मलाल दोनों ही है. ख़ुशी इसलिए कि आख़िर जो सही रास्ता है देश ने अपना लिया. मलाल इसलिए कि उम्र के इस पड़ाव पर वो इसका हिस्सा नहीं बन पाएंगे.

    जेआरडी को 1992 में सरकार ने ‘भारत रत्न’ से नवाज़ा. तब उन्होंने एक भाषण में कहा था, ‘एक अमेरिकी अर्थशास्त्री ने कहा है कि आने वाली सदी में भारत आर्थिक महाशक्ति बन जायेगा. मैं ये नहीं चाहता. मैं चाहता हूं कि भारत एक ख़ुशहाल देश बने.’

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