इस देश में धधकते हुए ज्वालामुखी के ऊपर 700 सालों से हो रही है गणेश पूजा

इस देश में धधकते हुए ज्वालामुखी के ऊपर 700 सालों से हो रही है गणेश पूजा
स्थानीय लोगों का मानना है कि ये मूर्ति 700 सालों से वहां है, जो उनके पूर्वजों ने स्थापित की थी

इंडोनेशिया (Indonesia) में लगातार सुलगते हुए इस ज्वालामुखी (active volcano) के मुहाने पर गणेश जी का मंदिर (lord Ganesha temple) बना हुआ है, जहां हर साल 14 दिन गणपति पूजा होती है चाहे फिर ज्वालमुखी आग ही क्यों न उगल रहा हो.

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इंडोनेशिया (Indonesia) में मौजूद कुल 141 ज्वालामुखी हैं, जिनमें से 130 अब भी सक्रिय हैं यानी इनमें जब-तब विस्फोट होता रहता है. इन्हीं में से एक है माउंट ब्रोमो (Mount Bromo) पहाड़ पर बना ज्वालामुखी. दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों (active volcanoes) में से एक होने की वजह से इंडोनेशिया जाने वाले सैलानियों के लिए इसके बहुत से हिस्सों तक जाने की मनाही है, लेकिन ज्वालामुखी का खतरनाक होना भी यहां के लोगों को इसके मुहाने पर बने गणेश मंदिर (Ganesha temple) में जाने से रोक नहीं पाता. माना जाता है कि गणेश पूजा से ही वे अब तक सुरक्षित हैं.

माउंट ब्रोमो का मतलब स्थानीय जावानीज भाषा में ब्रह्मा से है. हालांकि यहां पर मंदिर गणेश का है. स्थानीय लोगों का मानना है कि ये मूर्ति 700 सालों से वहां है, जो उनके पूर्वजों ने स्थापित की थी. मान्यता के अनुसार यही गणेश मूर्ति अब तक जलते हुए ज्लावामुखी के पास होने के बाद भी उनकी रक्षा करती आ रही है. यही वजह है कि यहां के पूर्व में बसा एक जनजातीय समूह, जिसे Tenggerese नाम से जाना जाता है, गणेश जी की सदियों से पूजा करता आ रहा है. इस गणेश मंदिर को Pura Luhur Poten के नाम से जाना जाता है. मंदिर की विशेषता है कि यहां गणेश जी की अलग-अलग तरह की मूर्तियां हैं और सारी ही मूर्तियां ज्वालामुखी के जमे हुए लावे से बनी हुई हैं.

ज्वालामुखी का खतरनाक होना भी यहां के लोगों को इसके मुहाने पर बने गणेश मंदिर में जाने से रोक नहीं पाता (Photo-pixabay)




माउंट ब्रोमो के आसपास बने 30 गांवों में इस जनजाति के लगभग 1 लाख लोग रहते हैं. ये खुद को हिंदू मानते हैं और हिंदू ही रीति-रिवाज मानते हैं. हालांकि समय के साथ इनके रीति-रिवाजों में कुछ बुद्ध रिवाज भी जुड़ गए हैं. जैसे ये लोग त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की पूजा के साथ ही भगवान बुद्ध की पूजा भी करते हैं.



सारे रीति-रिवाजों के बीच एक खास पूजा का Tenggerese में काफी महत्व है. वे हर साल 14 दिनों के लिए माउंट ब्रोमो के मुहाने पर बने गणेश मंदिर में भगवान गणेश की पूजा करते हैं. इस पूजा को Yadnya Kasada पर्व कहते हैं. माना जाता है कि 13वीं से 14 सदी के बीच इस पूजा की शुरुआत हुई. इसके पीछे भी एक लोककथा है, जिसके अनुसार भगवान ने वहां के राज-रानी जो सालों तक निःसंतान थे, उन्हें 14 संतानें दीं, इस शर्त पर कि 25वीं और आखिरी संतान को वे पहाड़ को अर्पित कर देंगे. इसके बाद से हर साल पूजा और पशु बलि का सिलसिला चल पड़ा. अब भी यहां बकरियों की बलि दी जाती है.

साथ ही ज्वालामुखी के भीतर इस बलि के अलावा फल-फूल और मौसमी सब्जियां भी अर्पित की जाती हैं. मान्यता है कि गणेश जी की पूजा और सुलगते हुए ज्वालामुखी को फल अर्पित करना ही उसमें विस्फोट को रोकता है और अगर ऐसा न किया जाए तो ये समुदाय जलकर खत्म हो जाएगा.

माउंट ब्रोमो के आसपास बने 30 गांवों में इस जनजाति के लगभग 1 लाख लोग रहते हैं (Photo-pixabay)


इस जनजाति का एक अपना कैलेंडर है. इसी के अनुसार हर साल 14 दिनों की पूजा होती है. 14 दिवसीय इस उत्सव को Eksotika Bromo Festival कहा जाता है. इस त्योहार के दौरान पहाड़ पर बड़ा मेला लगता है जिसमें स्थानीय लोग कई तरह का आर्ट दिखाते हैं. यही वजह है कि ये पर्व विदेशी सैलानियों को भी खासा आकर्षित करता है. हालांकि लगातार सुलगते हुए ज्वालमुखी के कारण यहां का तापमान ज्यादा रहता है. इसी वजह से अगर किसी सैलानी को सांस लेने में दिक्कत या किसी और तरह की हेल्थ प्रॉब्लम हो तो उसे यहां आने की इजाजत नहीं मिलती है.

यहां पर पूजा के कई तरीके हिंदुओं से मिलते-जुलते हैं. जैसे हमारे यहां के मंदिर की पुजारी की तरह ही यहां भी पुजारी होते हैं, जिन्हें Resi Pujangga कहा जाता है. ये विधि-विधान पूरा करने में लोगों की मदद करते हैं. आगे चलकर पुजारी का बेटा ही पुजारी बनता है. बड़े उत्सव जैसे सालाना 14 दिनों तक चलने वाली गणेश पूजा में पुजारी के तीन सहयोगी होते हैं, जिन्हें Legen, Sepuh और Dandan से जाना जाता है.

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First published: June 6, 2020, 9:06 AM IST
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