• Home
  • »
  • News
  • »
  • knowledge
  • »
  • Explained: ब्रिटेन से भारत पहुंचा कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है?

Explained: ब्रिटेन से भारत पहुंचा कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन कितना खतरनाक है?

कोरोना के नए स्‍ट्रेन के चार और मरीज भारत में मिले हैं.

कोरोना के नए स्‍ट्रेन के चार और मरीज भारत में मिले हैं.

दक्षिण ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस का नया रूप (coronavirus new variant in India) अब भारत में भी सेंध लगा चुका. बेहद तेजी से फैलने वाले इस प्रकार को लेकर फिलहाल खुद वैज्ञानिक भी परेशान हैं.

  • Share this:
    ब्रिटेन में हड़कंप मचा रहे कोरोना वायरस का नया रूप अब हमारे यहां पहुंच चुका है. लगभग 70% तेजी से फैलने वाला ये बदला हुआ वायरस 6 लोगों में मिला है, जो हाल ही में ब्रिटेन से लौटे थे. बता दें कि वायरस में सालभर के भीतर 23 बार म्यूटेशन हुआ लेकिन ये प्रकार वैज्ञानिकों को डरा रहा है. अब चूंकि ये देश तक आ चुका, इसलिए इसके बारे में जानने और सावधान रहने की जरूरत है.

    वायरस वेरिएंट क्या है और नए प्रकार को लेकर क्यों मची खलबली?
    वायरस जब होट्स कोशिका के भीतर अपनी संख्या बढ़ाता है तो वायरस के स्वरूप में बदलाव होता है. यही म्यूटेशन है. ये वायरस में कॉमन है. वायरस की कॉपीज बनने की प्रक्रिया में कभी-कभी गड़बड़ी आ जाती है. दूसरे वायरस पैदा करने के दौरान अगली पीढ़ी के लिए मूल जेनेटिक मटेरियल या कहें, कोड ट्रांसफर करने में गलती हो जाती है. ऐसे में जो नया वारयस पैदा होता है उसमें जेनेटिक कोड अपनी पूर्व पीढ़ी से अलग होता है. नतीजतन नया वायरस अपने वंश के वायरस के लक्षणों से अलग लक्षणों वाला होता है.



    ये भी पढ़ें: कौन हैं अयोध्या में बनने वाली मस्जिद के आर्किटेक्ट प्रोफेसर अख्तर? 

    ब्रिटेन में जो स्ट्रेन मिला है, वो मूल जेनेटिक मटेरियल के साथ तो है, साथ ही ज्यादा मजबूत है. ये वायरस तेजी से फैलता है. कम के कम फिलहाल तो ब्रिटेन के मामले में यही दिख रहा है.

    कोरोना वायरस शुरुआत से अब तक 23 बार म्यूटेशन की प्रक्रिया से गुजर चुका है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    वायरस का नया रूप कब मिला और इसमें डर की क्या बात है?
    वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक नया प्रकार दक्षिणपूर्व ब्रिटेन में दिखा. दिसंबर में जब इस हिस्से में कोरोना के मामले तेजी से बढ़े, तब वैज्ञानिकों की इस बात पर नजर गई. पता चला कि नया वायरस मरीजों में सितंबर से ही सक्रिय था.

    नए वायरस को स्टडी कर रहे वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना वायरस शुरुआत से अब तक 23 बार म्यूटेशन की प्रक्रिया से गुजर चुका है. बीच के काफी सारे म्यूटेशन में वायरस खतरनाक नहीं हुआ, वहीं ये नया प्रकार संक्रमण की दृष्टि से काफी घातक माना जा रहा है.

    ये भी पढ़ें: क्या चंद्रमा से China अपने साथ एलियन वायरस लेकर आया है?  

    नए कोरोना वायरस में कांटेदार संरचना 8 बार म्यूटेशन से गुजरकर 8 गुनी ज्यादा कांटेदार हो चुकी है. नए वायरस में जो कांटेदार संरचना ज्यादा होती है, उसके जरिए वो शरीर में और आसानी से घुस जाता है. कोरोना की यह कांटेदार संरचना ही उसे हमारे लिए ज्यादा घातक बना चुकी है. इसी लाइन को लेकर दुनिया के तमाम वैज्ञानिकों ने वैक्सीन तैयार की, जो कोरोना की कांटेदार संरचना पर वार करके उसे हमारे शरीर की कोशिकाओं से जुड़ने से रोक सके.

