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BPSC की परीक्षा में OBC का कटऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा क्यों है?

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: October 16, 2019, 5:12 PM IST
BPSC की परीक्षा में OBC का कटऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा क्यों है?
बीपीएससी के रिजल्ट में ओबीसी का कटऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा गया है

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) की परीक्षा में ओबीसी (OBC) का कटऑफ (Cut Off) जनरल (general) कैटेगरी के उम्मीदवारों से ऊपर गया है. इसका क्या मतलब है और ओबीसी समुदाय क्यों इसे अपने खिलाफ साजिश मान रहा है...

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  • Last Updated: October 16, 2019, 5:12 PM IST
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बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (BPSC) की परीक्षा में ओबीसी (OBC) का कट ऑफ (Cut Off) जनरल कैटेगरी (General) से भी ऊपर गया है. बीपीएससी के फाइनल रिजल्ट में ओबीसी कैंडिडेट्स का फाइनल कट ऑफ है- 595, जबकि जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स का कट ऑफ है- 588. इस कट ऑफ लिस्ट को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

कहा जा रहा है कि आखिर पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों का कट ऑफ सामान्य वर्ग के कट ऑफ से ज्यादा कैसे हो सकता है? ये आरक्षण खत्म करने की साजिश के तहत हो रहा है. ऐसे कट ऑफ लिस्ट के जरिए आरक्षण की जरूरत नहीं होने की बात कहकर रिजर्वेशन को खत्म किया जा सकता है.

बिहार में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव ने इसको लेकर बिहार सरकार और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया है- नीतीश जी ने अपनी नैतिकता, अंतरात्मा और जमीर को नागपुर में गिरवी रख दिया है. जनादेश डकैती के बाद अब नीतीश जी अपनी अगुआई में आरक्षण पर भी डाका डलवा रहे हैं. बीपीएससी परीक्षा में ओबीसी का कट ऑफ सामान्य से ज्यादा होने के बावजूद भी ओबीसी के साथ घोर अन्याय किया जा रहा है. सीएम जवाब दें.

ओबीसी कटऑफ ज्यादा रहने पर सवाल ही सवाल

आरजेडी के साथ ही लोकसमता पार्टी और उसके नेता उपेन्द्र कुशवाहा ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. कट ऑफ लिस्ट को लेकर कई सवाल हैं. पहला सवाल तो यही है कि अगर ओबीसी का कट ऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा रहता है तो इसका क्या मतलब निकाला जाए? अगर ओबीसी का कट ऑफ ज्यादा रहता है तो ये ओबीसी के साथ अन्याय कैसे हो गया? कट ऑफ ज्यादा रहने को आरक्षण खत्म करने की कोशिश के तौर पर कैसे देखा जा रहा है? इन सवालों को बारीकी से समझने की जरूरत है क्योंकि आने वाले वक्त में ये सवाल ज्यादा मजबूती से सामने आने वाले हैं.

ओबीसी कटऑफ ज्यादा आने का मतलब क्या है?

पहली बात ये कि अगर ओबीसी का कट ऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा रहता है तो इसका मतलब है कि ओबीसी उम्मीदवारों को परीक्षा में पास होने के लिए जनरल कैटेगरी वाले उम्मीदवारों से ज्यादा नंबर लाने होंगे. बीपीएससी की परीक्षा में यही हुआ है. बीपीएससी की फाइनल लिस्ट में पिछड़ा वर्ग के वही उम्मीदवार जगह पाने में कामयाब होंगे, जिन्होंने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा नंबर लाए हों.
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दूसरे राज्यों की कई परीक्षाओं में कई बार ओबीसी का कटऑफ ज्यादा रहा है


पिछले कुछ दिनों में बिहार की तरह ये दूसरे राज्यों में भी हो चुका है. यूपी, राजस्थान और मध्य प्रदेश सरकार की कुछ परीक्षाओं में ओबीसी का कट ऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा गया है. पिछले साल राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस की परीक्षा में ओबीसी का कट ऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा गया. ओबीसी का कट ऑफ रहा- 99.33 जबकि जनरल कैटेगरी का कटऑफ रहा- 76.06.

राजस्थान में भी पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों ने इस कट ऑफ पर आपत्ति जताई और वो इसके खिलाफ हाईकोर्ट चले गए. रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स में सब इंस्पेक्टर के पदों के लिए हुई परीक्षा में ओबीसी का कटऑफ गया- 95.53 जबकि जनरल कैटेगरी के उम्मीदवार 94.59 परसेंट पर ही सेलेक्ट हो गए. इसी तरह दिल्ली सरकार में टीचर की वैकेंसी के लिए अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों का कटऑफ गया-85.45 जबकि जनरल कैटेगरी का कटऑफ रहा-80.96.

