पारले के बाद अब ब्रिटानिया, बिस्किट कंपनियों को क्यों झेलनी पड़ रही है मंदी की मार?

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Updated: August 23, 2019, 9:39 AM IST
पारले के बाद अब ब्रिटानिया, बिस्किट कंपनियों को क्यों झेलनी पड़ रही है मंदी की मार?
बिस्किट कंपनियां मंदी से जूझ रही हैं

पारले (Parle) के बाद देश की मशहूर बिस्किट कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) संकट में है. कंपनी ने अपने बिस्किट के दाम बढ़ाने का ऐलान किया है. आखिर बिस्किट कंपनियों को क्यों मंदी की मार झेलनी पड़ रही है...

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देश की बिस्किट कंपनियां (Biscuit companies) मुश्किल में हैं. आर्थिक मंदी ने ऑटो सेक्टर (Auto sector) के बाद बिस्किट कंपनियों की हालत खस्ता कर रखी है. पहले खबर आई कि बिस्किट कंपनी पारले (Parle) अपने 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है. पारले अपनी खर्चों में कटौती के नाम पर लोगों को नौकरियों से निकाल रही है. अब खबर है कि देश की मशहूर बिस्किट कंपनी ब्रिटानिया (Britannia) अपने बिस्किट के दाम बढ़ाने जा रही है. कंपनी ने अपने खर्चों में कटौती का ऐलान भी किया है.

ब्रिटानियां इंडस्ट्रीज की तरफ से कहा गया है कि कंपनी अक्टूबर से अपने बिस्किट के दाम बढ़ाने जा रही है. इसके पीछे पिछले पांच-छह महीने की आर्थिक सुस्ती बताई जा रही है. कंपनी ने कहा है कि उद्योग जगत सुस्त है और पिछले 5-6 महीनों में आर्थिक नरमी रही है. अगले 5-6 महीने भी आसान नहीं रहने वाले हैं. इसलिए ब्रिटानियां ने अपने खर्चों में कटौती के साथ बिस्किट के दाम बढ़ाने जा रही है.

कंपनी के मुताबिक बिस्किट की बिक्री में गिरावट आई है. पिछले कुछ महीनों में बिक्री आधी रह गई है. हालांकि कंपनी को उम्मीद है कि उसे मॉनसून का फायदा मिलेगा.

पारले बिस्किट कंपनी से 10 हजार कर्मचारियों की छंटनी

वहीं पारले बिस्किट अपने 10 हजार कर्मचारियों को निकालने जा रही है. पारले ने इसके पीछे जीएसटी को जिम्मेदार ठहराया है. कंपनी के मुताबिक जीएसटी के बाद बिस्किट पर 18 फीसदी का टैक्स लग रहा है. जबकि जीएसटी के पहले 100 रुपए प्रति किलो से कम कीमत वाले बिस्किट पर 12 फीसदी टैक्स था. बिक्री में आई कमी की वजह से प्रोडक्शन कम हो रहा है और कंपनियों को अपने खर्चों में कटौती को मजबूर होना पड़ रहा है.

britannia parle why major biscuit companies facing recession
पारले के बाद अब ब्रिटानियां बिस्किट कंपनी भी मुश्किल में


पारले की तरफ से कहा गया है कि पिछले दिनों बिस्किट की डिमांड में जबरदस्त गिरावट आई है. ग्रोथ में करीब 8 फीसदी की कमी आई है. पारले के बिस्किट पारले जी, मोनैको, मारी और हाइड एंड सिक की बिस्किट के 10 हजार करोड़ के बाजार में अच्छी सेल रही है.
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7 देशों में बिकते हैं पारले के बिस्किट

पारले बिस्किट कंपनी को 1929 में शुरू किया गया था. उस वक्त करीब 1 लाख कर्मचारियों, जिसमें स्थायी और कॉन्ट्रैक्ट के कर्मचारी भी शामिल थे, से कंपनी शुरू की गई थी. कंपनी ने 125 मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट्स लगाए थे.

पारले के बिस्किट भारत समेत 7 देशों में बेची जाती है. इसमें कैमरून, नाइजीरिया, घाना, यूथोपिया, केन्या, आईवरी कोस्ट और नेपाल जैसे देश शामिल हैं. 2018 में पारले ने मैक्सिको में एक प्लांट की शुरूआत की. 2003 में पारले दुनिया की सबसे ज्यादा बिक्री वाली बिस्किट कंपनी बन गई थी.

बिस्किट कंपनियों पर क्यों आया संकट

बिस्किट कंपनियां पिछले कुछ महीनों से मुश्किल में हैं. ब्रिटानिया बिस्किट की तरफ से कहा गया है कि मार्केट की हालत इतनी खराब है कि 5 रुपए पैकेट वाले बिस्किट खरीदने से भी लोग हिचक रहे हैं. ये अर्थव्यवस्था की भयानक सुस्ती का संकेत है. ब्रिटानिया कंपनी का कहना है कि उन्हें 6 परसेंट की ग्रोथ की उम्मीद है जबकि बाजार की ग्रोथ इससे भी कम है. कंपनी की नेट प्रॉफिट में 3.5 फीसदी की गिरावट आई है. अप्रैल-जून 2019 में कंपनी 249 करोड़ का कारोबार कर पाई.

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ब्रिटानियां बढ़ाएंगी अपने बिस्किट के दाम


बिस्किट कंपनियों के मुताबिक उनकी बिक्री में गिरावट जीएसटी की वजह से आई है. 18 फीसदी जीएसटी लागू होने के बाद या तो उन्हें कीमतें बढानी थीं या फिर बिस्किट का वजन कम करना था. पारले के मुताबिक भारत का कंज्यूमर 5 रुपए के बिस्किट खरीदने में भी कीमत के साथ वजन आदि को देखता है.

जीएसटी के बाद बिस्किट कंपनियों का बुरा हाल

जीएसटी बढ़ाए जाने के बाद लागत कम रखने के लिए पारले ने 5 रुपए के बिस्किट के वजन को कम किया. पहले 5 रुपए में कंपनी 70 ग्राम बिस्किट दे रही थी. बाद में उसे कम करके 65 ग्राम कर दिया गया.

कंपनी का कहना है ब्रेड पर कोई टैक्स नहीं लगता. टोस्ट और रस्क पर 5 फीसदी टैक्स लगता है जबकि वो 150 रुपए किलो बिकती है. पारले के मुताबिक कम से कम सरकार को 100 रुपए किलो से कम वाले बिस्किट पर जीएसटी की दर कम करनी चाहिए.

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First published: August 23, 2019, 9:39 AM IST
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