अंतरिक्ष स्पर्धा में ब्रिटेन भी रखने जा रहा है कदम, जानिए क्या है वजह

ब्रिटेन (Britain) पिछले कुछ सालों से अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) में अपनी उपस्थिति के लिए काम कर रहा है. (तस्वीर: Pixabay)
ब्रिटेन (Britain) पिछले कुछ सालों से अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) में अपनी उपस्थिति के लिए काम कर रहा है. (तस्वीर: Pixabay)

ब्रिटेन (Britain) अंतरिक्ष संबंधी सेवाओं (Space Servicies) के लिए दूसरे देशों पर पूरी तरह से निर्भर है, अब वह आत्मनिर्भर होना चाहता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 11:21 PM IST
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इस समय दुनिया का ध्यान कोरोना वायरस (Corona Virus) से पैदा हुए संकट पर है. ब्रिटेन (Britain) में कोरोना के बाद अगर किसी बात की चर्चा होती है तो वह ब्रेक्जिट (Brexit) है, लेकिन इस देश में इसके अलावा भी बहुत कुछ हो रहा है. अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Exploration) के क्षेत्र में अब ब्रिटेन (Britain) भी कदम रखने जा रहा है. अब तक केवल एक ही खुद का सैटेलाइट प्रक्षेपण करवाने वाला ब्रिटेन इस क्षेत्र में दूसरे देशों पर पूरी तरह से निर्भर है, लेकिन अब ब्रिटेन कुछ खास वजहों से अंतरिक्ष प्रक्षेपण (Space launch) में उतरने की तैयारी हैं.

ब्रेक्जिट के बीच
ब्रेक्जिट को लेकर ब्रिटेन में लंबे समय से तनातनी चल रही है. अब तक यूरोपीय यूनियन का हिस्सा का हिस्सा रहा ब्रिटेन यूरोपीय स्पेस एजेंसी के तहत कार्य और अनुसंधान में शामिल था, लेकिन अब ब्रिटेन अंतरिक्ष अनुसंधान में अपनी उपस्थिति दर्ज करने की तैयारी में हैं.

छह साल से चल रहा है ये काम
ब्रिटेन में इस दिशा में छह साल से काम  चल रहा है. न्यूयॉर्क टाइम्स  में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार नियोजन, अनुदान जमा करना और 2.8 करोड़ की लगात से न्यूक्वे में अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल का निर्माण यह सारे काम हो रहे हैं.



निजी क्षेत्र की भी भागीदारी
इस कार्य में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल है. इसमें प्रमुख भूमिका रिचर्ड ब्रैनसन की वर्जिन यूनिवर्स की कंपनी वर्जिन ऑर्बिट की है. उसका काम अंतरिक्ष की कक्षा में उपग्रह वायुयानों के द्वारा स्थापित किए जाएंगे. कंपनी का कहना है कि धरती से छोड़े गए रॉकेट के बजाए वायुयानों से उपग्रह प्रेक्षित करना ज्याता तेज आसान, और कम खर्चीला होगा. इसके लिए यूके स्पेस एजेंसी की सहायता से परीक्षण भी चल रहे हैं.

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ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन (Boris Johnson) ने हाल ही में अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector) में निवेश बढ़ाया है.


निवेश में बढ़ोत्तरी
स्पेसपोर्ट कॉर्न के हेड ऑफ एंगेजमेंट और डिवेलपर मेलिसा थोर्पे का कहना है कि शुरु में लोग उन पर हंस रहे थे. उन्हें मनाने में काफी काम करना पड़ा. ब्रिटेन हमेशा से जोखिम भरे इस क्षेत्र में अब दोगुना निवेश करने जा रहा है. कॉर्नवाल के अलावा सरकार दूसरी जगहों पर भी निवेश कर रही है जहां से प्रक्षेपण संभव हैं. अब तक ब्रिटेन की अंतरिक्ष प्रक्षेपण में कोई भूमिका नहीं थी. कई विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए पहले ही बहुत जगह सुविधाएं हैं जिसमें अमेरिका भी शामिल है. बल्कि ब्रिटेन का निर्मित एकमात्र सैटेलाइट साल 1971 में ऑस्ट्रेलिया से प्रक्षेपित किया गया था.

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ब्रेक्जिट ने बदला काफी कुछ
लेकिन इसके बाद अब ब्रेक्जिट ने काफी कुछ बदल दिया. यूरोपीय यूनियन से हटने के बाद यह ज्यादा महसूस किया जाने लगा कि ब्रिटेन सैटेलाइट नेवीगेशन, जैसी सेवाओं के लिए यूरोपीय और अमेरिकी अंतरिक्ष कार्यक्रमों पर कितना निर्भर है. अब उसकी खुद की अंतरिक्ष अधोसंरचना का न होना एक बड़ा जोखिम बनता जा रहा है. इस बार के ब्रिटेन बजट में यूके स्पेस एजेंसी में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी का प्रावधान किया गया है.



समय का संयोग
ब्रिटेन का यह प्रयास ऐसे समय में परवान चढ़ रहा है जब निजी क्षेत्र ने मजबूती से अंतरिक्ष प्रक्षेपण और संबंधित क्षेत्रों में कदम रखा है. इसें एलोन मस्क, जेफ बेजोस और ब्रैन्सन जैसे बड़े नामों के साथ छोटे व्यवसायी भी मैदान में हैं.

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ब्रिटेन (Britain) के इस कदम में ब्रेक्जिट (Brexit) की अहम भूमिका थी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)


छोटे और सस्ते सैटेलाइट
यहां छोटे और सस्ते सैटेलाइट का उदय बहुत अहम है जो आकार में एक जूते के डिब्बे तक के होते हैं और उनकी कीमत भी करीब 10 लाख डॉलर या उससे कम होती है. इनमें से कई अवलोकन के लिए होते हैं तो कुछ इंटरनेट कनेक्शन के लिए होते हैं. करीब 9 करोड़ डॉलर के अंतरिक्ष निधि का प्रबंधन करने वाली लंदन की सेराफिम कैप्टिल के प्रमुख कार्यकारी मार्क बोगेट का मानना है कि यह ब्रिटेन की बिलकुल सही शुरुआत है.

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बोरिस जानसन सरकार ने वन वेब नाम की सैटेलाइट ऑपरेटर कंपनी का 45 प्रतिशत हिस्सा अधिग्रहित किया है जो ब्रिटेन के लिए भविष्य के सैटेलाइट बनाएगी. तमाम जोखिमों के रहते ब्रिटेन और वहां की कंपनियों का प्रमुख लक्ष्य छोटे सैटेलाइट्स होंगे जो किफायती भी होते हैं जिसके लिए ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से मुफीद है.
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