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विशेष हाल में नई तकनीक से मिलेगी ब्लैक होल के अंदर की जानकारी

ब्लैक होल (Black Hole) की अधिक जानकारी ग्रैविटेशनल लेंसिग से हासिल की जा सकती है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

ब्लैक होल (Black Hole) की अधिक जानकारी ग्रैविटेशनल लेंसिग से हासिल की जा सकती है. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

ब्लैकहोल (Black Hole) के अंदर के हिस्से जिसे उसकी परछाई या खाली छेद भी कहा जाता है, के बारे में जानाकारी हासिल करने का नया तरीका खोजा गया है. नए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि विलय (Merging Black Hole) हो रहे और बहुत पास आ चुके द्विज ब्लैक को एक खास बिंदु से देखते हुए ग्रैविटेशनल लेंसिंग (Gravitational Lensing) तकनीक से ब्लैक होल की परछाई के बारे में पता लगाया जा सकता है.

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    ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में पहले कोई यकीन नहीं करता था कि उसके बारे में बहुत सारी जानकारी भी जुटाई जा सकती है. एक पिंड जो अपने अंदर प्रकाश तक को खींचने की क्षमता रखता हो, उसे देखने या उसके बारे में पता करने के बारे में सोचना भी एक मजाक लगता था. लेकिन धीरे धीरे वैज्ञानिकों ने इन धारणाओं को खारिज किया और ब्लैक होल के पास की घटनाओं से उसके बारे में बहुत सी जानकारी जमा कर ली.  अब एक नई तकनीक सामने आई है. इस तकनीक से शोधकर्ता ग्रैविटेशनल लेंसिंग (Gravitational Lensing) के जरिए ब्लैक होल के आकार (Size of Black Hole) का पता लगा सकते हैं.

    विलय की प्रक्रिया में ही उपयोगी
    ग्रैविटेशनल लेंसिंग तकनीक ब्लैक होल तक के लिए नई नहीं है, लेकिन अभी तक विशुद्ध रूस से ब्लैक होल पर इसका उपयोग नहीं किया गया था.  शोधकर्ताओं की यह तकनीक विलय की प्रक्रिया के दौरान ही उपयोग में लाई जा सकती है जिससे सुपरमासिव ब्लैक होल के आकार का पता लगाया जा सकता हैइसके साथ ही इसे गुरुत्व के वैकल्पिक सिद्धातों की पड़ताल में भी उपयोग किया जा सकता है.

    ‘खाली छेद’ को देखने के नया तरीका
    तीन साल पहले खगोलविदों ने ईवेंट होराइजन टेलीस्कोप की मदद से ब्लैक होल की परछाई की पहली तस्वीर निर्मित की थी जिसमें एक ‘खाली छेद’ के आसपास ऊर्जावान कणों का एक छल्ला दिखाई दे रहा था. इसके बाद इस तस्वीर को कई बार अपडेट किया गया है. अब खगोलविदों ने ब्लैक होल के इस ‘खाली छेद’ को देखने के नया और आसान तरीका निकाला है.

    कितने बड़े ब्लैक होल का आकार
    प्रस्तावित इमेजिंग तकनीक शोधकर्ताओं को एम87 से भी छोटे ब्लैक होल की पड़ताल करने में मदद कर सकेगी जिसका भार सूर्य से 6.5 अरब गुना ज्यादा भारी है. इस तकनीक से सुदूर गैलेक्सी के ब्लैक होल का भी अध्ययन किया जा सकता है. खुद एम87 ब्लैक होल 5.5 करोड़ प्रकाशवर्ष की दूरी पर है और तुलनात्मक तौर पर मिल्की वे के पास है.

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    पहली बार ग्रैविटेशनल लेंसिग (Gravitational Lensing) तकनीक को केवल ब्लैक होल के लिए उपयोग किया गया. (तस्वीर: NASA Via Wikimedia Commons)

    दो प्रमुख शर्तें
    इस नई तकनीक के लिए दो शर्तें हैं. इसके लिए जरूरी है कि ब्लैक होल जोड़े से हो जिनकी कक्षाएं आसपास हों और विलय की प्रक्रिया से गुजर रहे हों. इसके अलावा हमारे पास एक ब्लैक होल के द्विज युग्म के बगल से देखा जाने वाला बिंदु होना चाहिए. ऐसे में दूर वाले ब्लैक होल की चमकती रिंग पास वाले ब्लैक होल की ग्रैविटेशनल लैंसिंग के कारण चमकीली फ्लैश लाइट की तरह दिखाई देती है.

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    चमक में गिरावट से आंकलन
    इस चमकीले फ्लैश प्रकाश में छिपे हुए संकेत भी होता है. यह संकेत चमक में गिरावट होता है जि दूर के ब्लैक की परछाई के आकार के अनुसार होता है. चमक में गिरावट कुछ घंटों से कुछ दिनों तक चल सकती है. यह दोनों ब्लैक होल के भार और उनकी कक्षाओं की निकटता पर निर्भर करता है. इस परछाई की आकृति और आकार, जो ब्लैक होल के घटना क्षितिज से बनती है, का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि यह गिरावट कम खत्म होती है.

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    यह तकनकी विलय होते ब्लैक होल (Black Hole) युग्म पर ही लागू हो सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    पुरानी तकनीक
    जैसे ही पदार्थ ब्लैक होल के अंदर गिरता है. बहुत तेजी से घूमने उसके पास का पदार्थ चमकने लगता है और उच्च ऊर्जा के कणों को छोड़ने लगता है और ब्लैक होल के खाली छेद के पास से तो चमकीले पदार्थ की रिंग बन जाती है और छेद से प्रकाश तक नहीं निकल पाता है. जहां वैज्ञानकों को एम87 ब्लैक होल की तस्वीर बनाने में सालों का समय लग गया. वह तकनीक मिल्की वे ब्लैक हो या एम87 के जोड़े जैसे विशालकाय और बहुत नजदीक ब्लैक होल पर काम कर पाती थी.

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    लेकिन नई तकनीक में दोनों ब्लैक होल को देखने के जरूरी नहीं है. बल्कि इस तरह के संकेत कई गैलेक्सी में देखे जा सकते हैं. ब्लैक होल की परछाई एक साथ कई जानकारी देने के साथ रहस्यमयी बातों की भी जानकारी दे सकती है. इस पद्धति से ब्लैक होल के आकार के अलावा स्पेस टाइम की आकृति और क्षितिज के पास ब्लैक होल में पदार्थ कैसे गिरता है यह भी बताया जा सकता है.

    Tags: Black hole, Research, Science

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