जानलेवा ब्लैक फंगस के पीछे क्या है कोरोना में स्टेरॉयड लेने का रोल

ब्लैक फंगस (Black Fungus Infection) का संक्रमण  पहले भी देखा जा चुका है.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्लैक फंगस (Black Fungus Infection) का संक्रमण पहले भी देखा जा चुका है.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्लैक फंगस (Black Fungus) या म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) का संक्रमण तेजी से फैलने के पीछे स्टेरॉयड्स (Steroids) का गलत या अधिक लेवल पाया गया है.

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कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप के बीच भारत में एक नई बीमारी पैर पसार रही है. ब्लैक फंगस (Black Fungus) या म्यूकोरमाइकोसिस (Mucormycosis) का संक्रमण आंखों पर हमला करता है और इतना खतरनाक है कि मरीज को जिंदा रखने के लिए कई बार उसकी आंखें ही निकालनी पड़ रही हैं. ब्लैक फंगस एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन इसके पीछे की वजह स्टेरॉयड (Steroids) भी बताए जा रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है इसकी भूमिका.

क्या है ये ब्लैक फंगस

ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस एक फफूंद म्यूकोर से फैलती है जो गीली सतहों पर पाया जाता है. यह सबसे ज्यादा आंख को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है, लेकिन इसके साथ ही वह नाक और दिमाग को प्रभावित करता है दिमाग के प्रभावित होने पर इसका इलाज बहुत मुश्किल हो जाता है. यह बहुत कम होने वाला संक्रमण है, लेकिन यह एक जानलेवा संक्रमण है.

किन्हें संक्रमण होने की आशंका ज्यादा
ब्लैक फंगस आमतौर डायबिटीज के मरीजों को ज्यादा होती है. वहीं जो डायबिटीज से पीड़ित नहीं हैं उनमें यह संक्रमण बहुत ही कम पाया जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक फंगस उन लोगों को संक्रमित कर रहा है जो पहले से दवाइयां ले रहे हैं और हवा में मौजूद रोगाणुओं से लड़ने में कम सक्षम हैं. सांस लेने पर फफूंद फेफड़ों को संक्रमित कर देता है. यह कोविड-19 मरीज, डायबिटीज और कम प्रतिरोध क्षमता वाले लोगों को सबसे पहले और सबसे ज्यादा संक्रमित कर रहा है.

तो फिर स्टेरॉयडस की क्या है भूमिका

दरअसल कई चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें ब्लैक फंगस के जितने मरीज मिले हैं उनमें ज्यादातर वे मरीज थे जिन्होंने कोविड-19 बीमारी के दौरान स्टेरॉयड्स लिए थे. कई  चिकित्सकों का मानना है कि ब्लैक फंगस के ज्यादा फैलने की वजह स्टेरॉयड्स को सही तरीके से उपयोग में ना लाना है. इसके हर तरह के मरीज को लेने दिया गया जो सही नहीं था. स्टेरॉयड्स कोलंबे समय तक या ज्यादा डोज लेने से म्यूकोरमाइकोसिस हो सकता है.



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ब्लैक फंगस (Black Fungus Infection) की बीमारी वैसे तो बहुत कम होती है, लेकिन यह बहुत ही घातक और जानलेवा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

स्टेरॉड्स यूं करते हैं नुकसान

स्टेरॉयड्स की इसमें एक अलग भूमिका होती है. स्टेरॉयड्स इंसान की प्रतिरोध क्षमता को भी कम कर सकते हैं और उनमें खून शुगर लेवल बढ़ाने की क्षमता भी होती है. यहां तक कि वे जिन्हें डायबिटीज नहीं है उनका शुगर लेवल भी बढ़ा सकती है. इसके अलावा वे संक्रमण को फैलाने का आदर्श वातारवण भी बना देते हैं. इतना ही नहीं वे कोविड-19 बीमारी कि स्थिति भी और ज्यादा खराब कर सकते हैं.

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तो क्या नुकसानदायक ही है स्टेरॉयड्स

ऐसा नहीं है कि सभी स्टेरॉयड्स एक सा ही असर करते हैं. ब्लैक फंगस को लेकर जो जोखिम है वह मुख्यतः सिस्टमेटिक स्टेरॉयड्स की वजह से है. द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक ये स्टेरॉयड्स फिलहाल कोविड-19 के उपचार के लिए उपयोग में लाए जा रहे हैं जो गलत उपयोग होने के कारण ब्लैक फंगस की बीमारी ला रहे हैं. इन स्टेरॉयड्स में डेक्सामीथासोन और मिथाइलप्रिनिसोलोन शामिल हैं.

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डाक्टरों का कहना है कि स्टेरॉयड्स (Steroids) का गलत सेवन ही ज्यादातर ब्लैक फंगस का कारण बना है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

उपयोगी भी साबित हुए हैं स्टेरॉयड्स

बात यह है कि ये स्टेरॉयड्स सरकर के कोविड उपचार की गाइडलाइन में सुझाई गई हैं और ये उपयोगी साबित भी हुई हैं. विशेषकर अस्पताल में जिन मरीजों का श्वसन तंत्र नाकाम होता है उनके लिए ये स्टेरॉयड्स उपयोगी साबित हुए हैं. लेकिन गलत तरह से गलत मरीज पर इनका उपयोग घातक साबित हुआ है. वहीं सांस लेकर उपयोग में लाने वाले, इनहेलर के तौर पर उपयोग में लाए जाने वाले स्टेरॉयड्स भी ब्लैक फंगस का कारण नहीं बनते दिखे हैं.

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ये सच है कि भारत के बहुत से अस्पतालों में आए मामलों में कई मामले स्टेरॉयड्स के ‘अनुचित’ सेवन के थे. लेकिन ऐसा निश्चित तौर पर हो, यानि स्टेरॉयड्स के सेवन से ही हो, ऐसा भी नहीं है. बेशक स्टेरॉयड्स के सेवन में अब ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. इससे संबंधित शोध हमें और जानकारी दे सकेंगे.

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