जानिए क्या होता है बूमरैंग भूकंप और क्यों होता है यह बहुत खतरनाक?

जानिए क्या होता है बूमरैंग भूकंप और क्यों होता है यह बहुत खतरनाक?
वैज्ञानिकों ने इस खास और बहुत कम आने वाले भूकंप के प्रमाण जुटाए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

बूमरैंग भूकंप (Boomerang earthquake) बहुत कम होते हैं और इनके बारे में जानना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन इसके झटके (Tremors) बहुत ही ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले होते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 13, 2020, 4:07 PM IST
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भूकंप (Earthquake) के बारे में वैज्ञानिकों को अभी काफी कुछ पता करना है. इसमें सबसे बड़ी चुनौती इनका पूर्वानुमान (Pediction) लगाना है. अभी तक यही माना जाता था कि भूकंप के बड़े झटके के बाद हलके झटके आते हैं. लेकिन ऐसा होने जरूरी नहीं हैं. कई बार दूसरा झटका पहले से भी ज्यादा तेज हो सकता है. वैज्ञानिकों ने इसे  बूमरैंग भूंकप (Boomerang Earthquake) नाम दिया है.

कब आया था यह भूकंप
वैज्ञानिकों ने हाल ही में इस बहुत ही विरले भूकंप होने का अवलोकन किया है. अपने आप में अनोखे तरह का होने वाला यह भूकंप अटलांटिक महासागर में साल 2016 में आया था. पहली बार इस तरह के आए भूंकप को वैज्ञानिकों ने बूमरैंग नाम दिया है और उनका मानना है कि यह वैज्ञानिकों को भूकंप चेतावनी सिस्टम विकसित करने में मददगार हो सकता है.

तरंगों का लौटना
साउथैम्पटन यूनिवर्सिटी और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने 2016 में हुई घटना के एक अध्ययन के दौरान अटलांटिक महासागर के अंदर आए भूकंपों में से एक के रास्ते की पड़ताल की थी. उन्होंने पाया कि बूमरैंग भूंकपों में जहां से टूटन होती है वहां से निकलने वाली तरंगे तीव्रगति से वापस लौटती  हैं.



कब आते हैं भूकंप
आमतौर पर भूकंप तब आते हैं जब पृथ्वी की ऊपरी सतह के दो हिस्सों के बीच दबाव होता है. इसी के परिणामस्वरूप झटके महसूस किए जाते हैं. अगर यह इनकी तीव्रता अधिक रही तो ये बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकते हैं.
तेजी से वापस लौटना है नई बातभूकंप की तरंगे तेजी से वापस भी लौट सकती है और वापसी के समय उसी इलाके को भारी नुकसान पहुंचा सकती है. इसी बहुत कम होने वाली घटना को ही बूमरैंग भूकंप कहते है. ये बूमरैंग भूकंप और ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाले होते हैं, क्योंकि इनमें लौटने वाली तरंगों की गति बहुत अधिक होती है और इनके नुकसान का दायरा भी बहुत अधिक होता है.भूकंपीय तरंगों से ‘दिखे’ जमीन के नीचे के रासायनिक बदलाव, जानिए क्या होगा फायदाकैसे पहचान कर सके वैज्ञानिक इसकीवैज्ञानिकों का मानना है कि बूमरैंग भूकंप कैसे होते हैं इस जानकारी से हमें भविष्य में होने वाले भूकंपों के पूर्वानुमान लगाने में ज्यादा मदद मिल सकती है. नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि साल 2016 में जो अटलांटिक महासागर में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था वह बहुत कम आने वाले भूकंपों में से एक था. शोधकर्ताओं इसे पानी के नीचे लगे सीजमिक सेंसर्स के जरिए पहचाना था.पहली बार मिले ऐसे प्रमाणइस अध्ययन के प्रथम लेखक स्टीफन हिक्स ने बताया, “वैज्ञानिकों ने टूटन की तरंगों की वापसी की प्रक्रिया को सैद्धांतिक तौर पर संभव पाया है, लेकिन नए अध्ययन में इस तरह की अजीब प्रक्रिया के होने के साफ प्रमाण मिले हैं. यह भूकंप रोमांचे फ्रैक्चर जोन में आया था जो ब्राजील और अफ्रीका के पश्चिमी तट के बीच स्थित है. भूकंप की तरंगे एक दिशा में गईं और फिर लौट कर तेजी से वापस आकर दूसरा झटका दे गईं.

उम्मीद से बहुत अलग था वह भूकंप
हिक्स का कहना है कि भले ही फॉल्ट की संरचना सरल दिखती हो, लेकिन जिस तरह से भूंकप बढ़ा वह सरल नहीं था. यह उम्मीद के बिलकुल उलट था. इसी वजह से हिक्स की टीम ने इस भूकंप के आंकड़ों का अवलोकन करना शुरू किया.

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भूकंप के दो दौर थे. पहले दौरे में भूकंप पूर्व की ओर गया और इसके बाद लौटा और पश्चिम की ओर गया. ऐसी घटनाओं के प्रमाण बढ़ रहे हैं, लेकिन इनकी खोज के लिए और अधिक शोध की जरूरत है. वैज्ञानिकों का मानना है कि सैद्धांतिक तौर पर इस तरह के भूकंप होते हैं, लेकिन इन्हें पकड़ पाना बहुत मुश्किल होता है.
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