Birthday Sadguru : बाइक चलाने और खाना पकाने के भी शौकीन हैं सद्गुरु

Birthday Sadguru : बाइक चलाने और खाना पकाने के भी शौकीन हैं सद्गुरु
जग्गी वासुदेव यानि सदगुरु का आज जन्मदिन है

जग्गी वासुदेव यानि सदगुरु (Sadguru) का आज जन्मदिन है. आध्यात्म और योग (Yoga) के क्षेत्र में वो देश में जाना-पहचाना नाम हैं. उनकी व्यावहारिक शिक्षाएं खासकर युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. अब केरल (Kerala) में वो अपना एक बड़ा आश्रम संचालित करते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 3, 2020, 10:43 AM IST
  • Share this:
सितंबर 1957 में कर्नाटक के मैसूर में एक डॉक्टर के घर में बेटे ने जन्म लिया. आम बच्चे की तरह उसका मन खेल-खिलौनों की बजाय प्रकृति में ज्यादा लगता. वह अकसर पेड़ की ऊंची डाल पर बैठकर हवाओं का आनंद लेता. बड़ा होने पर उसके लिए कुछ दिनों तक जंगल में रहना आम था. अनायास ही गहरे ध्‍यान में चला जाता. ये बच्चा बड़ा होकर सद्गुरु के नाम से जाना गया.

सद्गुरु को जग्गी वासुदेव के नाम से भी जाना जाता है. आज यानी 03 सितंबर को उनका जन्मदिन है. वो 1957 में मैसूर में पैदा हुए थे.

11 साल की उम्र में योग का अभ्यास
सद्गुरु ने 11 साल की खेलने-कूदने वाली उम्र में योग का अभ्यास शुरू कर दिया था. तब से उनका नियमित रूप से अभ्यास करते आ रहे हैं. उनकी स्कूली शिक्षा मैसूर के Demonstration स्कूल में हुई. फिर मैसूर के विश्वविद्यालस से अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएशन किया.
बिजनेस किया और अच्छा पैसा भी कमाया


कॉलेज के दिनों में मोटर साइकिल की सवारी उन्हें पसंद थी. वे डिनर के लिए अकसर अपने दोस्तों के साथ मैसूर के पास चामुंडी हिल जाया करते. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सद्गुरु ने कई तरह के बिजनेस में भी किस्मत आज़माई, जिनमें पॉल्ट्री फार्म, ईंटे बनाने का काम शामिल था. इन कामों से उन्हें अच्छा पैसा भी मिला.

ये भी पढ़ें - वैज्ञानिकों ने पकड़ा सबसे दूर का विशाल ब्लैकहोल विलय, जानिए क्यों है ये खास

गोल्फ और क्रिकेट भी खेलते थे
सद्गुरु का मन ध्यान, योग के अलावा गोल्फ, क्रिकेट, वॉलीबॉल खेलने में भी लगता था. उन्होंने पेशे से बैंकर विजयकुमारी से 1984 में शादी की. उनकी पत्नी की मौत 1997 में हुई. 1990 में सद्गुरु पिता बने. उनके घर में बेटी ने जन्म लिया, जिसका नाम राधे रखा. बेटी की शादी कर्नाटक के शास्त्रीय गायक संदीप नारायण से हुई.

सदगुरु ने महज 11 साल की उम्र में योग का अध्यास शुरू कर दिया. तब से ये जारी है


तब आध्यात्म की पहली अनुभूति हुई
सद्गुरु लगातार सामाजिक और पर्यावरण से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेते रहे. आध्यात्मिकता में उनका ख़ूब मन लगता. इसी के प्रति योगदान के लिए वे 2017 में पद्म विभूषण से नवाज़े गए. सद्गुरु का दावा है कि उन्हें पहली दफा आध्यात्म की अनुभूति 23 सितंबर 1982 को चामुंडी हिल में एक चट्टान पर हुई. इन्होंने अपनी पहली योग कक्षा का आयोजन 1983 में मैसूर में ही किया था.

फिर स्थापित किया ईशा योग केंद्र
धीरे-धीरे उनके योगासन मशहूर हुए. उनके कार्यक्रमों में 15,000 से अधिक प्रतिभागी हुआ करते थे. योग कक्षाओं से जमा हुए पैसे को वे दान करते. 1983 में अपनी पहली योग कक्षा शुरू करने के 10 साल बाद 1993 में उन्होंने ईशा योग केंद्र स्थापित किया. ये केंद्र संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय निकायों आर्थिक और सामाजिक परिषद के साथ काम करता है.

ये भी पढ़ें - इंटरनेट पर छाई हबल टेलीस्कोप की सुपरनोवा के विस्फोट तरंगों की तस्वीर

खाना पकाना अच्छा लगता है
सद्गुरु ने साल 2006, 07, 08 और 09 में विश्व आर्थिक मंच में भाग लिया. 2000 में संयुक्त राष्ट्र मिलेनियम वर्ल्ड पीस शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया. सद्गुरु कवि और लेखक भी हैं. उन्होंने अंग्रेजी में आठ से अधिक किताबें लिखीं हैं. वे खाना पकाने के भी शौकीन हैं. साथ ही अच्छे वास्तुकार भी हैं.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज