Birthday VP Menon : जिनके बगैर पटेल के लिए आसान नहीं था रियासतों का विलय, कभी थे खनिक भी

पटेल के साथ देश का एकीकरण कराने वाले वीपी मेनन (दाएं)
पटेल के साथ देश का एकीकरण कराने वाले वीपी मेनन (दाएं)

Birthday VP Menon: 30 सितंबर को उस शख्स का जन्मदिन होता है, जिसे देश भूल चुका है लेकिन असल ये देश जिस तरह से एक नजर आता है उसमें सरदार वल्लभभाई पटेल (Sardar Vallabh Bhai Patel) के साथ उसकी भूमिका भी उतनी ही खास थी. वो वीपी मेनन. बगैर उनके यकीनन ये देश ऐसा नहीं होता.

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  • Last Updated: September 30, 2020, 4:46 PM IST
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हम सभी भारत-पाकिस्तान बंटवारे (Partition of India-Pakistan) के बाद 550 से अधिक रियासतों के विलय के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) को श्रेय देते हैं. यकीनन ये काम पटेल ही कर सकते थे लेकिन इस काम के लिए उन्हें ऐसे शख्स की सेवाएं मिली थीं, जिसने उनके काम को काफी आसान किया. वो वीपी मेनन (VP Menon) थे. उन्होंने जहां जैसी जरूरत पड़ी, वैसा रुख अपनाया. इस काम में सबसे ज्यादा भागदौड़ भी उन्हीं के हिस्से में आई. कुछ मामलों में तो उन्होंने उन राजाओं की जासूसी भी कराई, जिनके कार्यकलाप संदिग्ध लग रहे थे.

इसे लेकर बहुत से किस्से तमाम लेखकों ने लिखे हैं. खासकर डोमिनिक लेपियर ने तो इसे रोचक अंदाज में "फ्रीडम एट मिडनाइट" (Freedom of Midnight) में पेश किया है. तब बहुत से राजा या तो स्वतंत्र रहना चाहते थे या फिर कुछ जिन्ना (Jinnah) के फुसलावे पर पाकिस्तान में विलय की योजना भी बना रहे थे. इस सभी मामलों से निपटने में वीपी मेनन ने पटेल का भरपूर साथ दिया. उन्हें हर जानकारी से वाकिफ कराया और फिर खुद आपरेशन में भी जुटे.

वीपी मेनन अंग्रेजी राज के अफसर थे. तरक्की करते करते क्लर्क से वायसराय के सलाहकार के पद तक पहुंचे थे. उनका पूरा नाम राय बहादुर वाप्पला पंगुन्नि मेनन था. केरल में 30 सितंबर 1893 में उनका जन्म हुआ और 31 दिसंबर 1965 में बेंगलुरु में निधन. आजादी के बाद वो भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रतिष्ठित और असरदार अधिकारी बने.



तब मेनन का नाम जरूर आता है
जब भी देश में विलय के दौरान फंसे हुए पेंच या रियासतों की तिकड़मों की बातें सामने आती हैं तब वी. पी. मेनन का नाम और उनकी भूमिका जरूर याद की जाती है. चाहे उसमें मालाबार रहा हो या फिर जोधपुर, बीकानेर जैसी रियासतें या हैदराबाद, जूनागढ़ या फिर कश्मीर के मामले. सबकी कहानी में मेनन का नाम जरूर आता है.

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घर से भाग गए और फिर खनिक से लेकर मुंशी तक का काम किया
मेनन के पिता मालाबार क्षेत्र में एक स्कूल में प्रिंसिपल थे. बचपन में अपनी पढ़ाई का बोझ घरवालों के ऊपर से उठाने के लिए मेनन घर से भाग गए.पहले रेलवे में कोयला झोंका, फिर खनिक बने और इसके बाद बेंगलोर तंबाकू कंपनी में मुंशी का काम किया. फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में सबसे निचले स्तर यानि क्लर्क के रूप में ब्रिटिश राज में कामकाज शुरू किया.

