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birthday Mulayam Singh Yadav : तब रातोंरात मुलायम के हाथों से सरक गई थी पीएम की गद्दी

birthday Mulayam Singh Yadav : तब रातोंरात मुलायम के हाथों से सरक गई थी पीएम की गद्दी

मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)

मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)

तीन बार उत्तर प्रदेश (UP) के मुख्यमंत्री (Chief Minister) रहे मुलायम सिंह यादव का आज यानि 22 नवबंर को जन्मदिन है. वो 82 साल के हो गए. उनका सियासी सफर लंबा और जीवट भरा है लेकिन इसमें ये भी दिखता है कि वो जमीन से जुडे़ और आत्मविश्वास वाले ऐसे नेता रहे हैं, जिनके पास भरपूर जनाधार रहा है. एक बार तो वो सबकुछ तय होने के बाद भी प्रधानमंत्री बनते बनते रह गए.

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    प्रधानमंत्री बनने का मुलायम सिंह यादव का सपना भले ही अब दूर हो गया हो लगता हो लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में ऊंचाई उन्होंने हासिल की, वो वाकई किसी भी नेता के लिए एक सपना ही होता है. आज उनका जन्मदिन है. 82 साल पहले 22 नवंबर 1939 के दिन उत्तर प्रदेश के इटावा के सैफई गांव में उनका जन्म हुआ था. उन्होंने अपने बल पर राजनीति का एक बड़ा और लंबा सफर तय किया.

    मुलायम सिंह यादव राजनीति में आने से पहले टीचर के तौर पर काम करते थे. वो पहलवानी के अखाड़े में भी उतरा करते थे. उन्हें दंगल का बहुत शौक था. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वो राजनीति में आएंगे लेकिन मधु लिमये, राज नारायण और राम सेवक यादव के साथ रहने की वजह से वो भी नेता बन गए.

    रातों रात खेल हुआ और पीएम की गद्दी हाथ से सरक गई
    अपने राजनीतिक करियर वह 09 बार जेल गए. उनके जीवन में एक समय ऐसा भी आया था जब उन्हें सबकी सहमति से पीएम पद पर बिठाने की तैयारी हो गई. शपथ ग्रहण का समय तक तय हो चुका था. सुबह 08.00 बजे शपथ होनी थी. लेकिन मामला बिगड़ गया. घर पर हजारों लोगों की भीड़ जुट गई. दरअसल ये बात 1996 की है. लेकिन पर्दे के पीछे से रातोंरात खेल हो गया.

    तब मुलायम रक्षा मंत्री बने
    बताया जाता है कि लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके नाम पर सहमति नहीं दी, जिसकी वजह से मुलायम पीएम बनते-बनते रह गए थे. अगले दिन एचडी देवगौड़ा को पीएम पद की शपथ दिलाई गई. देवगौड़ा मिली-जुली सरकार में पीएम बने थे. इस सरकार को बीजेपी ने समर्थन दिया. मुलायम सिंह यादव रक्षा मंत्री बनाया गया. हालांकि ये सरकार जल्दी ही गिर गई.

    60 के दशक में लोहिया के संपर्क में आए
    मुलायम सिंह 60 के दशक में समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के संपर्क में आए. 1967 में वह पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. यहीं से मुलायम सिंह की पॉलिटिक्स में एंट्री हुई थी.

    अब सबसे बड़ा सियासी परिवार
    79 साल पहले आज ही के दिन साल 1939 में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में मुलायम सिंह यादव का जन्म हुआ था. उनका परिवार पहले बेशक राजनीति राजनीति से न जु़ड़ा हो. लेकिन आज उनके परिवार के कण-कण में राजनीति बसती है. देश में उनके परिवार से बड़ा राजनीतिक परिवार शायद ही हो.

    भाई, भतीजा, बेटा और बहू हर कोई ब्लॉक और पंचायत स्तर से लेकर संसद तक प्रतिनिधित्व कर रहा है. आज मुलायम जहां खड़े हैं बेशक वो पायदान राजनीति में काफी ऊंचा है लेकिन उनकी उड़ान ज़मीन से शुरू हुई थी. जो काफी विस्तारित दिखाई देती है. नज़र डालिए उनके निजी से राजनीति जीवन पर एक नज़र.

    मास्टरी से मुख्यमंत्री तक
    22 नवंबर 1939 को मुलायम सिंह एक साधारण परिवार में जन्मे. उन्होंने अपने शैक्षणिक जीवन में B.A, B.T और राजनीति शास्त्र में M.A की डिग्री हासिल की. उनकी पूरी पढ़ाई केके कॉलेज इटावा, एक.के कॉलेज शिकोहाबाद और बीआर कॉलेज आगरा यूनिवर्सिटी से पूरी हुई.

    मालती देवी से शादी के बाद साल 1973 में मुलायम सिंह के घर उनके इकलौते बेटे अखिलेश यादव ने जन्म लिया. उस समय तक वो टीचरी करते थे और अखाड़े में जाकर पहलवानी करते थे. लेकिन किस्मत उन्हें राजनीति में खींच लाई.

    साल दर साल राजनीतिक सफ़र
    1960: मुलायम सिंह राजनीति में उतरे
    1967: पहली बार विधानसभा चुनाव जीते, MLA बने
    1974: प्रतिनिहित विधायक समिति के सदस्य बने
    1975: इमरजेंसी में जेल जाने वाले विपक्षी नेताओं में शामिल
    1977: उत्तर प्रदेश में पहली बार मंत्री बने, कॉ-ऑपरेटिव और पशुपालन विभाग संभाला
    1980: उत्तर प्रदेश में लोकदल का अध्यक्ष पद संभाला
    1985-87: उत्तर प्रदेश में जनता दल का अध्यक्ष पद संभाला
    1989: पहली बार UP के मुख्यमंत्री बनकर कमान संभाली
    1992: समाजवादी पार्टी की स्थापना कर, विपक्ष के नेता बने

    दूसरी और तीसरी बार सीएम बने
    1993-95: दूसरी बार यूपी के मुख्यमंत्री पद पर काबिज़ रहे
    1996: मैनपुरी से 11वीं लोकसभा के लिए सांसद चुने गए. केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री का पद संभाला
    1998-99: 12वीं और 13वीं लोकसभा के लिए फिर सांसद चुने गए
    1999-2000: पेट्रोलियम और नेचुरल गैस कमेटी के चेयरमैन का पद संभाला
    2003-07: तीसरी बार यूपी का मुख्यमंत्री पद संभाला
    2004: चौथी बार 14वीं लोकसभा में सांसद चुनकर गए
    2007: यूपी में बसपा से करारी हार का सामना करना पड़ा
    2009: 15वीं लोकसभा के लिए पांचवीं चुने गए
    2009: स्टैंडिंग कमेटी ऑन एनर्जी के चेयरमैन बने
    2014: उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ से सांसद बने
    2014: स्टैंडिंग कमेटी ऑन लेबर के सदस्य बने
    2015: जनरल पर्पज कमेटी के सदस्य बने

    दोबारा शादी 
    90 के दशक के बाद उनकी दूसरी शादी की बात सामने आई. उनकी दूसरी पत्नी सपना गुप्ता हैं. जिससे उन्हें प्रतीक यादव के नाम से बेटा है. अब मुलायम सक्रिय राजनीति में उस तरह नहीं रह गए हैं. लेकिन अब भी किसी भी मुद्दे पर उनका बोला मायने रखता है.

    Tags: Akhilesh yadav, Mulayam Singh Yadav, Samajwadi party, UP CM

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