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चंद्रमा की धूल से होगा ऑक्सीजन का उत्पादन, ब्रिटिश इंजीनियर कर रहे तैयारी

चंद्रमा (Moon) पर ऑक्सीजन (Oxygen) पैदा करने के लिये यह ईएसए (ESA) की बड़ी योजना है.
चंद्रमा (Moon) पर ऑक्सीजन (Oxygen) पैदा करने के लिये यह ईएसए (ESA) की बड़ी योजना है.

ESA की टीम चंद्रमा (Moon) पर ही उसकी धूल (Dust) ऑक्सीजन (Oxygen) बनाने की प्रक्रिया विकसित करने पर काम कर रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 1:35 PM IST
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चंद्रमा (Moon) पर लंबे समय तक इंसान को ठहराने की दिशा में बहुत गंभीरता से काम हो रहा है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के अलावा दूसरे देशों की स्पेस एंजेसी भी इस दिशा में काम कर रही हैं. यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) ने हाल ही में इस सिलसिले में चल रहे शोध की जानकारी दी है. ईएसए के अनुसार ब्रिटिश इंजीनियर (British Engineers) एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जो चंद्रमा की धूल (Lunar Dust) से ऑक्सीजन (Oxygen) निकाल सकेगी. इस प्रक्रिया से निकलना वाली अतिरिक्त धातु (Metal) का उपयोग चंद्रमा पर 3 डी प्रिटिंग (3D Printing) के जरिए उपकरण (Equipment) बनाने के लिए काम में आ सकेगा.

बड़ी योजना है ये
यूरोपीय स्पेस एजेंसी के शोधकर्ता और ग्लासगोयूनिवर्सिटी की पीएचडी उम्मीदवार बेथ लोमैक्स और ईएसए की अन्यशोधकर्ता एलेक्जेंड्रे म्यूरिसे ने हाल ही में घोषणा की है यह ईएसए टीम की चंद्रमा की धूल रेगोलिथ को सांस लेने योग्य ऑक्सीजन बनाने की योजना है. रेगोलिथ चंद्रमा की वजह धूल है जिसमें 45 प्रतिशत ऑक्सीजन है इसके अलावा इसमें लोहा और टाइटेनियम भी हैं जिन्हें धातु के तौर पर उपयोग में लाया जाएगा.

कैसे बनेगी ऑक्सीजन
यह औद्योगिक प्रक्रिया यूके की कंपनी मेटलिसिस विकसित कर रही है. यह प्रक्रिया मेल्टन साल्ट हीट इलेक्ट्रोलिसिस कहलाती है. वैज्ञानिक इसमें सिम्यूलेटेड धूल और कैल्शियम क्लोराइड नमक को 950 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करेगें और इलेक्ट्रिक करेंट से ऑक्सीजन का उत्पादन करेंगे जिसमें धातु अयस्क अवशेष के रूप में बचेगा.



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शोध का उद्देश्य चंद्रमा (Moon) पर रह कर ही बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन (Oxygen) पैदा करना है


कितनी ऑक्सीजन पैदा होगी
यह प्रक्रिया 50 घंटे में 95 प्रतिशत ऑक्सीजन पैदा करेगी जिसमें 75 प्रतिशत हिस्सा केवल पहले 15 घंटे में  ही निकल जाएगा. ईएसए की रिलीज के मुताबिक खनिज उत्खनन की प्रक्रिया ब्रिटिश इंजीनियर पहले से ही धातु उत्पादन में उपोयग में ला रहे हैं. वहीं अमेरिका के फ्लोरिडा में नासा का केनेडी स्पेस सेंटर भी आधुनिक तकनीकों पर काम कर रहा है जिससे चंद्रमा की धूल पिघलाकर अंतरिक्ष के स्रोतों का उत्खनन किया जा सके. यह सब आर्टिमिस कार्यक्रम के तहत होगा.

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संयंत्र बनाने की तैयारी
ईएसए ने बताया है कि एक एक्स्ट्रा टेरिस्ट्रियल ऑक्सीजन उत्खनन संयंत्र चंद्रमा पर स्थापित किया जाएगा जिससे पृथ्वी से चंद्रमा पर सामान लेजाने के खर्चे में कटौती हो सके.  उत्खनन की गई ऑक्सीजन का उपयोग रॉकेट के ईंधन और भविष्य में चंद्रमा पर रहने वाले लोगों के सांसे लेने के लिए किया जाएगा. ईएसए के अनुसार यह प्रोजेक्ट ईएसए की चंद्रमा पर स्थायी उपस्थिति की तैयारी है.

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नासा भी चंद्रमा (Moon) पर ऑक्सीजन (Oxygen) के उत्पादन के लिए शोध कर रहा है. (तस्वीर: Pixabay)


वॉशिंग मशीन के आकार का चेम्बर
चंद्रमा पर ऑक्सीजन निकालने की  इलेक्ट्रोकेमिकल प्रक्रिया वैज्ञानिक एक वॉशिंग मशीन के आकार के चेंबर में करेंगे. फिलहाल मेटलिसिस इंजीनियर इस तकनीक को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं. ईएसए और ब्रिटेन की मेटलिसिस ने इंजिनियरों और वैज्ञानिकों को ऑक्सीजन उत्पादन पर निगरानी रखने वाले सिस्टम का विकास करने के लिए आमंत्रित किया है जिस पर पहले से ही काम चल रहा है. वहीं शोधकर्ता पृथ्वी की उत्खनन प्रक्रियाओं को अंतरिक्ष के लिए तैयार करने पर काम कर रहे हैं.

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चंद्रमा पर लंबे समय तक इंसान के रहने पर केवल नासा और ईएसए ही नहीं कर रहे हैं बल्कि चीन, यूएई और अन्य देश भी कर रहे हैं. भारत के इसरो की भी चंद्रमा को लेकर अपनी योजनाएं लेकिन फिलहाल चंद्रमा पर इंसान भेजने के बारे में इसरों का कोई कार्यक्रम नहीं हैं. लगभग सभी देश चंद्रमा को लेकर शोध को मंगल या सुदूर अंतरिक्ष अभियान की तैयारी के तौर पर देखते हैं.
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