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जानिए कैसे Black Hole की व्याख्या कर सकती है ये अजीब Theory

दावा किया गया है कि ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में विरोधाभास स्ट्रिंग थ्योरी (String Theory) हल करने में सक्षम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
दावा किया गया है कि ब्लैकहोल (Black Hole) के बारे में विरोधाभास स्ट्रिंग थ्योरी (String Theory) हल करने में सक्षम है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

ब्लैकहोल (Black Hole) की व्याख्याओं की सीमाओं का हल स्ट्रिंग थ्योरी (String Theory) के जरिए पता करने की उम्मीद जताई गई है जिसमें ब्लैकहोल (Black Hole) की जगह एक धुंधली गेंद (Fuzzball) ले सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 6:14 AM IST
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ब्लैकहोल (Black Hole) अब तक ब्रह्माण्ड (Universe) के सबसे रहस्यमय पिंडों में से एक हैं. अब तक इनके बारे में एक भी प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिला है. वे ऐसे पिंड (objects) हैं जहां जाकर हमारी भैतिकी (Physics) का ज्ञान पूरी तरह से नाकाम हो जाता है. इन सबके बाद भी वे मौजूद हैं, लेकिन क्या हो अगर ये पिंड ब्लैकहोल हो ही ना, बल्कि एक अस्पष्ट कांपन करते हुए धागों की गेंद (Ball of String) ही हों. ताजा शोध में न केवल यह सच होने के संभावना जताई गई है बल्कि यह भी कहा गया है कि आने वाले समय में उन्हें देखा भी जा सकता है.

कहां से शुरू हुई ब्लैकहोल की अवधारणा
ब्लैकहोल की अवधारणा महान भौतिकविद अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत में सबसे पहले सामने आई थी. उस सिद्धांत में  यह कुछ पदार्थ बहुत ही ज्यादा छोटे आयतन में सिकुड़ जाए तो गुरुत्व का बल बहुत अधिक प्रभावी हो जाएगा. यह गुरुत्व सिकोड़ प्रकृति के चार मूल बलों पर बहुत अधिक हावी हो जाएगा जैसे शक्तिशाली नाभकीय बल पदार्थ को जोड़े रखता है.

तो यह होता है ब्लैक होल
एक बार नाजुक सीमा पर पहुंचने के बाद वह पदार्थ केवल अनंत सूक्ष्म बिंदु तक सिकुड़ता ही जाता है. इस अनंत बिंदु को सिंगुलैरिटी (singularity) कहा जाता है. यह बिंदु एक सतह से घिरा होता है जिसे इवेंट होराइजन कहते हैं. और यह बिंदु वह स्थान होता है जहां गुरुत्व का बल प्रकाश की गति को निष्प्रभाव कर देता है यानि प्रकाश तक को अपने अंदर खींच लेता है.



इस अवधारणा के साथ समस्या
बेशक ऐसा कोई अनंत सूक्ष्म बिंदु नहीं है, इसलिए यह तस्वीर गलत लगती है.  लेकिन 20वीं सदी के मध्य में खगलोविदों ने ऐसे पिंडों का पता लगाना शुरू कर दिया था जो ब्लैकहोल की तरह दिखते यानि कि काम करते लगते थे. और उनके नामुमकिन होने के बाद वे ब्रह्माण्ड में, उनके आसपास के इलाके को देखते हुए, तैरते दिखे.

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आइंस्टीन के सिद्धांत भी ब्लैकहोल (Black Hole) की पूरी तरह से व्याख्या नहीं कर पाते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


और यह विरोधाभास
केवल यही समस्या नहीं हैं. 1976 में भौतिकविद स्टीफन हॉकिंग्स ने यह महसूस किया कि ब्लैकहोल वास्तव में पूरी तरह काले नहीं हैं. क्वांटम मैकेनिक्स के अजीब होने के कारण ब्लैकहोल धीरे धीरे वाष्पीकृत हो जाते हैं, उड़ जाते हैं. इससे एक विराधोभास पैदा हो गया. सभी जानकारी ब्लैकहोल में समा जाती है, लेकिन जितना समझा गया है, हॉकिंग्स रेडिएशन वह जानकारी नहीं रखती. तो जब ब्लैकहोल उड़ जाते हैं तब उस जानकारी का क्या होता है.

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इस सिद्धांत से उम्मीद
दशकों से सैद्धांतिक भौतिकविद इस बात पर कड़ी मेहनत कर रहे हैं कि वे यह पता कर सकें जिससे ब्लैकहोल की व्याख्या की जा सके और इसके साथ जानकारी का विरोधाभास और सिग्युलैरिटी तक की व्याख्या की जा सके. इनमें से कुछ वैज्ञानिक स्ट्रिंग थ्योरी (String Theory) पर काम कर रहे हैं.

क्या है यह स्ट्रिंग थ्योरी
स्ट्रिंग थ्योरी के मुताबिक ब्रह्माण्ड का संपूर्ण पदार्थ मूल रूप से स्टिंग्स यानि तुंतु, धागे या रेशे से बना होता है. ये इतने छोटे होते हैं कि इन्हें देखा नहीं जा सकता है. इस सिद्धांत का दावा है कि यह हर चीज का सिद्धांत (Theory of Everything) है. यह हर कण, हर बल, और ब्रह्माण्ड में सबकुछ की व्याख्या कर सकता है. इसलिए यह ब्लैकहोल की भी आसान व्याख्या कर सकता है.

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स्ट्रिंग थ्योरी (String Theory) ब्लैकहोल (Black Hole) की अलग लेकिन सरल व्याख्या करती है.. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


क्या हैं ब्लैकहोल
हाल ही में प्रकाशित लाइव साइंस की रिपोर्ट में इस सिद्धांत की पैरवी करने वाले ब्लैक को एक कम रहस्यमय पिंड फजबॉल या धुंधली गेंद से बदलने की बात करते है. इस थ्योरी में ब्लैकहोल न तो ब्लैक हैं और न ही होल हैं बल्कि यह और संकुचित न्यूट्रॉन तारे हैं. न्यूट्रॉनतारे तब बनते हैं जब किसी पिंड के पास सिकुड़ने के लिए पर्याप्त गुरुत्व नहीं होता फिर भी इनके अंदर का पदार्थ इतना सघन होता है कि एक शहर में पूरा सूर्य समा जाए.

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फजबॉल में सभी स्ट्रिंग एक साथ आकर एक स्ट्रिंग की बड़ी गेंद बन जाती हैं. इनका गणितीय समाधान भी नहीं निकल सका है. फिर भी आने वाले सर्वेक्षणों में इनके पाए जाने की संभावना है. शोधकर्ताओं को गुरुत्व तरंग पकड़ने वाले उन्नत और आधुनिक उपकरणों से काफी उम्मीदें है जो ब्लैकहोल और फजबॉल में अंतर कर सकते हैं.
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