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Black Hole डाल सकते हैं अपने वातावरण पर दबाव- शोध में हुआ बड़ा खुलासा

यह खोज ब्लैक होल (Black Hole) की मामले में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

यह खोज ब्लैक होल (Black Hole) की मामले में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

  • News18Hindi
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    जब से ब्लैक होल (Black Hole) की अवधारणा की पुष्टि हुई है, उसके बाद से उसके बारे में काफी जानकारियां हासिल की जा चुकी हैं. वैसे तो ब्लैक होल की धारणा 18 वीं सदी से चली आ रही है, लेकिन 20वीं सदी के उत्तरार्ध में ब्लैकहोल के आसपास के वातावरण (Envrionment of Black Hole) को देख कर उसके अस्तित्व की पुष्टि हुई जिसके बाद ब्लैक होल के सबसे पास दिखने वाले आवरण की सीमा जिसे इवेंट होराइजन (Event Horizon) कहते हैं, के अध्ययन से ब्लैक होल के बारे में पता चलने लगा. नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने खोजा है कि ब्लैक होल अपने वातावरण पर दबाव भी डालते हैं.

    क्या ब्लैक होल से कुछ बाहर नहीं निकलता?
    ब्लैकहोल के बारे में काफी पहले से कहा जाता रहा है कि उनका गुरुत्व इतना शक्तिशाली होता है कि वे प्रकाश तक अपने अंदर खींच लेते हैं. प्रकाश के अंदर जाने की सीमा ही इवेंट होराइजन कहलाई. इस बीच 1974 में स्टीफन हॉकिंग ने यह पता लगाया था कि ब्लैक होल ऊष्मा विकिरण उत्सर्जित करते हैं. उससे पहले यह माना जाता था कि ब्लैक होल मरते हुए तारे की अंतिम अवस्था होते हैं.

    पहली बार दबाव की भूमिका
    ससेक्स यूनिवर्सिटी के भौतिकविदों ने यह पहली बार प्रमाणित रूप से दर्शाया है कि ब्लैक होल अपने वातावरण पर दबाव भी डालते हैं. वैज्ञानिकों ने दर्शाया है कि वास्तव में ब्लैक होल बहुत ही जटिल ऊष्मागतिक तंत्र होते हैं  जिसमें केवल तापमान ही नहीं बल्कि दबाव भी अपनी भूमिका निभाता है.

    बदलती धारणा में नई जानकारी
    वैज्ञानिक जगत को शुरू से ही यह पुरानी धारणा हैरान कर रही थी कि ब्लैक सब कुछ निगल लेते हैं और उनसे कुछ बाहर नहीं आ सकता. लेकिन इस विचार में काफी बदालव भी आते गए. इस लिहाज से ससेक्स यूनिवर्सिटी के भौतिकी और खगोलविज्ञान विभाग के प्रोफेसर जेवियर कालमेट और फोल्कर्ट काइपर्स की यह खोज बहुत ही उपयोगी है. यह अध्ययन पिछले सप्ताह ही फिजिकल रीव्यू डी में प्रकाशित हुआ है.

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    ब्लैक होल (Black Hole) के बारे में पहले माना जाता था कि उससे कभी कुछ भी बाहर नहीं आ सकता. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्वांटम गुरुत्व पैदा कर सकता है दबाव
    कालमेट और काइपर्स दोनों उस अतिरिक्त आकृति से परेशान थे जो उन समीकरणों में आ रही थी जो ब्लैक होल के उत्क्रम माप या एंट्रॉपी में क्वांटम गुरुत्व सुधारों के लिए लगाई जा रही थीं. उन्होंने परिचर्चा के दौरान पाया कि वे जो भी देख रहे थे वह दबाव का प्रभाव था. आगे की गणना करने पर उन्हें इस बात की पुष्टि हुई कि दरअसल क्वांटम गुरुत्व ब्लैक होल में दबाव पैदा कर सकता है.

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    ब्लैक होल नहीं होते काले
    कालमेट का कहना है कि उनकी पड़ताल में पता चला कि श्वार्ज चाइल्ड ब्लैक होल में दबाव के सात तापमान भी होता है. यह पूरी तरह से चौंकाने वाली जानकारी थी. उन्हें खुशी है कि इस खोज से विज्ञान जगत को बहुत लाभ होगा. कालमेट ने बताया कि हॉकिंग की धारणा थी कि ब्लैक होल काले नहीं होते  बल्कि उनका भी ब्लैक बॉडी की तरह एक विकिरण स्पैक्ट्रम होता है. इससे ब्लैक होल क्वांटम मैकेनिक्स, गुरुत्व और ऊष्मागतिकी के बीच अंतरक्रिया के अध्ययन के लिए आदर्श लैब है.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि यह खोज ब्लैक होल (Black Hole) के अनसुलझे सवालों के हल खोजने का रास्ता सुझा सकती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    दो सिद्धांतों के मेल से उम्मीद
    अगर ब्लैक होल को केवल सामान्य सापेक्षता के नजरिए से देखा जाए तो यह दिखाया जा सकता है कि उनके केंद्र में वह स्थिति होती है जहां भौतिकी के नियम  काम करना बंद कर देते हैं. इस अवस्था को सिंग्यूलरिटी कहते हैं. माना जाता है कि सामान्य सापेक्षता में क्वांटम क्षेत्र का सिद्धांत का समावेश ब्लैक होल की नई व्याख्याएं दे सकता है.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि उनकी खोज इस दिशा में एक कदम है. हालाकि उनका द्वारा अध्ययन किया गया ब्लैक होल में दबाव बहुत छोटे स्तर का है, लकिन यह इस दिशा में कई नए आयाम खोल सकता है. इससे खगोलभौतिकी, कणभौतिकी और क्वाटंम भौतिकी तक में संभावनाएं खुलेंगी.

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