खोजा गया पृथ्वी के पास और अब तक सबसे छोटा ब्लैक होल, नाम है द यूनिकॉर्न

यह ब्लैक होल (Black Hole) हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के अंदर ही मौजूद है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

यह ब्लैक होल (Black Hole) हमारी मिल्की वे गैलेक्सी के अंदर ही मौजूद है.(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

मिल्की वे (Milky Way) गैलेक्सी में हमारी पृथ्वी (Earth) के सबसे पास का एक ब्लैक होल (Black Hole) खोजा गया है जो अब तक का देखा गया सबसे छोटा ब्लैक होल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2021, 12:49 PM IST
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ब्लैकहोल (Black Hole) ब्रह्माण्ड का ऐसा पिंड है जिसके बारे में हमारे वैज्ञानिक विस्तार से जानना चाहते हैं. इसके बारे में जानकारी बहुत ही मुश्किल से मिलती है. यहां तक कि इसे खोजना भी आसान काम नहीं है. हाल ही में खगलोविदों एक ऐसा ब्लैकहोल खोजा है जो ना केवल रिकॉर्ड हुए ब्लैकहोल में से सबसे छोटा है, बल्कि पृथ्वी (Earth) के सबसे पास  भी है. खगोलविदों ने इसे द यूनिकॉर्न (The Unicorn) नाम भी दिया है.

क्यों दिया गया इसे यूनिकॉर्न का नाम

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह ब्लैकहोल बहुत ही खास है और उन्होंने इसे द यूनिकॉर्न नाम इसलिए दिया कि एक तो यह अपनी तरह का अनोखा ब्लैकहोल और दूसर यह मोनोसेरोस- द यूनिकॉर्न तारामंडल में पाया गया है. इस अध्ययन के नतीजे हाल ही में मंथली नोटिसेस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित किए गए हैं.

बहुत कम भार है इसका
इस अध्ययन के प्रमुख लेखक और ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में एस्ट्रोनॉमी के पीएचडी छात्र थारिंडु जयसिंघे ने बताया, “जब हमने आंकड़ों को देखा तो एकदम से ब्लैकहोल निकलकर सामने आया. यूनिकॉर्न हमारे सूर्य के भार से केवल तीन गुना ही ज्यादा है जो एक  ब्लैकहोल के लिए बहुत हो छोटा भार है.  ब्रह्माण्ड में इस तरह के बहुत ही कम ब्लैकहोल देखे गए हैं.

हमारी मिल्कीवे के अंदर ही

यह ब्लैकहोल पृथ्वी से 1500 प्रकाशव वर्ष दूर स्थित है और अभी हमारी गैलेक्सी मिल्कीवे के अंदर ही मौजूद है. जयसिंघे के विश्लेषण करने से पहले यह सामान्य नजर से ओझल था. यह ब्लैकहोल एक लाल विशाल तारे का साथी है. इससे पता चलता है कि दोनों गुरुत्व से आपस में जुड़े हुए हैं.



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पहली बार इतने छोटे ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में पता चला है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


तारे के बारे में पहले से थे आंकड़े

वैज्ञानिक ब्लैकहोल के बारे में सारी जानकारी उसके आसपास से एकत्र करते हैं. ब्लैकहोल से ना केवल देखने वाला प्रकाश बाहर नहीं आ पाता बल्कि दूसरी वेवलेंथ की तरंगें भी नहीं निकल पाती हैं. लेकिन इस मामले में शोधकर्ता ब्लैकहोल के साथी तारे को देख सके. इस तारे के बारे में पहले केल्ट, टेस्स और अन्य टेलीस्कोप सिस्टम की मदद से जानकारी जुटाई जा चुकी है. इस तारे के बारे में आंकड़े तो बहुत थे लेकिन उनका इस तरह आंकलन नहीं हुआ था.

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कैसे मिले ब्लैकहोल के संकेत

जब जयसिंघे और उनक टीम ने आकंड़ों का विश्लेषण शुरु किया, उन्होंने पाया कि वे विशाल लाल तारे का चक्कर लगा रही वस्तु को देख नहीं पा रहे हैं जो तारे के प्रकाश की तीव्रता को बदल रही है. उन्होंने यह भी पाया कि कुछ इस लाल तारे को धकेल रहा है और साथ ही उसका आकार भी प्रभावित कर रहा है.

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ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में उसके आसापास की घटनाओं से पता चलता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


ब्लैकहोल ही क्यों

शोधकर्ताओं को इस वस्तु के बारे में एक विकल्प यह लगा कि यह एक ब्लैकहोल हो सकता है, लकिन यह ब्लैकहोल बहुत ही छोटा होगा, सूर्य के भारसे पांच गुना से कम जिसे खगोलविद “मास गैप“ कहते हैं. लेकिन हाल ही में खगोलविदों ने यह संभावना स्वीकार की है बहुत ही कम भार वाले ब्लैकहोल का अस्तित्व हो सकता है.

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भार का अनुमान

शोधकर्ताओं ने अब तक इस लाल विशाल तारे को लेकर किए गए अध्ययनों से अलग नजरिया अपनाया और सोचा कि क्या हो अगर यह ब्लैकहोल ही हो. लाल तारे का वेग, कक्षा का समय और गुरुत्वाकर्षण से आई विकृति से शोधकर्ताओं को पता चला कि इस ब्लैकहोल का भार हमारे सूर्य से तीन गुना ज्यादा है.
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