स्तनपान से बच्चों में कम हो सकती है वायरस की संख्या: शोध

स्तनपान से बच्चों में कम हो सकती है वायरस की संख्या: शोध
नवजात बच्चे के पिता उदयभान ने बताया कि लॉकडाउन की इन स्थितियों में पैदा हुए अपने बच्चे का नाम वह लॉकडाउन यादव रखना चाहते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

एक शोध में वैज्ञानिकों ने पाया है कि शिशुओं (Infants) में स्तनपान (Breastfeeding) से उनमें वायरस की संख्याओं में खासी कमी हो जाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 19, 2020, 9:51 AM IST
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नई दिल्ली: दुनिया में कोरोना वायरस (Corona virus) के खिलाफ जंग शिद्दत से जारी है. इस लड़ाई ने लोगों को अपने सेहत के प्रति काफी संवेदनशील बनाया है तो उन्हें अपनी सेहत के प्रति जागरुक भी किया है. इस समय कोविड 19 के इलाज के लिए बहुत से शोध दुनियाभर में चल रहे हैं. इसी बीच एक शोध ने मां के दूध की अहमियत को बढ़ाने वाले नतीजे हासिल किए हैं.

बहुत कम मात्रा में भी माता का दूध है चमत्कारिक
ताजा शोध के मुताबिक मां के दूध की कम मात्रा भी बच्चे को जानलेवा वायरसों से लड़ने में बहुत सक्षम बना देती है. यह दूध बच्चे की आंत में बहुत से  वायरसों को जमा होने से रोकने में अहम भूमिका निभाता है.

क्या अहम भूमिका निभाता है मां का दूध



नेचर जर्नल में प्रकाशित शोध में पाया गया है कि स्तनपान बच्चे और उसके अंदर सूक्ष्मजीवी वातावरण के बीच होने वाले परस्पर प्रभावों में अहम भूमिका निभाता है. इस शोध के नतीजे शिशुओं में स्तनपान को बढ़ावा देंगे.



गीहे
इंसान के शरीर में कई तरह के वायरस मौजूद रहते हैं.


नवजात शिशु में नहीं होते वायरस
आम तौर पर जब बच्चा पैदा होता है तब उसमें वायरस नहीं होते, लेकिन जल्दी ही उसकी आंतों में वायरसों की भरमार हो जाती है, ऐसे में उसे पेट के विकार होने की आशंका बढ़ जाती है. शोध में नवजात शिशु के मल की जांच करने पर पाया गया कि शुरू में उसके पेट में कोई वायरस नहीं पाए गए, लेकिन एक महीने की ही उम्र में उसमें करीब 10 करोड़ वायरस प्रति ग्राम पाए गए. इस तरह की संख्या इंसानों में जिंदगी भर रहती है.

क्या मदद मिलेगी शोध से
 इसके अलावा शोध इसमें भी मददगार होगा कि कैसे बच्चे पैदा के बाद जल्दी ही होने वाले पेट के विकारों से बच सकेंगे. इस अध्ययन में शामिल रहे अमेरिका के पेनसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता फ्रेड्रिक बुशमैन ने कहा, “इन नतीजों से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि क्यों कुछ बच्चे बीमार पड़ते हैं और एक ही महीने के अंदर ऐसे संमक्रण तक अपना लेते हैं जिनसे उनकी जिंदगी खतरे में पड़ जाती है.

कैसे बनने लगते हैं वायरस
शिशुओं की आंत में पहले जमा होने वाले बैक्टीरिया में ही जानलेवा वायरस की कॉलोनी बन जाती है. इसके बाद चार महीने की उम्र में वायरस इंसान की कोशिका में बढ़ने लगते हैं और उसे बीमार कर देते हैं, लेकिन स्तनपान से उनमें बचाव के लक्षण भी दिखने लगते हैं जिससे कि ये जानलेवा वायरस जमा नहीं हो पाते हैं.

एक माह की उम्र के बाद से हमारे शरीर में वायरस बढ़ना शुरू हो जात हैं.


वातावरण भी पैदा कर सकता है अंतर
 शोध में यह भी पाया गया का शिशुओं का स्थान भी इस मामले में अहम है.  उन्होंने पाया कि यह शिशु और उनकी माता के वातावरण पर भी निर्भर करता है. उनका अनुमान है कि शायद इस वजह से उनके संक्रमण में विविधता हुई होगी.

कई वायरस तो मानव शरीर में रहते है जीवन भर
वैज्ञानिकों के लिए इंसान के अंदर पहले से ही मौजूद बड़ी संख्या में वायरस, जिन्हें ह्यूमन वायरोम (human Virome) कहते हैं, हमेशा ही शोध का विषय रहे हैं. ज्यादातर तो ये आंतों में होते हैं, लेकिन ये शरीर के दूसरे अंगों मे भी होते हैं. और जीवन भर शरीर के अंदर रहते हैं.

स्तनपान की अहमित पहले ही बताई जा रही है
उल्लेखनीय है कि आज दुनिया के तमाम विशेषज्ञ स्तनपान की अहमित को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह देते हैं. उनका एकमत से मानना कि नवजात शिशु के लिए स्तनपान का कोई विकल्प नहीं हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ जैसी संस्थाएं भी स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए अभीयान चलाते हैं. यह भी काफी पुरानी मान्यता कई देशों में प्रचलित है कि स्तनपान शिशु को ज्यादा स्वस्थ रखता है. ताजा शोध भी इसी का समर्थन करता है.

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