लाइव टीवी

तब सदन में गिरे थे आंसू, अब साढे़ तीन साल मुस्कराएंगे येडियुरप्पा

News18Hindi
Updated: December 9, 2019, 5:54 PM IST
तब सदन में गिरे थे आंसू, अब साढे़ तीन साल मुस्कराएंगे येडियुरप्पा
2018 में येडियुरप्पा सदन में बहुमत न साबित कर पाने के बाद भावुक हो गए थे.

उपचुनाव (By Election) में जीत के साथ ही अब बीजेपी (BJP) की राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या 117 हो गई है. राज्य में बहुमत के लिए किसी पार्टी को 113 सीटों की आवश्यकता होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 9, 2019, 5:54 PM IST
  • Share this:
कर्नाटक (Karnataka) में 15 सीटों पर हुए उपचुनाव (By Election) के नतीजे आने के साथ ही राज्य में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्ण बहुमत (Full Majority) वाली सरकार बन गई है. मई 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर तो उभरी थी लेकिन वो बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रह गई थी. येडियुरप्पा सदन में बहुमत नहीं साबित कर पाए थे और बेहद भावुक होकर सदन में भाषण दिया था. इसके बाद कांग्रेस और जनता दल सेकुलर (जेडीएस) ने मिलकर सरकार बनाई थी. दोनों का गठबंधन नहीं निभा तो सरकार गिर गई और येडियुरप्पा इस साल जुलाई में फिर से मुख्यमंत्री बने. अब 6 दिसंबर को हुए उपचुनाव में उन्होंने पार्टी को सभी सीटों पर जीत दिलवाकर सदन की स्थिति काफी हद तक साफ कर दी है. अब येडियुरप्पा पूर्ण बहुमत के साथ सीएम की गद्दी पर आसीन हो गए हैं और अगले साढ़े तीन सालों तक सरकार चलाने का रास्ता साफ हो गया है.

अब क्या है कर्नाटक में सीटों की संख्या
उपचुनाव में जीत के साथ ही अब बीजेपी की राज्य विधानसभा में सीटों की संख्या 117 हो गई है. राज्य में बहुमत के लिए किसी पार्टी को 113 सीटों की आवश्यकता होती है. दूसरे नंबर की पार्टी कांग्रेस है जिसके पास 68 सीटे हैं. और तीसरे नंबर पर कुमारस्वामी की अगुआई वाली जनता दल सेकुलर है जिसकी संख्या 34 है. इसके साथ ही सदन में विधायकों की स्थिति को लेकर बना ऊहापोह भी समाप्त हो गया है.

नतीजे आने के थोड़ी ही देर बाद मुख्यमंत्री येडियुरप्पा ने कहा कि हम राज्य में लोकहित की नीतियां लागू करने की कोशिश करेंगे और स्थायी सरकार देने का प्रयास करेंगे. वहीं नतीजों में लगे झटके की वजह से कांग्रेस विधायक मंडल दल के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने पार्टी की हार की जिम्मेदारी लेते हुए यह कदम उठाया है.

कर्नाटक की विधानसभा में अब तस्वीर साफ हो गई है. अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है.
कर्नाटक की विधानसभा में अब तस्वीर साफ हो गई है. अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार है.


लिंगायत समुदाय के एकछत्र नेता बने येडियुरप्पा!
कहते है कि कर्नाटक की राजनीति में बीजेपी का कमल नहीं खिलता अगर येडियुरप्पा पार्टी में नहीं होते. कर्नाटक में पार्टी की सफलता मोटे तौर पर येडियुरप्पा के राजनीतिक दांवपेचों पर निर्भर करती है. राज्य की राजनीति में ताकतवर समुदाय के रूप में मशहूर लिंगायतों में उनकी तगड़ी पैठ है. इस चुनाव के नतीजे को लिंगायत समुदाय पर उनकी पकड़ को लेकर मुहर के तौर पर देखा जा रहा है.येडियुरप्पा शायद राज्य के राजनीतिक इतिहास में इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक सप्ताह के भीतर सदन में दो बार बहुमत साबित किया है. ऐसा उन्होंने करीब दस साल पहले किया था. अब राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ यह भी माना जा रहा है कि अगले साढ़े तीन सालों तक शांति के साथ सरकार चलेगी.

मुश्किल में कुमारस्वामी
2018 में कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने वाले कुमारस्वामी गठबंधन से इस कदर आजिज आ गए थे कि एक बार तो वो मंच पर ही भावनात्मक हो गए थे. दरअसल कांग्रेस के नेता सिद्धारमैया जेडीएस के साथ गठबंधन को लेकर खुश नहीं थे. वो नहीं चाहते थे कि राज्य में गठबंधन की सरकार बने और कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री का पद दिया जाए. लेकिन आलाकमान के आगे वो झुक गए और कुमारस्वामी के शपथग्रहण कार्यक्रम में कई पार्टियों के नेताओं के जुटकर केंद्र की बीजेपी सरकार को संदेश देने की कोशिश भी की थी. लेकिन कांग्रेस की भीतरी गुटबाजी की वजह से यह गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया. अब कुमारस्वामी की राजनीतिक स्थिति राज्य में तीसरे नंबर की पार्टी के नेता के तौर पर हो गई है.

सिद्धारमैया विपक्ष के नेता का पद बचाए रखने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.

सिद्धारमैया के दांव उल्टे पड़े
2018 के पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे सिद्धारमैया के राजनीतिक दांव एक के बाद एक गलत साबित हुए हैं. विधानसभा चुनाव के समय उन्हें पार्टी आलाकमान की तरफ से फ्री हैंड मिला लेकिन कांग्रेस की सीटें बुरी तरह कम हुईं. इसके बाद उनके न चाहने के बावजूद कुमारस्वामी राज्य के सीएम बने और फिर बाद में अलगाव हुआ. अब उपचुनाव को भी उनके लिए चैलेंज के तौर देखा जा रहा था. बगल के राज्य महाराष्ट्र से बंधी आशाओं की वजह से माना जा रहा था कि कर्नाटक में कांग्रेस अच्छी सीटें जीतेगी लेकिन एकदम उल्टा हुआ. अब इसकी जिम्मेदारी लेते हुए सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया है.

यह भी पढ़ें :-

#HumanStory: बेटी थी तो पिता ने छोड़ा, मां ने लड़ी 'पिता का नाम' हटाने की जंग
सेहत से जुड़ी इन जरूरी बातों का रखेंगे ख्याल तो सर्दी का मज़ा हो जाएगा दोगुना


 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: December 9, 2019, 5:24 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर