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वायरस के कारण नीले पड़े इन अंडों को आखिर क्यों लोग शौक से खाते हैं?

सबसे पहले साल 1914 में स्पेन के पक्षी वैज्ञानिक Salvador Castelló ने चिली यात्रा के दौरान ये अंडे देखे (Photo-pixabay)
सबसे पहले साल 1914 में स्पेन के पक्षी वैज्ञानिक Salvador Castelló ने चिली यात्रा के दौरान ये अंडे देखे (Photo-pixabay)

वायरस चिकन के DNA पर हमला करके उसकी जेनेटिक संरचना में बदलाव (changes in genetic sequence caused by retrovirus) कर देते हैं. इस वजह से इस खास नस्ल के चिकन के अंडों का रंग नीला (chicken lays blue eggs) होता है.

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जब अंडा शब्द सुनें तो हमारे मस्तिष्क में क्या आता है? सफेद रंग के अंडे, जो एक खास आकार और स्वाद के होते हैं. लेकिन ये जानकारी पूरी नहीं. अंडे नीले रंग के भी होते हैं और यहां तक कि गुलाबी रंग के भी. मुर्गियों की एक खास प्रजाति, जिसे Araucana के नाम से जाना जाता है, वे नीले अंडे देने के लिए मशहूर हैं. ये चिली देश में ज्यादा मिलते हैं. इस ब्रीड की खासियत है कि इसके सिर पर कलगी नहीं होती है. जानिए, क्यों इस अंडे का रंग नीला होता है और क्या इसे खाया जा सकता है?

कहां से आईं नीले अंडे देने वाली मुर्गियां
इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. माना जाता है कि सबसे पहले साल 1914 में स्पेन के पक्षी वैज्ञानिक Salvador Castelló ने चिली यात्रा के दौरान ये चिकन देखे. चिली के Araucanía इलाके में दिखने के कारण इसे Araucana कहा जाने लगा. वैज्ञानिक ने दुनिया की पहली Poultry Congres में इस चिकन को मुर्गे की नई प्रजाति मानते हुए इस बारे में बताया. तभी इसे नया नाम देने की सोची गई, हालांकि कुछ ही वक्त बाद वैज्ञानिकों को समझ आ गया कि ये चिकन घरेलू चिकन की ही एक किस्म है.

वायरस मुर्गियों में प्रवेश कर उनमें जीनोम की संरचना को बदल देते हैं (Photo-pixabay)

क्यों होता है इन मुर्गियों का अंडा नीला


इसकी ठीक-ठीक वजह तक अभी पहुंचा नहीं जा सका है. वैज्ञानिकों का मानना है कि चिकन में रेट्रोवायरस के हमले की काफी ज्यादा आशंका रहती है. ये वे वायरस हैं जो सिंगल RNA होते हैं और मुर्गियों में प्रवेश कर उनमें जीनोम की संरचना को बदल देते हैं. इन रेट्रोवायरस को EAV-HP कहते हैं. जींस की संरचना में बदलाव के कारण चिकन के अंडे नीले हो जाते हैं. हालांकि वायरस के हमले के बाद भी इन्हें खाना एकदम सुरक्षित है. वायरस केवल जीन की आंतरिक संरचना में बदलाव कर उसका रंग बदल देता है. यही वजह है कि चिली ही नहीं, कई यूरोपियन देशों और अमेरिका में भी ये चिकन काफी शौक से खाया जाता है. यहां तक कि रेस्त्रां में ये एग्जोटिक आयटम की श्रेणी में आते हैं और काफी महंगे दामों पर मिलते हैं. वैसे अब नीले अंडे देने वाले मुर्गियों की प्रजनन क्षमता प्राकृतिक तौर पर कम हो रही है और ये बड़ी तेजी से घट रही हैं. इसकी एक वजह ये भी है रेट्रोवायरस के हमले के कारण बहुत से चिकन अपने शेल में ही खत्म हो जाते है . यही वजह है कि अब चिली और अमेरिका में इसकी ब्रीडिंग कराई जाने लगी है.

मुर्गियों की एक और प्रजाति है, जो नीले अंडे देती है. इसे Easter egger chicken के नाम से जाना जाता है. ये मिक्स्ड ब्रीड है, जिसके अंडे नीले, हरे और कई बार गुलाबी भी होते हैं. ये भी खाने लायक होते हैं लेकिन American Poultry Association's (APA) के मुताबिक ये सेहत के लिए खास फायदेमंद नहीं.

ये इंडोनेशियाई चिकन है, जिसके बाल से लेकर पूरा शरीर और यहां तक हड्डियां भी काले रंग की होती हैं


चिकन की एक दुर्लभ नस्ल को Ayam Cemani कहते हैं. ये इंडोनेशियाई चिकन है, जिसके बाल से लेकर पूरा शरीर और यहां तक हड्डियां भी काले रंग की होती हैं. इंडेनेशिया के लोग मानते हैं कि इस चिकन के पास जादुई शक्तियां होती हैं. साल 1998 में डच मुर्गी पालक इसे नीदरलैंड लेकर आए, जिसके बाद से ये पूरे यूरोप में फैल गईं. शरीर के सभी अंगों के काले होने की वजह है fibromelanosis नाम तत्व की अधिकता, जो रंग निर्धारण करता है. वैसे ये मुर्गियां देखने में भले ही किसी चमत्कारी ताकत वाली लगें लेकिन इनके अंडे सफेद ही रंग के होते हैं.

चिकन की एक और प्रजाति है Cream Legbar. ये मिश्रित ब्रीड है जो नैचुरली नीले रंग के अंडे देने वाली प्रजाति के साथ एक सामान्य प्रजाति वाले चिकन के मेल से बनती है. इस तरह से ग्रेट ब्रिटेन में चिकन तैयार किए जाते हैं, जिनके अंडे हल्के नीले या फिर हल्के हरे रंग के होते हैं.

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