Birthday Putin : जब पुतिन सार्वजनिक तौर पर फफक-फफक कर रोए थे

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (फाइल फोटो)

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) का आज जन्मदिन है. वो 07 अक्टूबर 1952 को पैदा हुए थे. उन्होंने मामूली और गरीब बचपन देखा. फिर केजीबी (KGB) में मामूली हैसियत वाली नौकरी में ही रहे. अब वो दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति (Powerful President) हैं

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  • Last Updated: October 7, 2020, 5:52 PM IST
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रूस के ताकतवर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का आज यानि 07 अक्टूबर को बर्थ-डे है. पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से जबसे वो सार्वजनिक जिंदगी में हैं, तब उन्हें तस्वीरों और वीडियो में भावहीन चेहरे के तौर पर देखा गया है. लेकिन एक बार ऐसा भी हुआ जबकि पुतिन शायद पहली और आखिरी बार सार्वजनिक तौर पर फफक-फफककर रोए थे. उनकी आंखें सूजी हुईं थीं. वो बार बार अपनी पूर्व पत्नी ल्यूडमिला के कंधे का सहारा ले रहे थे.

दुनिया की राजनीति में पुतिन सख्त और ताक़तवर नेता के रूप में जाने जाते हैं. उनके जीवन में एक वक्त ऐसा भी आया था जब वो सुबक-सुबक कर रोए थे. ये बात तब की है जब वो रूस के कार्यवाहक राष्ट्रपति बने थे और राष्ट्रपति बनने की दौड़ में थे.

बीबीसी ने तब इस बात पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. करीब दो साल पहले प्रकाशित इस रिपोर्ट का शीर्षक था The day Putin cried . तब उनके वरिष्ठ साथी और उन्हें राजनीति में लाने वाले एंतोली सोबचाक को दफनाया जा रहा था. ये तारीख थी 24 फरवरी, 2000. इस दिन उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी.



एंतोली सोबचाक उनलोगों में थे, जिन्होंने सोवियत संघ के खात्मे की लड़ाई लड़ी थी. वही रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी में काम करने वाले अधिकारी व्लादिमीर पुतिन को राजनीति में लेकर आए थे. हालांकि ये चर्चाएं भी खूब थीं कि सोबचाक की मौत में पुतिन का ही हाथ था.
इसी शख्स ने पुतिन को सहायक बनाया था
एंतोली सोबचेक सेंट पीटर्सबर्ग के मेयर थे. उन्होंने केजीबी से बुलाकर पुतिन को अपना सहायक बनाया हुआ था. दोनों एक दूसरे के काफी नजदीक थे. तब सोबचेक पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे. पुतिन ने उन्हें देश से भागने में मदद की. उन्होंने इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की. ये 90 के दशक की बात थी.

येल्तसिन दौर में सोवियत संघ में अराजकता का दौर था
तब रूस में बोरिस येल्तसिन राष्ट्रपति थे.वहां अराजकता का माहौल था. येल्तसिन को नशेडी कहा जाता था. वो ज्यादातर नशे में रहते थे. शायद ही कोई काम करते थे.
कहा जाता है कि सोबचाक और उनके कई असरदार साथी पुतिन से प्रभावित थे और वो उन्हें येल्तसिन के इनर सर्किल में घुसाना चाहते थे. ताकि वो उनके उत्तराधिकारी बन सकें.पुतिन के साथ काम करने वाले उनसे प्रभावित हो जाते थे. उनके अंदर काम करने की गजब की क्षमता थी और गजब के आइडियाज. साथ ही जोरदार विश्लेषण और तार्किक क्षमता.

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उनके अंदर काम करने की गजब की क्षमता थी और गजब के आइडियाज. साथ ही जोरदार विश्लेषण और तार्किक क्षमता.


वो अपने दोस्त सोबचाक की मौत पर रोए
जब येल्तसिन के बाद पुतिन राष्ट्रपति की दौड़ में पहली बार शामिल हुए, उनके दोस्त एंतोली सोबचाक की एक होटल के कमरे में मौत हो गई.एंटोली उस समय 62 साल के थे. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत की वजह कार्डियेक अरेस्ट बताया गया. हालांकि हार्ट अटैक के कोई प्रमाण नहीं मिल सके. सोबचाक की विधवा ने अपने पति की मौत को लेकर संदेह जाहिर किया था.

चर्चा थी कि उनकी मौत में पुतिन का ही हाथ 
कुछ लोगों का मानना है कि एंटोली की मौत में पुतिन का हाथ था. इसके बाद एंटोली के अंतिम संस्कार के दौरान बने वीडियो में पुतिन परेशान नजर आए. वो सुबक-सुबक कर रो रहे थे. एंटोली की पत्नी को गले से लगाकर रो रहे थे. ये शायद पहली और आखिरी बार जबकि इस तरह से पुतिन को रोते देखा गया. माना जाता है कि वो सार्वजनिक तौर पर अपनी भावनाओं का प्रदर्शन कभी नहीं करते.

हालांकि उनके रोने की कई वजहें बताते हैं. हो सकता है कि अपने विश्वस्त मार्गदर्शक के मरने से वो वो गहरे शोक में थे. या ये भी हो सकता है कि बात कुछ और हो, शायद वो अपराधबोध में हों.

गरीबी में पले बढ़े हैं पुतिन
व्लादिमीर पुतिन ग़रीबी में पले-बढ़े. वो सेंट पीटर्सबर्ग के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे. अब दुनिया की सबसे ताक़तवर हस्तियों में हैं. उनकी दोनों बेटियां अरबपति हैं. खुद पुतिन के पास अकूत संपत्ति बताई जाती है. वो 20 सालों से रूस पर राज कर रहे हैं.

