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ब्रिटेन चुनाव में क्यों छाया है हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान का मुद्दा

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Updated: December 11, 2019, 1:45 PM IST
ब्रिटेन चुनाव में क्यों छाया है हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान का मुद्दा
ब्रिटेन के चुनाव में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को लुभाने की खूब कोशिश हुई

ब्रिटेन में हो रहे इस बार के चुनाव में भारतीय (Indian) और पाकिस्तानी (Pakistani) मूल के लोग अहम भूमिका निभा सकते हैं. पहले खासतौर पर दक्षिण एशियाई (South Asian) मूल के लोगों को लेबर पार्टी का समर्थक माना जाता था. लेकिन इस बार स्थितियां बदल गई हैं..

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  • Last Updated: December 11, 2019, 1:45 PM IST
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ब्रिटेन के चुनाव (Britain Election) में हिंदी, हिंदू और हिंदुस्तान का मुद्दा छाया हुआ है. ब्रिटेन में गुरुवार को चुनाव होने हैं. शुक्रवार को चुनाव के नतीजे आएंगे. इस बार के चुनाव में वहां की दोनों पार्टियां भारतीय मूल (Indian Origin) के लोगों का लुभाने में जुटी हैं. चुनाव प्रचार के दौरान जालियांवाला बाग कांड से लेकर कश्मीर मुद्दा छाया रहा है.

हाल ही में बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) को लेकर एक हिंदी गाना भी वायरल हुआ है. गाने को कंजर्वेटिव पार्टी में भारतीय मूल के उम्मीदवार शैलेश वारा ने ट्वीट करके जारी किया. गाने में बोरिस जॉनसन को जिताने की अपील की जा रही है. साथ ही इसमें लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन के विरोध में भी बातें की गई हैं.

गाने के बोल हैं- जागो, जागो, जागो... चुनाव फिर से आया है... बोरिस को हमें जिताना है... इस देश को हमें दिखाना है... कुछ करके हमें दिखाना है. गाने के वीडियो में बोरिस जॉनसन के साथ प्रधानमंत्री मोदी को भी दिखाया गया है. इस गाने के जरिए मोदी के प्रशंसक और भारतीय मूल के लोगों को लुभाने की कोशिश की जा रही है. इस वीडियो पर लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया आई हैं.



चुनाव में भारतीय मूल के लोगों की अहम भूमिका
इस बार के चुनाव में भारतीय और पाकिस्तानी मूल के लोग अहम भूमिका निभा सकते हैं. पहले खासतौर पर दक्षिण एशियाई मूल के लोगों को लेबर पार्टी का समर्थक माना जाता था. लेकिन इस बार स्थितियां बदल गई हैं. भारतीय मूल के लोग जहां कंजर्वेटिव पार्टी का समर्थन कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तानी मूल के लोग लेबर पार्टी के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं.

लेबर पार्टी ने दक्षिण एशियाई लोगों को लुभाने के लिए चुनावी घोषणापत्र में वादा किया है कि अगर वो सत्ता में आई तो जालियांवाला बाग कांड के लिए ब्रिटेन सरकार उनसे माफी मांगेगी. इसके साथ ही उसने वादा किया है कि ब्रिटेन के स्कूलों में ब्रिटिश राज में हुए अत्याचारों की पढ़ाई को भी शामिल किया जाएगा.

कहा जा रहा है कि दक्षिण एशियाई लोगों के बीच अपना जनाधार खिसकता देखकर लेबर पार्टी ने ऐसे वादे किए हैं. लेकिन कश्मीर के मुद्दे पर लेबर पार्टी ने भारतीय मूल के लोगों की नाराजगी मोल ले ली है.

britain election why hindi hindu and hindustan is issue in boris johnson campaign
प्रधानमंत्री मोदी के साथ बोरिस जॉनसन


कश्मीर मसले पर लेबर पार्टी के स्टैंड से नाराज हैं भारतीय मूल के लोग
लेबर पार्टी ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खात्मे का विरोध किया था. जबकि कंजर्वेटिव पार्टी की ओर से इस बारे में कहा गया था कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 का हटना, उनका आंतरिक मसला है. इस मसले को उन्हीं पर छोड़ना चाहिए. कंजर्वेटिव पार्टी के इस स्टैंड के बाद भारतीय मूल के लोगों का झुकाव उसकी ओर बढ़ा है. वहीं इसके बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों का झुकाव लेबर पार्टी की तरफ हुआ है.

पिछले हफ्ते बोरिस जॉनसन लंदन के स्वामी नारायण मंदिर में गए थे. उनके साथ उनकी पार्टनर कैरी सेमंड्स भी थीं. कैरी सेमंड्स ने भारतीयों को प्रभावित करने के लिए साड़ी पहनी थी. इस मौके पर बोरिस जॉनसन ने कहा था कि 'मैं जानता हूं कि प्रधानमंत्री मोदी एक नए भारत का निर्माण कर रहे हैं. हम यूके में रहते हुए उन्हें पूरा समर्थन दे रहे हैं. यूके में किसी भी तरह के नस्लवाद और एंटी इंडिया सेंटीमेंट को जगह नहीं मिलेगी.'

बोरिस जॉनसन ने जुलाई में सत्ता में आते ही भारतीय मूल के तीन लोगों- प्रीति पटेल, आलोक शर्मा और ऋषि सुनक को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी. इसके बाद बोरिस जॉनसन के भारत के कनेक्शन को लेकर कई खबरें सामने आईं थीं.

भारतीय मूल के लोगों की चुनाव में हिस्सेदारी
2011 की जनगणना के मुताबिक ब्रिटेन की आबादी 6 करोड़ है. इसमें करीब 2.5 फीसदी भारतीय हैं. एक आंकड़े के मुताबिक भारतीय मूल के 15 लाख लोग ब्रिटेन में रहते हैं. इसमें 5 लाख सिख, 3 लाख भारतीय मुस्लिम और एक लाख से अधिक दक्षिण भारतीय हैं.

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प्रधानमंत्री मोदी के साथ बोरिस जॉनसन


बताया जाता है कि हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेशी मूल के करीब 30 लाख लोग ब्रिटेन की संसद की 48 सीटों पर असर डालते हैं. इस बार हिंदुओं के वोट कंजर्वेटिव पार्टी की तरफ जाने की बात कही जा रही है. सिखों के बारे में कहा जा रहा है कि ये हमेशा से लेबर पार्टी के साथ रहे हैं. इस बार भी वो लेबर पार्टी का साथ दे सकते हैं.

गुजरात से ताल्लुक रखने वाले भारतीय मूल के मुसलमानों को छोड़कर ज्यादातर का झुकाव लेबर पार्टी की तरफ है. दक्षिण भारत से ताल्लुक रखने वाले लोगों का वोट बंटने की आशंका जाहिर की जा रही है.

पिछले चुनाव में दक्षिण एशियाई मूल के 12 उम्मीदवार चुनाव जीते थे. इसमें लेबर पार्टी के 7 और कंजर्वेटिव पार्टी के 5 उम्मीदवार विजयी हुए थे.

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First published: December 11, 2019, 1:16 PM IST
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