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क्या चांद पर सब्जी उगा सकेगा चीन? चांद से मिले नमूने क्या बताते हैं?

अंतरिक्ष में खेती के लिए क्रिएटिव इमेज.
अंतरिक्ष में खेती के लिए क्रिएटिव इमेज.

जी हां, अंतरिक्ष में खेती (Growing in Space) कोई सपना नहीं रह गई है. लेकिन, चांद पर खेती (Plantation on Moon) की संभावना अभी सपने से कम भी नहीं ​है. पहले भी चांद पर खेती की कोशिश कर चुके चीन के नए महत्वाकांक्षी मून (Moon Mission) मिशन से क्या हाथ लगा?

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 22, 2020, 11:30 AM IST
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चीन ने अपने मून मिशन (Lunar Mission of China) से चांद की सतह से सैंपल धरती तक लाने में तो कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन क्या उसकी महत्वाकांक्षा पूरी हुई? चांद से मिट्टी के जो नमूने (Lunar Soil Samples) चीन जुटा पाया है, अब उसके बारे में स्टडी की जाएगी कि चांद की सतह पर किस तरह का काम किया जाना संभव है. माना जा रहा था कि चांद की सतह पर चीन खेती या बागबानी (Vegetation on Moon) करने की फिराक में रहा. अब जाना और समझा जाएगा कि चांद की सतह मनुष्यों के लिए क्या संभावनाएं रखती है.

चांग’ई-5 मिशन (Chang'e-5 Moon Mission) सफलतापूर्वक धरती पर पिछले दिनों लौटा तो चीन तीसरा देश बना, जो चांद की सतह से नमूने जुटा सका है. 44 साल पहले आखिरी बार रूस ने यह कारनामा किया था. उससे भी पहले 1960 के दशक में अमेरिका ने अपने स्पेस मिशन में यह कामयाबी हासिल की थी. अब सवाल यह है कि चीन को इन सैंपलों से क्या हासिल हुआ?

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क्या चांद पर खेती मुमकिन है?
फिलहाल तो ऐसे आसार नहीं हैं. धरती पर जिस तरह की मिट्टी है, उससे बिल्कुल उलट चांद की मिट्टी में ​किसी किस्म के ऑर्गेनिक पोषक तत्व नहीं मिले हैं और वो मिट्टी बहुत सूखी है. चीन के मीडिया में वैज्ञानिकों के हवाले से आईं खबरों के मुताबिक चांद की मिट्टी को सब्ज़ियां या आलू उगाने के लिहाज़ से अनुकूल नहीं पाया गया है.

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लेकिन इसका मतलब यह नहीं है इस मिट्टी का कोई और उपयोग या इसमें कोई और संभावना नहीं है. चूंकि चांद की मिट्टी में लंबे समय से सौर हवाओं के कारण हीलियम-3 की मात्रा अच्छी खासी है इसलिए इसका उपयोग क्लीन एर्जी के तौर पर थर्मोन्यूक्लियर फ्यूज़न के ज़रिये बिजली पैदा करने में किया जा सकता है.

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चीन के हालिया मून मिशन का लैंडर पिछले ही दिनों चांद की सतह पर उतरा था.


क्या स्पेस में खेती संभव है?
यह संभावना बहुत दूर की कौड़ी नहीं रह गई है. दिलचस्प बात तो यह है कि चीन का यह पहला प्रयास नहीं था कि उसने स्पेस में कुछ उगाने की मंशा और कोशिश की हो. जनवरी 2019 में जब चीन का चांग’ई-4 स्पेस क्राफ्ट चांद की सतह पर पहुंचा था, तब वह अपने साथ कॉटन सीड यानी कपाज के बीज लेकर गया था.

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चांद की जो सतह पृथ्वी की तरफ कभी नहीं आती, चांद के उस दूरदराज के इलाके में चांग’ई-4 मिशन उतरा था और उसने पृथ्वी जैसे वातावरण की संभावना चांद पर तलाशने के लिए खोज की थी. इस मिशन से चांद की बंजर ज़मीन पर खेती की एक संभावना को लेकर दुनिया काफी उत्साहित थी. हालांकि इस मिशन के एक हफ्ते बाद ही खबरें आई थीं कि चांद पर पहुंचाए गए सभी बीज मर गए थे.

चीन की इस कोशिश से यह इतिहास तो बना ही कि पहली बार चांद पर कोई जैविक पदार्थ भेजकर कुछ उगाने की कोशिश की गई. दूसरी तरफ, नासा ने स्पेस में खेती की शुरूआत करने का श्रेय अपने नाम किया है. हालांकि चांद नहीं, इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में उसने यह कारनामा किया है.

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स्पेस ब्रिक्स यानी चांद की सतह से मिले नमूनों से बनाई गई ईंट.


क्या है नासा का खेती सिस्टम?
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र में बनाए गए इस सिस्टम को 'वेजी' नाम दिया गया है, जो अंतरिक्ष में बहुत कम गुरुत्वाकर्षण यानी माइक्रोग्रैविटी की स्थिति में एस्ट्रोनॉट्स के लिए ताज़ा सब्ज़ियां उगाने की संभावना को समझने में मदद करने का प्रोजेक्ट है. इस वेजी का आकार एक सूटकेस के जितना है, जिसमें छह पौधे लगाए गए हैं.

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इन पौधों को ज़िंदा रखने और पनपने का वातावरण देने के लिए इनमें पानी, पोषण और हवा देने की व्यवस्था की गई है ताकि इनकी जड़ें पानी या हवा के अभाव में दम न तोड़ दें. बताया गया है कि ग्रैविटी न हो तो पौधे प्रकाश जैसे दूसरे फैक्टरों को अपने विकास के लिए इस्तेमाल कर लेते हैं इसलिए स्पेस में पौधों के पास प्रकाश का इंतज़ाम भी किया गया है.

अब तक वेजी गार्डन में तीन तरह के सलाद पत्ते, चाइनीज़ बंदगोभी, मिज़ूना सरसो, लाल रूसी केल और ज़ीनिया के फूल जैसे कुछ पौधे उगाए जाने में सफलता मिल चुकी है. अब दुनिया भर की नज़रें चीन के वैज्ञानिक शोधों पर हैं, जो चांद पर कुछ उगा पाने की संभावनाओं को समझाने में मददगार होगा.


खबरों की मानें तो चांद से मिले नमूनों को तीन भागों में बांटकर अलग-अलग मकसदों से उनका इस्तेमाल किया जाएगा. वैज्ञानिक रिसर्च के लिए लैब को एक भाग मिलेगा और बाकी दो भागों में से एक को लोगों की शिक्षा के लिए नेशनल म्यूज़ियम में रखा जाएगा, जबकि तीसरे भाग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर साझा किया जा सकेगा. अंतरिक्ष में चीन के साथ मिलकर रिसर्च कर रहे कुछ देशों को इसमें से कुछ हिस्सा तोहफे के तौर पर भी दिया जा सकता है.
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