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क्या चीन वाकई कर रहा है चंद्रमा पर कब्जा करने तैयारी?

चीन (China) की महत्वाकांक्षी चंद्र योजनाओं को लेकर नासा प्रमुख ने आशंकाएं जताई हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

चीन (China) की महत्वाकांक्षी चंद्र योजनाओं को लेकर नासा प्रमुख ने आशंकाएं जताई हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

नासा (NASA) के प्रमुख बिल नेल्सन ने हाल ही में कहा था कि यह चिंता का विषय है कि चीन (China) चंद्रमा (Moon) पर कब्जा कर ...अधिक पढ़ें

    पिछले कुछ सालों में हमें अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा (Space Race) के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे हैं जिसमें चीन (China) अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती देने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है. हाल ही में नासा (NASA) के प्रशासक बिल नेल्सन ने चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लक्ष्यों को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि इस तरह से चीन किसी दिन चंद्रमा पर अपना दावा कर दूसरे देशों को वहां अन्वेषण करने से रोक सकता है. लेकिन सवाल यही है कि क्या वाकई चीन ऐसा करना चाह रहा है और क्या वह ऐसा कर भी सकता है.

    क्या कहा नेल्सन ने

    हाल ही में जर्मन अखबार को दिए एक इंटरव्यू में नेल्सन ने चेताया, “हम इसकी बहुत चिंता होनी चाहिए कि चीन चांद पर उतर रहा है और कह रहा है कि ‘अब यह हमारा है और आप बाहर रहे.’ उल्लेखनीय है कि चीन ने इसका खंडन कर कहा  कि यह पूरी तरह से झूठ है. यह सब ऐसे समय पर हो रहा है जब दोनों ही देश अपने महत्वाकांक्षी चंद्रमा अभियानों पर काम कर रहे हैं.

    क्या है चीन का इरादा

    जहां अमेरिका के स्पेस एजेंसी नासा चंद्रमा पर दो लोगों को चंद्रमा पर लंबे समय तक भेजने अभियान पर काम कर रहा है. वहीं चीन ने 2019 को चंद्रमा के पिछले हिस्से पर यान उतारा, उसी साल चीन और रूस ने मिल कर ऐलान किया कि दोनों देश 2026 तक चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचेंगे. साथ ही कुछ चीनी अधिकारी और सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक चीन साल 2027 तक एक स्थाई और अंतरराष्ट्रीय सदस्यों वाला इंटरनेशनल लूनार रिसर्च स्टेशन बनाएगा.

    क्या है चीन की मंशा

    लेकिन क्या चीन चंद्रमा पर अपना जो बेस बनाने की योजना में लगा हुआ है,  उसका मकसद चंद्रमा पर कब्जा करना है? इस सवाल पर कंवरशेसन में प्रकाशित लेख में दो विशेषज्ञों ने विचार किया है जो अंतरिक्ष सुरक्षा और चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम पर काम कर रहे हैं. उनका मानना है कि ना तो चीन और ना ही कोई दूसरा देश चंद्रमा पर कब्जा कर सकता है.  ना तो यह कानूनी है और ना ही तकनीकी रूप से फायदे या कम नुकसान का सौदा क्योंकि इसमें खर्चा तो बहुत होगा ही , साथ ही इसके नतीजे फायदेमंद होंगे या नहीं यह भी निश्चित नहीं है.

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    चीन (China) और अमेरिका दोनों ही चंद्रमा के लिए बड़े अभियान पर काम कर रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    अंतरराष्ट्रीय कानून

    चीन अंतरराष्ट्रीय रूप से अंतरिक्ष कानूनों से बंधा हुआ है. उसने 1967 में बाह्य अंतरिक्ष संधि पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें 134 देशों के साथ वह भी शामिल था. इसकी दूसरी धारा के मुताबिक बाह्य अंतरिक्ष (जिसमें चंद्रमा और दूसरे खगोलीय पिंड भी शामिल है) में किसी भी देश के अधिकार की दावेदारी उसके उपयोग या फिर किसी और कारण से नहीं की जा सकती है. इस लिहाज से यदि चीन ने चंद्रमा पर कब्जा करने की कोशिश की तो उससे अंतराष्ट्रीय स्तर इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है. लेकिन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ही जाने वाला चीन अकेला देश ही नहीं होगा.

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    अमेरिका का आर्टिमिस अभियान

    जहां अमेरिका के आर्टिमिस समझौते में दुनिया के 20 देश शामिल हैं. और इस तरह से आर्टिमिस अभियान में यह समूह 2025 तक चंद्रमा पर इंसान भेजने की तैयारी में है जिसमें चंद्रमा की सतह पर एक रिसर्च स्टेशन के साथ ही एक सहयोगी स्पेस स्टेशन भी चंद्रमा की कक्षा में भेजा जाएगा जिसे गेटवे कहा जाएगा. गेटवे का प्रक्षेपण नवंबर 2024 में होगा. वहीं चीन सलामी स्लाइसिंग रणनीति के जरिए चीन पर ”कब्जा” करने की कोशिश कर सकता है, जिसमें छोटे लेकिन बढ़ते कदमों से बड़े बदलाव किए जाते हैं जैसा वह दक्षिण चीन सागर में कर रहा है.

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    चीन (China) हाल केसालों में अंतरिक्ष निवेश तेजी से बढ़ा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    बहुत बड़ा इलाका है चंद्रमा का

    लेकिन चंद्रमा को नियंत्रित करना आसान नहीं होगा. उसका क्षेत्रफल 1.46 करोड़ वर्ग किलोमीटर है जो ऑस्ट्रेलिया से करीब पांच गुना ज्यादा बड़ा है. ऐसे में अभी अगर चंद्रमा पर कोई नियंत्रण भी हुआ तो वह स्थानीय और अस्थायी ही होगा. फिर भी चीन रणनीतिक रूप से अहम इलाकों पर कब्जा करने का प्रयास कर सकता है जहां पर बर्फ की मौजूदगी ज्यादा होगी. यह बर्फ ना केवल पानी की जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि वहां पर ईंधन बनाने के काम भी आएगी.

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    लेकिन सवाल अब भी यही है कि क्या चीन के पास ऐसा करने की क्षमता और संसाधन हैं. लेकिन चीन अपने कार्यक्रमों पर भारी निवेश भी कर रहा है. यही वजह है कि 2021 में चीन ने अमेरिका के 51 प्रक्षेपणों की तुलना में 55 प्रक्षेपण किए थे. आने वाले समय में चीन का निवेश कई गुना बढ़ने वाला है. लेकिन फिर भी चीन पर कब्जा करना बहुत ही मुश्किल होगा. साल 2020 में चीन का अंतरिक्ष बजट 12 अरब डॉलर था लेकिन ये फिर भी नासा के बजट का आधा है. लेकिन फिर भी चंद्रमा पर कब्जा करने की कवायद उसे हर लिहाज से महंगी तो पड़ेगी लेकिन उसका फायदा क्या होगा यह भी तो निश्चित नहीं है.

    Tags: China, Moon, Nasa, Research, Science, Space, World

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