वो ब्रिटिश वैज्ञानिक, जिसपर समलैंगिकता के कारण लगा अश्लीलता का आरोप, करनी पड़ी खुदकुशी

महान ब्रिटिश वैज्ञानिक और गणितज्ञ एलन टूरिंग

महान ब्रिटिश वैज्ञानिक और गणितज्ञ एलन टूरिंग

महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ एलन टूरिंग (Alan Turing) पर समलैंगिक (homosexuality) होने के कारण अश्लीलता का आरोप लगा. यहां तक कि उन्हें देश की सुरक्षा पर खतरा कहा गया. आखिरकार उन्होंने जहरबुझा सेब खा लिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 29, 2021, 3:29 PM IST
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हाल ही में बैंक ऑफ इंग्लैंड ने 50 पाउंड का नया नोट जारी किया है. इसकी खास बात ये है कि ये महान गणितज्ञ और कंप्यूटर साइंस के जानकार एलन टूरिंग को समर्पित है. माना जाता है कि इसी वैज्ञानिक के कारण दूसरा विश्व युद्ध जल्दी रोका जा सका था, वरना वो साल-दो साल लंबा खिंच सकता था. अब पहली बार एलन टूरिंग को वैश्विक मान्यता मिल सकी है.

क्यों छपी नोट पर टूरिंग की तस्वीर 

घोषणा के लगभग दो साल बाद 25 मार्च को 50 पाउंड का वो नोट छपा, जिसपर टूरिंग की तस्वीर नजर आ रही है. 23 जून से नया नोट बाजार में आ जाएगा. हालांकि हम नोट पर चर्चा नहीं कर रहे, बल्कि हम बात कर रहे हैं उसपर छपे चेहरे की. एलन टूरिंग ने महान गणितज्ञ होने के साथ-साथ दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन पनडुब्बियों को डिकोड किया था, जिससे ब्रिटिश सेना ने लगभग हार की कगार पर पहुंचने के बाद जीत हासिल कर ली और इस तरह से युद्ध विराम हो सका था.

समलैंगिकता के कारण दी जान 
बाद में विज्ञान की ख्यात पत्रिका साइंस मैगजीन ने टूरिंग को मशीन और आर्मी का सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्क भी कहा, हालांकि ज्यादातर लोग इस वैज्ञानिक के बारे में कम ही जानते हैं. यहां तक कि हालात इतने खराब हुए कि टूरिंग को खुदकुशी करनी पड़ गई. तब वे महज 41 साल के थे. दरअसल टूरिंग के बारे में कहा जाता था कि उनके अपने एक साथी से प्रेम-संबंध थे.

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साइंस मैगजीन ने एलन टूरिंग को मशीन और आर्मी का सर्वश्रेष्ठ मस्तिष्क कहा था


समलैंगिक लोगों को मिलती थी सजा



तब ब्रिटेन में समलैंगिकता एक अपराध था और समलैंगिक होने पर लोगों को सख्त सजा मिलती थी. इसे बीमारी माना जाता था और मान्यता थी कि समलैंगिक जोड़े अपने आसपास भी यही बीमारी फैलाते हैं. ये पचास के दशक की बात है. तब टूरिंग के बारे में भी वैज्ञानिक जगत में यही बात होने लगी. बात इतनी बढ़ी कि उन्हें नपुंसक बनाए जाने तक पहुंच गई. इसपर टूरिंग इतने परेशान हुए कि उन्होंने जहर खाकर आत्महत्या कर ली. 7 जून 1954 को टूरिंग की आत्महत्या के तुरंत बाद भी बड़े गणितज्ञ की मौत का कोई शोक नहीं मनाया गया, बल्कि चुप्पी छाई रही.

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किया था एनिग्मा को डिकोड 

टूरिंग ने वैसे तो कई आविष्कार किए लेकिन उनका सबसे बड़ा योगदान जर्मन सेना की पनडुब्बी एनिग्मा को डिकोड करना रहा. ये दूसरे विश्व युद्ध की बात है, जब नाजियों की बनाई एनिग्मा मशीन दुनियाभर में कहर बरपा रही थी. इस मशीन का जर्मन अफसरों ने दुश्मन देशों की सेना का भेद लेने के लिए इस्तेमाल किया था. साथ ही जर्मन सैन्य संदेशों को एनकोड करने के लिए भी सेना के भीतर इसका इस्तेमाल हुआ करता था.

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जर्मन सेना की पनडुब्बी एनिग्मा को डिकोड करने में दुनियाभर के वैज्ञानिक लगे थे


टूरिंग ही हो सके थे सफल 

नाजियों की बनाई हुई ये मशीन इतनी जटिल थी कि इसे तोड़ने के लिए दुनिया के कई देशों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया. खासकर दुश्मन राष्ट्र पोलैंड के गणितज्ञों ने इसे समझने की भरपूर कोशिश की थी. कुछ हद तक वे सफल भी हुए लेकिन नाजियों को इसकी भनक पड़ गई. उन्होंने न केवल उस वक्त कोड बदल दिया, बल्कि लगातार ही मशीन का कोड बदलने लगे. इसी समय आए ब्रिटिश गणितज्ञ एलन टूरिंग. उन्होंने एनिग्मा मशीन के कोड को क्रैक करने में सफलता पाई.

कोड क्रैक करना क्यों जरूरी था

दरअसल कोड लैंग्वेज को पकड़ने पर नाजियों की योजना का पता लगाया जा सकता था. उस दौरान जर्मन-यू-बोट्स ने तबाही मचा रखी थी. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इन्हीं कोड्स से लड़ाई करते हुए लगभग 2700 बोट्स समुद्र में डुबो दी गई थीं. मशीन डिकोड होने के बाद ही जर्मन सेना को तबाही मचाने से रोका जा सका.

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दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर के नेतृत्व में जर्मन सेना तबाही मचा रही थी- सांकेतिक फोटो (pixabay)


विश्व युद्ध खत्म होने के बाद टूरिंग मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में कंप्यूटिंग मशीन में डेपुटी डायरेक्टर बतौर काम करने लगे. इस दौरान भी वे लगातार नई खोजें करते रहे. जैसे उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को बनाने में पहली सफलता पाई. आज इसी एआई के दम पर सारी दुनिया के काम होते हैं.

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सेब में जहर मिलाकर खा लिया 

हालांकि हर महान शख्स को दुनिया का सम्मान नहीं मिल पाता है. टूरिंग के साथ भी यही हुआ. तब ब्रिटेन में समलैंगिकता जघन्य अपराध था. यहां तक कि बहुत से लोग सामाजिक अपमान और नपुंसकता की सजा के डर से अपनी पहचान छिपाकर रखते थे और यहां तक कि विपरीत लिंगी से शादी भी कर लेते थे ताकि किसी को पता न चले. लेकिन टूरिंग के साथ ऐसा नहीं हुआ. उनके समलैंगिक होने की बाद सबको पता चल गई और प्रतिष्ठा को चोट पहुंचने के डर से उन्होंने सायनाइड वाला सेब खा लिया.

पहली बार माफी मांगी गई

अगस्त 2009 में पहली बार ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने टूरिंग की खुदकुशी को देश का नुकसान बताते हुए औपचारिक तौर पर माफी मांगी. साल 2013 के दिसंबर में ब्रिटेन की महारानी ने भी टूरिंग पर समलैंगिकता के कारण लगी धाराएं हटाते हुए उन्हें दोषमुक्त कहा.
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