    नया प्रकार मूल वायरस से 50 से 70 प्रतिशत तक ज्यादा तेजी से फैलता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    तो क्या वायरस का नया प्रकार ज्यादा संक्रामक है?
    हां, ऐसा लग रहा है. इस बारे में मिले शुरुआती डाटा इसी तरफ इशारा करते हैं. कुछ ही हफ्तों में नए रूप ने पुराने रूप को रिप्लेस कर दिया और नए आ रहे 60 प्रतिशत मामले इसी वायरस की देन हैं. इंपीरियल कॉलेज लंदन के हेल्थ एक्सपर्ट मान रहे हैं कि म्यूटेशन से गुजरा ये नया प्रकार मूल वायरस से 50 से 70 प्रतिशत तक ज्यादा तेजी से फैलता है. हालांकि अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है.

    क्या नया रूप लोगों को गंभीर तौर पर बीमार कर रहा है, या जानलेवा हो रहा है?
    इस बारे में फिलहाल ज्यादा नहीं पता और रिसर्च की जानी बाकी है. एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल के पूर्व वैज्ञानिक Dr. Philip Landrigan ने ये बात कही. दूसरी ओर वायरस का नया रूप लोगों को ज्यादा गंभीर तौर पर बीमार कर सकता है, ये मानने के भी कारण हैं. दक्षिण अफ्रीका में इसी वायरस के कारण बीमार लोगों में वायरस लोड ज्यादा दिखा. यानी शरीर में वायरस तेजी से बढ़ रहा है, जो कमजोर इम्युनिटी वालों को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है.

    क्या नया प्रकार भारत में भी मिल चुका है? इसे फैलने से रोकने के लिए क्या उपाय अपनाए जा रहे हैं?
    भारत में फिलहाल ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई है. हालांकि वायरस तेजी से कई देशों में जा चुका है, जैसे ब्रिटेन के अलावा ये डेनमार्क, बेल्जियम, नीदरलैंड्स और ऑस्ट्रेलिया में भी दिख चुका. दक्षिण अफ्रीका में मिलता-जुलता रूप दिखा है. अब चूंकि इस वेरिएंट के बारे में देश जानते हैं तो हो सकता है कि नए मामले पता चलें.

    फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि वैक्सीन नए वेरिएंट पर भी उतनी ही प्रभावी हो- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    भारत सरकार ने सोमवार को ब्रिटेन के लिए फ्लाइट्स सस्पेंड कर दीं, जो फिलहाल साल के अंत तक जारी रहेगा. अलग-अलग राज्य भी इस नए रूप को देखते हुए अलग कदम उठा रहे हैं. महाराष्ट्र में रात 11 से सुबह 6 बजे तक का कर्फ्यू लगाया जा चुका है, जो 5 जनवरी तक लागू रहेगा. यूरोप और मिडिल ईस्ट से आने वाले सारे लोगों को अस्पतालों में क्वारंटाइन किया जा रहा है.

    तो क्या वायरस के नए रूप पर वैक्सीन बेअसर हो जाएगी?
    फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि वैक्सीन नए वेरिएंट पर भी उतनी ही प्रभावी हो. हालांकि इस बारे में भी अभी कुछ पक्का नहीं और वैज्ञानिक इसे समझने की प्रक्रिया में हैं. मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन, इस फॉर्मूला पर काम करती हैं कि वे सीधे वायरस की कांटेदार संरचना पर वार करती हैं.



    ये भी पढ़ें: Explained: क्यों महिलाओं को नौकरी पर रखने के कारण पेरिस पर लगा जुर्माना? 

    वैक्सीन हमारे भीतर एंटीबॉडी बनाती है. ऐसे में अगर वायरस हमपर अटैक करता है तो एंटीबॉडी उसकी कांटेदार संरचना पर चिपक जाती है और वायरस हमारी कोशिकाओं के भीतर नहीं पहुंच पाता. अब अगर म्यूटेशन के कारण वायरस की कांटेदार संरचना का आकार बदल जाए तो एंटीबॉडी उससे उतनी मजबूती से नहीं जुड़ पाएगी. ऐसे में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन
    विज्ञापन

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज