जानिए कैसे आसपास के पदार्थ को अलग-अलग तरीकों से चट कर जाता है ब्लैक होल

ब्लैक होल (Black Hole) का पदार्थ का निगलना हमेशा एक ही जैसा नहीं होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्लैक होल (Black Hole) का पदार्थ का निगलना हमेशा एक ही जैसा नहीं होता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्लैकहोल (Black Hole) अपने पास का पदार्थ (Matter) अलग अलग तरीकों से निगलते (Eating pattern) हैं. कुछ को वे बहुत ज्यादा मात्रा में, तो कुछ बहुत कम मात्रा में पदार्थ निगलते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 1:04 PM IST
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ब्लैक होल (Black Hole) ब्रह्मण्ड (Universe) के सबसे रहस्यमयी पिंडों में से एक हैं. उनके बारे में सीधे तौर पर कोई भी जानकारी नहीं मिली है. सब कुछ सैद्धांतिक रूप से और उनके आसपास की घटनाओं से  ही पता चला है. फिर भी वैज्ञानिक उनके बारे में नई-नई जानकारी हासिल करने का प्रयास करते रहते हैं और उन्हें सफलता भी मिलती है. हाल ही में पता चला है कि ब्लैकहोल अपने आसपास के पदार्थ (Matter) अलग अलग तरह निगलते हैं.

दो अलग अलग अध्ययन

अग्रेजी और डच खगोलविदों के दो अध्ययन एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुए है. शोधकर्ताओं ने अवलोकन कर पाया है कि सभी ब्लैकहोल पदार्थों को एक ही तरह नहीं निगलते हैं. उनकी अपनी प्राथमिकताएं और खुराक होती हैं.

उर्सा मेजर तारामंडल की सभी गैलेक्सी
दोनों अध्ययन में शोधकर्ताओं ने गुड्स-उत्तरी इलाके के उर्सा मेजर तारामंडल की सभी गैलेक्सी का अध्ययन किया. इन अध्ययनों के प्रकाशन से पहले इस इलाके का अध्ययन मुख्यतः अंतरिक्ष टेलीस्कोप, वहां से आने वाले प्रकाश, इंफ्रारेड प्रकाश और पराबैंगनी प्रकाश के आधार पर होता था. इस अध्ययन में रेडियो टेलीस्कोप के संवेदनशील नेटवर्क के ताजा अवलोकनों और आंकड़ों के जरिए किया गया जिसमें यूनाइटेड किंगडम के ई-मेरिलिन नेशनल फैसिलिटी और यूरोपीयन VLBI नेटवर्क  (EVN) के टेलीस्कोप शामिल थे.

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ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में उसके आसपास से ही सारी जानकारी मिलती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


अलग-अलग सक्रियता



इस अध्ययन में सबसे प्रमुख बात जो पता चली वह यह थी कि बहुत सी अलग-अलग प्रकार की गैलेक्सी के केंद्र अलग अलग तरह से सक्रिय होती हैं. सभी ब्लैकहोल एक ही तरह से पदार्थों को नहीं निगलते हैं. अध्ययन के मुताबिक कुछ ज्यादा भूखे लगते हैं और जितना ज्यादा पदार्थ खा सकते हैं निगल जाते हैं, वहीं कुछ दूसरे धीरे धीरे पदार्थ अपने अंदर समेटते हैं जैसे धीरे धीरे खाना पचा रहे हों. इसके अलावा कुछ ब्लैकहोल ऐसे भी होते हैं जो कुछ नहीं निगलते हैं और भूखे ही रहते हैं.

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तारों के निर्माण में भी दिखती है ऐसी अवस्था

कई बार पदार्थ के कणों को गुरुत्वाकर्षण के जरिए जमा करने की प्रक्रिया, जिसे एक्रीशन भी कहा जाता है, तारों में उनके निर्माण के दौरान भी दिखती है तो कभी नहीं दिखाई देती. जब तारे के निर्माण की प्रक्रिया चल रही हो, तब उसके केंद्र के बारे में कुछ भी पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है.

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ब्लैक होल (Black Hole) के पदार्थ का निगलने का उसके रेडियो जेट से कोई सीधा संबंध नहीं हैं. (तस्वीर: NASA_JPL-Caltec )


रेडियो जेट और पदार्थ का निगलना

इस अध्ययन में एक यह बात भी पता चली है कि केंद्र में एक्रीशन प्रक्रिया रेडियो जेट का क्रिया शुरु कर भी सकती है, नहीं भी. और इसका ब्लैक होल के पदार्थ निगलने की दर से कोई संबंध नहीं हैं. शोधकर्ताओं ने ऐसा कोई तरतम्य नहीं पाया है जिससे रेडियो जेट का पदार्थ निगलने की प्रक्रिया से संबंध लगे.

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वहीं नीदरलैंड रिसर्च स्कूल फॉर एस्ट्रोनॉमी को नीदरलैंड के ग्रोनिंगजन यूनिवर्सिटी के पीटर बार्थेल ने बताया कि उनकी टीम ऐसे ज्यादा से ज्यादा संकेत देख रही है कि सभी गैलेक्सी के केंद्र में विशाल ब्लैक हैं और उनकी अलग अलग वृद्धि की स्थितियां हैं. उनके विकास की स्थिति के बारे में पता चलने लगा है धीरे-धीरे उनके बारे में समझ बढ़ने लगी है.
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