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वीपी मेनन कम उम्र में घर से भाग गए थे. उसके बाद उन्होंने रेलवे में कोयला झोंकने वाले से लेकर खनिज और मुंशी जैसा काम भी किया


फिर सबसे बड़े पद तक पहुंचे
अपनी मेहनत, बुद्धिमत्ता और कार्यकुशलता के बल पर वीपी मेनन ने अंग्रेज सरकार में सबसे उच्च प्रशासनिक सेवक का पद हासिल किया. भारत के संविधान के मामले में वीपी. मेनन पंडित थे. वो आख़िरी तीन वायसरायों - लिनलिथगो, वावेल और माउंटबेटन के संवैधानिक सलाहकार थे.

पटेल के कहने पर किताबें लिखीं
सरदार पटेल के कहने पर ही वीपी. मेनन ने भारत विभाजन, राज्यों के एकीकरण ( The Story of the Integration of the Indian States) और सत्ता हस्तांतरण (The Transfer of Power in India) पर पुस्तकें लिखीं. मेनन ने सरदार पटेल की मृत्यु के बाद अवकाश ले लिया था.

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रियासतों के एकीकरण में योगदान
जब भारत आजाद होने वाला था जब भारत में अलग-अलग 565 छोटे-बड़े रजवाड़े और रियासतों थीं. इनके विलय के बिना आज़ाद देश की कल्पना बेमानी थी. इतिहास में इस काम के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल को याद किया जाता रहा है. हकीक़त तो ये है कि अगर भारत के तत्कालीन सलाहकार वी. पी. मेनन नहीं होते, तो शायद अकेले पटेल भी ये काम नहीं कर पाते.

sardar patel and vp menon
अगर वीपी मेनन नहीं होते तो शायद सरदार पटेल देश का एकीकरण इस तरह कर भी नहीं पाते. मेनन ने रियासतों और स्वतंत्र राज्यों को भारत में मिलाने के लिए जबरदस्त काम किया.


मुश्किल काम था रियासतों को साथ लाना
भारत की संवैधानिक आज़ादी के लिए जो आधारभूत फार्मूला इस्तेमाल किया गया, वह मेनन ने ही बनाया था. इसके बाद रियासतों को साथ ले आना बहुत टेढ़ा काम था. कोई भी राजा इसे मानने को तैयार नहीं था. वो चाहते थे कि वो अपनी रियासत और राज्यों के साथ स्वतंत्र रहे. उनकी ताकत, वैभव और आजादी में कोई रोक-टोक नहीं पड़े. ये बहुत मुश्किल समय था. ऐसे में कोई सबसे ज्यादा काम आया तो वो थे वीपी मेनन.

जोधपुर के राजा ने तो उन पर पिस्तौल तान दी थी
विलय के चलते ही मेनन को उसके सूत्रों ने बताया कि जोधपुर के युवा महाराजा हनवंत सिंह दिल्ली में गुपचुप जिन्ना से मिलने आए हैं ताकि वो अपनी रियासत का विलय पाकिस्तान में करा सकें. मेनन आनन-फानन में उनके होटल पहुंच गए. उन्हें वायसराय हाउस लेकर आए. वहां विलय के मामले पर नाराज महाराजा ने जेब ने पेन निकाली. इसमें पिस्तौल थी, जो मेनन पर तान दी. एक बार जान से मारने की धमकी भी मिली.

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जिन्ना की साजिश को नाकाम किया
उस समय मुस्लिम लीग और जिन्ना की रणनीति ये थी कि अधिक से अधिक रजवाड़े भारत में मिलने से मना कर दें. तब सरदार पटेल और वीपी मेनन ने पाकिस्तान की सभी साजिशों को नाकाम कर दिया. ये बात सही है कि अगर मेनन का साथ सरदार पटेल को नहीं मिलता, तो शायद वो देश को एक नहीं कर पाते.

vp menon
पटेल के निधन के बाद उन्होंने भारतीय प्रशासन सेवा से इस्तीफा दे दिया. हालांकि उसके बाद उन्हें ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया.


बाद में राज्यपाल भी बने
पटेल की मृत्यु के बाद मेनन ने भारतीय प्रशासन सेवा से इस्तीफा दे दिया लेकिन इसके बाद उन्हें 1951 ओड़िशा का राज्यपाल बनाया गया. वो वित्त आयोग के भी सदस्य रहे. रिटायर होने के बाद वो बेंगलुरु में रहने लगे थे, वहीं उनका निधन हुआ.
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