क्यों आग उगलते लाल ग्रह Mars पर खूबसूरत नीले रंग के टीले दिखे?

 मंगल पर दिखते ये नीले टीले हाल के नहीं हैं, बल्कि सालों पुराने हैं (Photo- NASA)

मंगल पर दिखते ये नीले टीले हाल के नहीं हैं, बल्कि सालों पुराने हैं (Photo- NASA)

अमेरिकी अंतिरक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने हाल ही में मंगल ग्रह पर रेत के टीलों (blue dunes on Mars planet) की तस्वीरें जारी कीं, जो भूरे या किसी और रंग की नहीं, बल्कि नीले रंग की हैं. इन्हें धरती की ही तर्ज पर तेज हवाओं ने तैयार किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 7:51 AM IST
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मंगल ग्रह (Mars) पर जीवन की खोज और उसके अनुकूल हालात बनाने के लिए गहन शोध चल रहे हैं. अंतिरक्ष एजेंसी नासा लगातार इस काम में लगी हुई है. इंसानी बस्ती बनाने की जुगत के बीच इस ग्रह पर अलग ही नजारा दिखा. बेहद उच्च विकिरण वाले लाल ग्रह पर नीले रंग के टीले नजर आए. अंतिरक्ष एजेंसी नासा ने तस्वीरें जारी करते हुए लिखा- ब्यू ड्यून्स ऑन द रेड प्लानेट. लेकिन क्या वजह है जो तपते हुए इस ग्रह पर नीले रंग के टीले दिख रहे हैं.

दिखे रेत के टीले

इसकी वजह जानने से पहले एक बार तस्वीर की डिटेल जानते हैं. नासा के मुताबिक तस्वीर को मंगल के उत्तरी ध्रुव से लिया गया है. ये टीले बिल्कुल धरती की तर्ज पर बने हैं, जिन्हें ग्रह पर चलने वाली तेज हवाओं ने तैयार किया है. नीले रंग के ये टीले लगभग 30 किलोमीटर के दायरे में दिख रहे हैं.

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ओडिसी ऑर्बिटर का उपयोग 

आग उगलते इस ग्रह पर बेहद खूबसूरत नजारे को कैद करना आसान नहीं था. इस फोटो के लिए नासा ने मार्स ओडिसी ऑर्बिटर के इंफ्रारेड कैमरे का इस्तेमाल किया. धुरी पर तैनात किया हुआ ये कैमरा थर्मल एमिशन इमेजिंग सिस्टम (THEMIS) भी कहलाता है. बता दें कि कैमरा केवल तस्वीरें खींचने का काम नहीं कर रहा, बल्कि खास तरीके से बना हुआ है. ये चौबीसों घंटे मंगल ग्रह का तापमान मापता रहता है ताकि विशेषज्ञ ये समझ सकें कि ग्रह पर किस तरह की चीजें मौजूद हैं और कब-कब वे अपना तापमान बदलती हैं.

Mars blue dunes NASA
मंगल ग्रह पर इंसान का कुछ पलों के लिए भी रहना मुश्किल है




पुरानी हैं तस्वीरें, जो अभी जारी हुईं 

वैसे बता दें कि मंगल पर दिखते ये नीले टीले हाल के नहीं हैं, बल्कि सालों पुराने हैं. मार्स ओडिसी ऑर्बिटर के 20 साल पूरे होने पर नासा ने ये तस्वीरें जारी कीं. 2 दशक काम करने के बाद ये ऑर्बिटर मंगल पर सबसे लंबे समय तक काम कर रहा यान बन चुका है.

अब समझते हैं कि आखिर क्यों लाल ग्रह पर नीले टीले दिख रहे हैं

वैज्ञानिक इन्हें रेगुलर सैंड ड्यून्स कह रहे हैं, यानी रेत के वो टीले, जो मंगल पर लगातार तेज हवाओं के कारण बनते रहे हैं. छोटे टीलों का कोई खास रंग नहीं है, जबकि विशालकाय टीले नीले रंग के दिख रहे हैं. गौर करें कि ये नीले दिख रहे हैं, नीले हैं नहीं. इस बारे में इनवर्स वेबसाइट ने प्लानेटरी इमेज रिसर्च लैबोरेटरी के जिओलॉजिस्ट मैक एवन के हवाले से बताया कि टीले असल में तो हल्के भूरे रंग के ही हैं लेकिन अधिकतम दूरी तक खिंचने के कारण वे नीले दिखाई देते हैं.

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इसमें कुछ कमाल तस्वीरें खींचने का भी है

ग्रह की तस्वीर भूरी और धुंधली दिखती है, ऐसे में प्रोसेसिंग के दौरान उसमें कुछ एडिट होते हैं, जो उसे नीला बना देते हैं. यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) भी इस बात पर मुहर लगाते हुए बताती है कि लाल ग्रह पर नीले रंग के टीले असल में इमेज प्रोसेंसिग के दौरान आया इल्यूजन है.

tardigrade Mars
टार्डिग्रेड्स इतने मजबूत होते हैं कि अंतरिक्ष की जानलेवा रेडिएशन भी इनपर बेअसर होती हैं (Photo- wikihow)


जेनेटिक इंजीनियरिंग की मदद से मंगल तक का रास्ता 

इस बीच मंगल पर भी चांद की तरह इंसानी बस्ती बसाने की बात लगातार जोर पकड़ रही है. इस काम में अब जेनेटिक इंजीनियरिंग की भी मदद ली जाने वाली है. दरअसल इस ग्रह पर इंसान का कुछ पलों के लिए भी रहना मुश्किल है. इसकी वजह है यहां का उच्च तापमान और विकिरण. ऐसे में अगर इंसानों को वहां रहना हो तो उसके लिए उन्हीं को खुद में बदलाव करना होगा. इसमें जेनेटिक इंजीनियरिंग अहम भूमिका निभा सकता है.

टार्डिग्रेड करेंगे सहायता 

इसके लिए वैज्ञानिकों ने टार्डिग्रेड नामके जीव के जींस मानवीय कोशिकाओं में डालने में सफलता पा ली है जो अंतरिक्ष में रह सकते हैं. यहां बता दें कि टार्डिग्रेड्स इतने मजबूत होते हैं कि अंतरिक्ष की जानलेवा रेडिएशन भी इनपर बेअसर होती है. ये 300 डिग्री से भी ज्यादा तापमान पर रह पाते हैं और यही खूबी इन्हें हमारे काम ला रही है.

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अधिकतम तापमान सह पाते हैं 

इनके बारे में माना जाता है कि यह इंसान के बाद भी इस पृथ्वी पर जिंदा रहेंगे हो सकता है कि ये पृथ्वी पाए जाने वाले आखिरी प्राणी हों. इन्हें उबले पानी में डालने से, बर्फ की तरह जमा देने से, बहुत ही ज्यादा दबाव देने से ये मरते नहीं हैं. जीन के स्तर पर इनका यह गुण मानव के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है. टार्डिग्रेड की इन्हीं खूबियों के कारण हो सकता है कि अंतरिक्ष यात्री मंगल से भी आगे जाने में सक्षम हो सकें.
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