ओबीसी कटऑफ का ज्यादा रहना पिछड़ों के साथ अन्याय कैसे?

अब सवाल उठता है कि अगर रिजर्व्ड कैटेगरी का कैंडिडेट अनरिजर्व्ड कैटेगरी के कैंडिडेट से ज्यादा नंबर लाता है तो उसे किस कैटेगरी में रखा जाएगा? संवैधानिक प्रावधान है कि अगर आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों से ज्यादा नंबर लाता है तो उसका सेलेक्शन अनारक्षित सीट पर हो. लेकिन आरोप लगाया जाता है कि इसका पालन सही तरीके से नहीं होता है. जब भी ओबीसी का कट ऑफ ज्यादा होता है, इसको लेकर खूब हंगामा होता है.

दो तरह की बातें की जाती हैं. ओबीसी का कटऑफ ज्यादा होने पर आरक्षण विरोधी कहते हैं कि चूंकि आरक्षण की वजह से पिछड़ी जातियों का सामाजिक और शैक्षणिक स्तर में जबरदस्त विकास हुआ है इसलिए उनका कटऑफ ज्यादा आ रहा है. इसका हवाला देकर आरक्षण को खत्म करने की बात कही जाती है. वहीं आरक्षण के समर्थन में खड़े लोग कहते हैं कि ऐसा साजिश के तहत किया जाता है. ताकि जनरल कैटेगरी में कोई ओबीसी घुसने न पाए और इस तरह से सामान्य वर्ग को 50 फीसदी से ज्यादा का आरक्षण मिल जाता है.

आरक्षण मामलों के जानकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी में समाजशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सुबोध कुमार कहते हैं कि 'आरक्षण विरोधी जानबूझकर ऐसा कर रहे हैं. ओबीसी कटऑफ ज्यादा करके सामान्य वर्ग को 50.50 फीसदी का आरक्षण दिया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट का रुलिंग भी कहता है कि अगर ओबीसी का कट ऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा आए तो उसकी नियुक्ति जनरल कैटेगरी में मानी जाए. लेकिन ये लोग ऐसा कर नहीं रहे हैं. नतीजतन ओबीसी के एक भी उम्मीदवार की नियुक्ति जनरल सीट पर नहीं हो पाती है. इस तरह से करीब 12 से 15 फीसदी जनसंख्या वाले सामान्य वर्ग को 50.50 फीसदी का आरक्षण मिल जाता है.'

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ओबीसी कटऑफ ज्यादा रहने पर पिछड़ा वर्ग के लोग विरोध करते हैं


अब सवाल ये उठता है कि अगर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश है कि ओबीसी उम्मीदवार का कटऑफ जनरल कैटेगरी से ज्यादा रहे तो ऐसे ओबीसी उम्मीदवार का सेलेक्शन जनरल की सीट पर हो, तो इस निर्देश का पालन क्यों नहीं होता है. इस बात को समझने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रुलिंग के बारे में जानकारी लेनी होगी.

क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के मुकदमे में इस बारे में निर्देश दिए गए हैं. इस पर नौ जजों की बेंच ने फैसला दिया था. फैसले में कहा गया था कि अगर पिछड़ा, अनुसूचित जाति या जनजाति का उम्मीदवार सामान्य वर्ग के उम्मीदवार से ज्यादा नंबर लाता है तो उसका सेलेक्शन सामान्य वर्ग में किया जाए. लेकिन इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने एक और निर्देश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि ज्यादा नंबर लाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार का सेलेक्शन तभी अनारक्षित वर्ग की सीट पर हो, अगर उसने आरक्षित वर्ग में मिलने वाली एक भी सुविधा या छूट नहीं ली हो. यानी अगर किसी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने उम्र सीमा, परीक्षा फीस और नियुक्ति संबंधी कोई दूसरी सुविधा या छूट ली हो तो ज्यादा नंबर लाने के बावजूद उसका सेलेक्शन अनारक्षित सीट पर नहीं किया जा सकता.

इसी आधार पर कट ऑफ लिस्ट में ज्यादा नंबर लाने वाले पिछड़ों का सेलेक्शन सामान्य सीट पर नहीं हो पाता. क्योंकि उन्होंने कोई न कोई आरक्षित वर्ग की छूट ले रखी होती है.

दरअसल ये एक पेंचीदा मसला है. जैसे ही इस तरह की कोई खबर सामने आती है. इसपर लोग दो फाड़ हो जाते हैं. आरक्षण समर्थक इसे अपने लिए साजिश मानते हैं और आरक्षण विरोधी इसके बहाने आरक्षण खत्म करने की बात करने लगते हैं.

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First published: October 16, 2019, 5:12 PM IST
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