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सौरमंडल बनाने वाली धूल में मिले जीवन निर्माण करने वाले मूल तत्व

ग्रह निर्माण (Planet formation) करने वाले धूल के बादलों में ऐसे तत्वों का मिलना बहुत अहम माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ग्रह निर्माण (Planet formation) करने वाले धूल के बादलों में ऐसे तत्वों का मिलना बहुत अहम माना जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ग्रहों का निर्माण (Planet formation) करने वाले धूल के बादलों (Dust Clouds) के अंदर हमारे वैज्ञानिकों को जीवन का निर्माण करने वाले तत्व मिले हैं. यह खोज पृथ्वी (Earth) के बाहर जीवन की पड़ताल के लिहाज से बहुत अहम है.

  • News18Hindi
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    पृथ्वी (Earth) पर जीवन कैसे आया  इस पर हमारे वैज्ञानिक कई स्तर पर पड़ताल कर रहे हैं. इनमें से एक अंतरिक्ष जीवन निर्माण (Formation of Life) में सक्षम तत्वों का पैदा होने के हालात की खोज भी है. इसी खोज में हमारे खगोलभौतिकविदों को अंतरिक्ष के धूल वाले बदालों (Dust Clouds) में ऐसे अणुओं के होने के संकेत मिले हैं जो भविष्य में सौरमंडल का निर्माण कर सकते हैं जहां अन्य अनुकूल कारक होने पर जीवन पनप सकता है. यह खोज सुझाती है कि हमारी पृथ्वी कोई बहुत खास या अपवाद नहीं है क्योंकि दूसरे बहुत से अन्य संसारों में भी इसी तरह की जीवन निर्माण के तत्व (life-forming compounds) मौजूद हैं जैसे पृथ्वी पर  हैं.

    अंतरिक्ष में हैं जीवन के घटक
    लीड्स यूनिवर्सिटी के खगोलरसायनशास्त्री और इस शोध पर काम करने वाली कैथरीन वाल्श ने बताया कि इस कार्य के प्रमुख नतीजा दर्शाता है कि हमारे ग्रह पर जीवन को पनपाने वाले जो घटक थे वे दूसरे तारों में भी मिले हैं. यह संभव है कि पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत करने वाले अणु ग्रह निर्माण के वातावरण में भी आसानी से उपलब्ध हैं.

    50 साल से भी ज्यादा पुरानी पहेली
    तमाम विविधताओं के साथ पृथ्वी पर जीवन कुछ एक ही तरह के जैविक अणुओं और खनिजों से गुनगुने पानी में एक रेसिपी की तरह विकसित हुए हैं. इस हाइड्रोजन और नाइट्रोजन सहित कार्बन आधारित रसायन के सूप का आकार लेना एक पहेली रही है जिसे सुलझाने के लिए पिछले पांच दशकों से भी ज्यादा समय से शोधकर्ता उलझे हुए हैं.

    जीवन पूरी गैलेक्सी में
    हाल ही में खोजे से पता चला है कि पृथ्वी के पुरातन जैवरसायन की शुरुआत तारों के बीच की प्रक्रियाओं से हुई थी होगी या फिर यह सब उससे पहले भी शुरू हो सकती है. इससे वैज्ञानिकों को यह मानने में बहुत आसानी हो गई है कि जीवन हमारे गैलेक्सी में अपवाद के तौर नहीं बल्कि सामान्य तौर पर मौजूद हो सकता है.

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    शोधकर्ताओं ने पाया की पृथ्वी (Earth) पर जीवन के मूल घटक तारों, ग्रहों आदि बनाने वाले धूल के बादलो में भी होते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    जैविक घटकों की मौजूदगी कहां
    यूके की लीड्स यूनिवर्सिटी के खगोलभौतिकविद और इस अध्ययन की अगुआई करने वाले जॉन आइली ने बताया कि बहुत से वातावरण जहां उन्होंने इस तरह के जटिल जैविक अणु पाए हैं, वे वहां से हट गए या हटा दिए गए जहां हमें लगता है कि ग्रह बन सकते हैं. उन्होंने बताया की वे और उनकी टीम इस बात को समझना चाहती थी कि ये घटक ग्रहों के निर्माण वाली जगह, यानि प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क में कहां होते हैं.

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    प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क का अध्ययन
    आइली की टीम ने सुदूर धूल के बादलों और चट्टानों की स्थिति का पता लगाकर उनका नक्शा बनाने का प्रयास किया जहां जैवरसायन के कुछ प्रमुख शुरुआती घटक मौजूद हैं, जिससे नए सौरमंडल का निर्माण होता है. पृथ्वी से बहुत ही दूर स्थित प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क की पड़ताल पर निर्भर होना मुश्किल काम है. लेकिन शोधकर्ताओं की चुनी डिस्क का ऐसा कोण था जिससे पूरी डिस्क अच्छे से दिखाई दी.

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    शोधकर्ताओं ने तारों के पास की धूल (Dust) पर विशेष ध्यान दिया जहां ग्रह निर्माण सामग्री ज्यादा होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock

    विशेष यौगिक की पड़ताल
    शोधकर्ताओं ने चिली के आटाकाम लार्ज मिलीमीटर/सबमिलीमीटर ऐरे (ALMA) का उपयोग किया और जैविक अणुओं के स्पैक्ट्रल संकेतों की खोज में बुहत सारी प्रोटोप्लैनेटरी डिस्क का अध्ययन किया और मुख्य रूप से हाइड्रोजन साइनाइड की पड़ताल की जो कार्बन और नाइट्रोजन वाले जीवन संबंधी रसायनों का कारक स्रोत होता है.

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    शोधकर्ताओं ने पाया कि जीवन के लिए जरूरी रसायनों के कारक स्रोत पदार्थों के घनत्व और वितरण के अवलोकन से वे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि इन उभरते हुए सौरमंडलो  में जैविक पदार्थ के भंडार वैसे ही हैं जैसे हमारे सौरमंडल में हैं. एस्ट्रोफिजिकल जर्नल सप्लिमेंट सीरीज में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं का प्रमुख निष्कर्ष यही रहा कि पृथ्वी उतना विशेष ग्रह नहीं हैं जितना समझा जाता है.

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