BJP Foundation Day 2021 : वो दो सीटें, जो बीजेपी ने पहली बार लोकसभा के लिए जीतीं थीं

बीजेपी ने पहली बार 1984 में लोकसभा चुनाव लड़ा. तब उसने केवल दो सीटें जीतीं थीं.

बीजेपी ने पहली बार 1984 में लोकसभा चुनाव लड़ा. तब उसने केवल दो सीटें जीतीं थीं.

BJP Foundation Day 2021 : बीजेपी का गठन 06 अप्रैल 1980 में हुआ. पार्टी ने 1984 में पहली बार लोकसभा के लिए चुनाव लड़ा तो उसे केवल 02 सीटों पर जीत हासिल हुई. कौन सी थीं ये दो सीटें और इस पर जीत हासिल करने वाली बीजेपी के नेता आज क्या कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 6, 2021, 10:37 AM IST
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देश की सबसे बड़ी और सबसे मजबूत पार्टी बीजेपी यानि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के 41 साल पूरे हो गए. इतने सालों में इस पार्टी ने एक से बढ़कर एक मुकाम हासिल किए हैं. 06 अप्रैल 1980 में पार्टी की स्थापना दिल्ली में हुई. हालांकि गठन के बाद पार्टी जब पहली बार 1984 में आम चुनावों में कूदी तो उसे केवल 02 सीटों पर जीत मिली. उसके सभी दिग्गज नेता उन चुनावों में धराशाई रहे. उसकी बड़ी वजह इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में बही सहानुभूति लहर भी थी.

ये जानना दिलचस्प है कि 1984 में भारतीय जनता पार्टी ने जो 02 सीटें जीतीं, वो कौन सी थीं. उस पर कौन से नेता विजयी हुए और उन्होंने तब लोकसभा में पहली बार बीजेपी की मौजूदगी दर्ज कराई. अब ये नेता क्या कर रहे हैं.

वैसे इनमें से एक सीट ऐसी है, जहां हमेशा कांग्रेस का बोलबाला रहा, वहां 1984 में बीजेपी पहली और आखिरी बार जीती. दूसरी सीट गुजरात की ऐसी सीट रही, जो किसी की स्थायी सीट नहीं थी लेकिन अब बीजेपी का गढ़ है.

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पहली सीट जहां बीजेपी जीती

पहली सीट है हनामकोंडा, जो अब तेलंगाना में है लेकिन एक जमाने में अविभाजित आंध्र प्रदेश में थी. इसे कांग्रेस का मजबूत दुर्ग माना जाता था. ये वही सीट है, जिसने दो बार 1977 और 1980 के चुनावों में पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहराव को जिताया था. लेकिन 1984 में जब पूरे देश में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के पक्ष में लहर बह रही थी, तब नरसिंहराव यहां से हार गए. उन्हें हराने वाले शख्स अब भी जिंदा हैं लेकिन पार्टी में बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं हैं.

1984 में हनामकोंडा से बीजेपी को जीत दिलाने वाले जंगा रेड्डी वर्ष 2020 में राष्ट्रपति कोविंद से मुलाकात करते हुए.



जंगा रेड्डी आरएसएस के समर्पित कार्यकर्ता रहे

उनका नाम चेंदुपटला जंगा रेड्डी है. रेड्डी अब 86 साल के हैं. वारंगल में रहते हैं. वो शुरू से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता थे. 1967 में वो पहली बार जनसंघ के टिकट पर विधायक बने. इसके बाद 1978 में फिर जनता पार्टी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीता. 1983 में बीजेपी के गठन के बाद वो बीजेपी से राज्य के चुनावों में उतरे और फिर जीते. एक साल बाद ही बीजेपी ने उन्हें लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा.

84 के चुनावों में नरसिंहराव को हराया था

1984 में हनामगोंडा से चुनाव लड़ना चेंदुपटला जंगा रेड्डी के लिए आसान नहीं था. फिर सामने पीवी नरसिंहराव जैसा दिग्गज सामने था. हर कोई मानकर चल रहा था कि कांग्रेस इस सीट को जीत लेगी लेकिन इलाके में रेड्डी भी लंबे समय से विधायक होने के नाते खासे लोकप्रिय थे. रेड्डी ने नरसिंहराव को 50,000 से कहीं ज्यादा वोटों से हराया.

वर्ष 1984 में बीजेपी को लोकसभा चुनाव में दो ही सीटें मिलीं. तब जंगारेड्डी के साथ जिस दूसरे सांसद ने लोक सभा में पहली बार बीजेपी की मौजूदगी दर्ज कराई वो गुजरात के एके पटेल थे. जो जंगारेड्डी के साथ हैं.

फिर बीजेपी यहां से कभी नहीं जीती

ये पहला और आखिरी मौका था जबकि बीजेपी यहां से चुनाव जीती. इसके बाद फिर कांग्रेस यहां से दो बार विजयी रही लेकिन पिछले तीन लोकसभा चुनावों में तेलुगूदेशम और तेलंगाना राष्ट्र समिति के उम्मीदवारों का परचम यहां फहरा.

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बांग्लादेश की मांग को लेकर सत्याग्रह किया था

पहली बार बीजेपी को 1984 में सीट जिताने वाले जंगा रेड्डी लंबे समय तक राज्य की बीजेपी सियासत में जरूर सक्रिय रहे लेकिन अब वो करीब किनारे हैं. इनके बारे में ये भी जानना जरूरी है कि 1970 में बांग्लादेश की मांग को लेकर दिल्ली में जनसंघ ने जो सत्याग्रह आंदोलन किया था, उसकी अगुवाई रेड्डी ही कर रहे थे. बाद में वो करीब 11 महीने तक जेल में भी रहे. इसके बाद 1984 में भी उन्होंने स्वर्णमंदिर में सेना तैनाती के विरोध में भी सत्याग्रह किया था.

दूसरी सीट गुजरात में थी जो तब बीजेपी ने जीती

दूसरी सीट जो बीजेपी ने उस चुनाव में जीती थी, वो गुजरात की मेहसांणा सीट थी. जिसे परंपरागत तौर पर कांग्रेस विरोधी सीट माना जाता रहा था, क्योंकि यहां 1984 के चुनावों से पहले दो बार अगर कांग्रेस जीती थी तो दो बार निर्दलीय प्रत्याशी और एक-एक बार स्वतंत्र पार्टी, जनता पार्टी और लोकदल का प्रत्याशी.

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पटेल फिर वाजपेयी सरकार में मंत्री भी बने

1984 में बीजेपी ने एके पटेल को यहां से लोकसभा का टिकट दिया. वो ना केवल तब जीते बल्कि इसके बाद लगातार 05 बार लोकसभा का चुनाव यहां से जीतते रहे. एके पटेल बाद में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे. गुजरात की राजनीति में उन्हें केशुभाई पटेल का करीबी माना जाता था.

अब बीजेपी में नहीं हैं

कुछ साल पहले मतभेदों के चलते उन्हें पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद बीजेपी से इस्तीफा दे दिया. अब वो पार्टी से किनारे हैं.

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