ये बात सही है कि जिसने उनका विरोध किया या तो उसे जेल में पहुंचा दिया गया या वो संदिग्ध मौत का शिकार बन गया. उन्होंने रूस में एक ऐसा सिस्टम बना दिया है, जो केवल उन्हीं के लिए काम करता है. उनके राह में आने वाली सारी बाधाओं को खत्म करता चलता है. कुछ लोगों की नजरों में उन्होंने रूस में एक अन्यायपूर्ण सिस्टम बना दिया है.

व्लादिमीर पुतिन ग़रीबी में पले-बढ़े. वो सेंट पीटर्सबर्ग के एक छोटे से अपार्टमेंट में रहते थे. अब दुनिया की सबसे ताक़तवर हस्तियों में हैं.


एक मामूली कर्नल से सत्ता के शिखर तक
सुरक्षा सेवा 'केजीबी' से जुड़ा एक मामूली सा कर्नल आख़िर कैसे सत्ता के शिखर तक पहुंच गया? पुतिन का जन्म एक बेहद ग़रीब परिवार में हुआ. वो सेंट पीटर्सबर्ग के पड़ोसी इलाक़े में बहुत ही मुश्किलों भरे हालात में पले-बढ़े.उन्होंने संघर्ष से विश्विद्यालय में पढ़ाई पूरी की. फिर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कमेटी, केजीबी में एक मामूली सा ओहदा हासिल किया.

उनकी ये नौकरी सोवियत संघ के बिखरने तक ही जारी रही. केजीबी में पुतिन बहुत ही साधारण से पद पर तैनात थे. वहां उनके जैसे हज़ारों थे. वो इसके बाद कुछ ऐसे लोगों की नजर में आ गए, जो उन दिनों रूस की सत्ता पर काबिज होने के लिए छल कर रहे थे. तभी वो मेयर बने.

एक कठपुतली राष्ट्रपति तलाशा जा रहा था
1990 के अंत में सोवियत रूस टूटने की कगार पर था. देश एक शराबी राष्ट्रपति येल्तसिन के हाथों में था. माफियाओं की लड़ाई से जूझ रहा था. कई भ्रष्ट पूंजीपति ऐसे थे जो खुलेआम क़ानून और व्यव से खिलवाड़ कर रहे थे.
उन दिनों एक ऐसे शख्स को तलाशा जा रहा था जो एक गुट के इशारों पर राष्ट्रपति बनकर नाच सके. इसी गुट ने पुतिन को पहले येल्तसिन के इनर सर्किल में शामिल किया. इसके बाद वो सबको प्रभावित करने लगे. बूढ़े और बीमार पूर्व राष्ट्रपति येल्तसिन के उत्तराधिकारी के तौर पर लिखी गई स्क्रिप्ट पर पूरी तरह खरे उतरने लगे.

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ढ़े और बीमार पूर्व राष्ट्रपति येल्तसिन के उत्तराधिकारी के तौर पर लिखी गई स्क्रिप्ट पर पूरी तरह खरे उतरने लगे.


चुनाव से पहले वो अनजाना चेहरा थे
चुनाव केवल छह महीने दूर थे. रूस के मतदाताओं के लिए पुतिन अनजाना चेहरा थे. पुतिन ने उम्मीदवारी के लिए हां करने से इनकार कर दिया. पुतिन का कोई बैकग्राउंड और राजनीतिक अनुभव नहीं है, उन्होंने बहुत कम मौक़े पर भाषण दिए होंगे. जो लोग उन्हें उस वक़्त जानते थे वो बताते हैं कि राष्ट्रपति की गद्दी पर पहुंचने से वो बहुत ही घबराए हुए और हैरान थे.

चतुर इंसान भी
वो एक बहुत ही चतुर इंसान भी थे. अपने कार्यकाल के पहले साल में उन्होंने दुनिया के बाक़ी हिस्सों के साथ रूस के रिश्तों को फिर से बेहतर करने की कोशिशें की. उन्होंने पश्चिम के शीर्ष नेताओं में जगह बनाने की भी पूरी कोशिश की.देश की सुस्त चल रही अर्थव्यवस्था को जिस तरह पुतिन ने संभाला. उससे उनकी लोकप्रियता बढ़ने लगी.

फिर वो चतुर होने लगे. राजनीति समझने लगे. खुद को ताकतवर बनाने में लग गए. इसी कड़ी में उन्होंने पुतिन ने रूस की बड़ी कंपनियों के लिए नियमों में कई बदलाव किए. उन्होंने अपना ध्यान अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण करने वाली उन आठ कंपनियों पर केंद्रित किया.

जो साथ नहीं मिला वो तबाह हो गया

तब उन्होंने कई शीर्ष उद्योगपतियों को कदमों में लाने की कोशिश की, ताकि वो उनके साथ मिलकर चलें लेकिन जिन्होंने ऐसा नहीं किया, वो भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे. गिरफ्तार हुए और उनकी सारी संपत्ति जब्त कर ली गई. रूस के लोगों को लगा कि उनका राष्ट्रपति कुलिन वर्ग से लड़ रहा है. आग की कहानी ये है कि अब पुतिन के दमदार विरोध रूस में शायद ही कोई हों. वो सबको निपटा चुके हैं. नियमों में बदलाव करके लंबे समय तक गद्दी पर बने रहने का इंतजाम भी कर चुके हैं.
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