इन किताबों को अपने पास रखना भी है अपराध, जानिए क्या कहता है कानून?

भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में सुनवाई के दौरान एक किताब (Book) वॉर एंड पीस (War and Peace) का जिक्र आया. इसको लेकर काफी चर्चा हुई. सवाल है कि आखिर भारत में किस आधार पर किताबें बैन होती हैं..

News18Hindi
Updated: August 30, 2019, 1:06 PM IST
इन किताबों को अपने पास रखना भी है अपराध, जानिए क्या कहता है कानून?
भारत में कई मशहूर किताबें बैन हुईं हैं
News18Hindi
Updated: August 30, 2019, 1:06 PM IST
रूसी लेखक लियो टॉलस्टॉय (Leo Tolstoy) की किताब (Book) वॉर एंड पीस (War and Peace) चर्चा में है. खबर आई कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के आरोपी वेरनॉन गोंजाल्विस की जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में इस किताब का जिक्र आया. कहा गया कि कोर्ट में जज ने कहा कि आपके घर में ये किताब क्यों थी?

बाद में इस खबर को लेकर सफाई आई कि जज ने जिस किताब का जिक्र किया था वो लियो टॉल्सटॉय की वॉर एंड पीस नहीं बल्कि विश्वजीत रॉय कि किताब वॉर एंड पीस इन जंगलमहल है. माओवाद पर आधारित इस किताब को लेकर जज ने आरोपी वेरनॉन गोंजाल्विस से सवाल पूछे थे.

बॉम्बे हाईकोर्ट के जज के सवाल पर बहस अपनी जगह है लेकिन ये हकीकत है कि भारत में किताबें बैन होती रही हैं. सवाल है कि किसी भी किताब पर बैन क्यों लगाया जाता है? किताबों पर बैन लगाने का कानून क्या है? और क्या किताबों को अपने पास रखना भी गैरकानूनी है?

किस आधार पर बैन होती हैं किताबें

कानून के जानकार बताते हैं कि जिन किताबों से राष्ट्रीय एकता और अखंडता को खतरा पैदा होता है, या किसी धर्म विशेष की भावनाएं आहत होती हैं, उन किताबों को सरकार बैन कर सकती है. सरकार कुछ वजहों के आधार पर किसी किताब पर बैन लगा सकती हैं. मसलन हिंसा भड़काने वाली, जातीय भेदभाव को बढ़ावा देने वाली, कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करने वाली और सरकार के खिलाफ विद्रोह को उकसाने वाली किताबों पर बैन लगाया जा सकता है.

book ban in india famous banned book leo tolstoy war and peace crpc jail and fine law for possesion
बॉम्बे हाईकोर्ट में वॉर एंड पीस पर चर्चा


बैन किताबों को अपने पास रखना, बेचना या किसी को देना भी अपराध है. अश्लील किताबों को लेकर भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 292 में ऐसी किताबें रखने पर 2 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है. सीआरपीसी की धारा 95 के तहत पुलिस के पास बैन किताबों को जब्त करने का भी अधिकार है.
Loading...

कानून के जानकार बताते हैं कि संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के तहत दिया गया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के दायरे में ही किताब लिखना और बांटना भी आता है. इस अधिकार पर तभी अंकुश लगाया जा सकता है, जब कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का अंदेशा होता हो. कानूनन किसी के सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए कोई किताब या लेख नहीं लिखा जा सकता है. ऐसी स्थिति में भी आपत्ति दर्ज करवाने पर किताबें बैन हो सकती है.

भारत में बैन हैं ये किताबें

भारत में कई मशहूर किताबें बैन हुई हैं. हर किताब के बैन होने के पीछ अपनी एक कहानी है.

द ग्रेट सोल

पुलित्जर अवॉर्ड विजेता और न्यूयॉर्क टाइम्स के एडिटर रह चुके जोसेफ लेलिवेल्ड की किताब द ग्रेट सोल भारत में बैन है. द ग्रेट सोल में महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका में बिताए दिनों की कहानी कही गई है. ऐसा दावा किया जाता है कि इस किताब में महात्मा गांधी के सेक्सुएल लाइफ पर कुछ सनसनीखेज खुलासा किया गया है. किताब में धर्म को लेकर बापू के विचारों को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी. इस किताब को पहले गुजरात में बैन किया गया. कस्टम डिपार्टमेंट इस किताब को भारत लाने नहीं देता.

book ban in india famous banned book leo tolstoy war and peace crpc jail and fine law for possesion
महात्मा गांधी पर लिखी किताब द ग्रेट सोल


नाइन ऑवर्स टू रामा

नाइन ऑवर्स टू रामा को मशहूर इतिहासकार और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वोल्पर्ट ने लिखा है. इस किताब में बापू के अंतिम दिन को काल्पनिक तरीके से लिखा गया है. किताब में बताया गया है कि किस तरह से नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या की साजिश रची थी. कहा जाता है कि इस किताब को इसलिए बैन किया गया क्योंकि इससे बापू के लिए खराब सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम का खुलासा होता था .

जिन्ना इंडिया पार्टिशन इंडिपेनडेंस

भारत पाकिस्तान के बंटवारे में मोहम्मद अली जिन्ना की भूमिका को लेकर ये किताब लिखी गई है. इसमें जिन्ना को बंटवारे का जिम्मेदार खलनायक के तौर पर पेश किया गया है. पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने 2009 में जिन्ना और भारत बंटवारे में उनकी भूमिका को लेकर लंबे लेख लिखे. जिन्ना को लेकर भारत में जैसी धारणा है, जसवंत सिंह ने उसके उलट जिन्ना को ज्यादा पॉजिटिव तरीके से प्रस्तुत किया. विवाद बढ़ने पर किताब को गुजरात में बैन कर दिया गया. हालांकि बाद मे कोर्ट के आदेश पर बैन हटा लिया गया.

द प्राइस ऑफ पावर

इस किताब में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के साथ रिश्तों को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया गया था. मोरराजी देसाई ने अपने ऊपर लगे आरोपों को मनगढंत और बेसिरपैर का बताया था. उन्होंने अमेरिका में इसके खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था. हालांकि वो केस हार गए थे. भारत सरकार ने इस किताब पर कुछ वक्त के लिए पाबंदी लगाई थी.

book ban in india famous banned book leo tolstoy war and peace crpc jail and fine law for possesion
द प्राइस ऑफ पावर


नेहरू: अ पॉलिटिकल बायोग्राफी

जवाहरलाल नेहरू पर लिखी इस किताब में उनकी राजनीतिक अक्षमता को लेकर सवाल उठाए गए हैं. नेहरू की नेतृत्व पर सवाल उठाने की वजह से इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी ने इस किताब पर बैन लगा दिया था. हालांकि अब ये किताब भारत में उपलब्ध है.

इसके अलावा धर्म को लेकर किए गए विवादित टिप्पणियों की वजह से भारत में कई किताबें बैन हुई हैं. इनमें 'द हिंदूजः एन ऑल्टरनेटिव हिस्ट्री', सलमान रुश्दी की 'द सैटनिक वर्सेज', तसलीमा नसरीन की लज्जा, अब्रे मेनेन की लिखी किताब रामायणा जैसी किताबें शामिल हैं. अश्लीलता की वजह से लेडी चैटर्ली लवर को भी बैन किया गया था लेकिन अब ये किताब आसानी से मिल जाती है.

ये भी पढ़ें: NRC की लिस्ट जारी होने से पहले जानें क्या आप हैं भारतीय नागरिक

अपने ही भाई दारा की गर्दन कटवाकर फूट-फूटकर रोया था औरंगजेब

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 30, 2019, 12:23 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...