क्यों पाकिस्तानी जनता दोस्त China से कोरोना वैक्सीन लेते हुए डर रही है?

पाकिस्तान में भ्रम फैला हुआ है कि टीकाकरण से लोग नपुंसक हो जाते हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
पाकिस्तान में भ्रम फैला हुआ है कि टीकाकरण से लोग नपुंसक हो जाते हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

पाकिस्तान (Pakistan) में भ्रम फैला हुआ है कि टीकाकरण से लोग नपुंसक (vaccination makes people infertile) हो जाते हैं. ये डर साल 2000 से चला आ रहा है, जिसके कारण वहां आज भी पोलियो है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 8:10 AM IST
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पाकिस्तान में लोग चीन से कोरोना वैक्सीन (Covid-19 vaccine) लेने से इनकार कर रहे हैं. दरअसल चीन दुनियाभर के देशों में वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल के लिए लोग ढूंढ रहा है. ये किसी भी वैक्सीन के लिए अहम नियम है ताकि समझा जा सके कि अलग भौगोलिक स्थिति में टीका कैसे काम करता है. इधर पाकिस्तान की जनता में वैक्सीन को लेकर ढेरों भ्रम फैल गए हैं. ऐसे में विशेषज्ञ आशंका जता रहे हैं कि कहीं पाकिस्तान में कोविड-19 टीके का हाल पोलियो (polio in Pakistan) जैसा न हो.

क्या हैं दुनिया के हालात
दुनिया में इस समय कोरोना संक्रमण का अगला दौर शुरू हो चुका है. ठंड के कारण इसकी गंभीरता बढ़ सकती है. इसे देखते हुए वैक्सीन बना चुके देश जल्दी से जल्दी अपना ट्रायल पूरा करने की कोशिश में हैं. चीन भी ऐसा ही एक देश है. उसने कुछ वक्त पहले सफल वैक्सीन तैयार करने का दावा किया था. हालांकि चीन से पहले से ही गुस्साए देशों ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और न ही खरीदी में दिलचस्पी दिखाई.

पाकिस्तान में अस्पताल अस्पताल ट्रायल के लिए तैयार लोगों की भर्ती नहीं कर पा रहे- सांकेतिक फोटो

इन देशों में ट्रायल


दूसरी ओर चीन क्रॉस-नेशन टेस्टिंग के तहत कई देशों में अंतिम और तीसरे चरण का ट्रायल कर रहा है. ये काफी बड़े स्तर पर होगा. Ad5-nCoV नाम से इस वैक्सीन को जनवरी 2021 तक लगभग 40 हजार विदेशियों को दिया जाएगा. इनमें अर्जेंटिना, चिली, मैक्सिको, सऊदी अरब, रूस और पाकिस्तान शामिल हैं.

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क्यों आ रही मुश्किल 
चीन को इस ट्रायल में खासी दिक्कतें आ रही हैं क्योंकि वॉलंटियर तैयार नहीं हो रहे. पाकिस्तान में इसे लेकर ज्यादा समस्या है. यूरेशियन टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक अस्पताल ट्रायल के लिए तैयार लोगों की भर्ती नहीं कर पा रहा क्योंकि वैक्सीन को लेकर यहां काफी सारे ऊलजुलूल बातें सोशल मीडिया पर फैली हुई हैं.

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पोलियो को लेकर भी रहा भ्रम 
इनमें से एक भ्रम ये है कि वैक्सीन लेने से आदमी या उसकी आने वाली पीढ़ी नपुंसक हो जाती है. या किसी न किसी कमजोरी का शिकार रहती है. यही मानते हुए कराची, लाहौर और इस्लामाबाद में लोग वैक्सीन ट्रायल का हिस्सा बनने से कतरा रहे हैं. वैसे पाकिस्तान में वैक्सीन लेने से इनकार करने का इतिहास रहा है. पहले भी पोलियो वैक्सीन के मामले में ऐसा रहा. जिसके कारण पाकिस्तान दुनिया के चुनिंदा देशों में है, जहां पोलियो खत्म नहीं हो सका.

पाकिस्तान दुनिया के चुनिंदा देशों में है, जहां पोलियो खत्म नहीं हो सका- सांकेतिक फोटो


कट्टरपंथी नेता ने उड़ाई अफवाह 
इसकी शुरुआत साल 2000 से मानी जाती है. बता दें कि पोलियो का ग्लोबल टीकाकरण इससे सालभर पहले ही शुरू हुआ था. तब मुल्ला फजलुल्लाह नाम के एक कट्टरपंथी नेता ने रेडियो के जरिए भ्रामक बातें फैलाईं. उसने यहां तक कह दिया कि पोलियो टीकाकरण पश्चिमी देशों की साजिश है ताकि वो मुसलमानों की नसबंदी कर दें. इसके बाद से ये डर बैठ गया.

हेल्थ स्टाफ के साथ हिंसा 
पोलियो वैक्सीन को लेकर वहां इतना भ्रम है कि पोलियो टीकाकरण अभियान लगभग पटरी से उतर चुका है. लोग स्वास्थ्य अधिकारियों पर अपने बच्चों को जहर देने का आरोप लगा उनके साथ मारपीट करते हैं. कई बार स्वास्थ्य केंद्रों पर हमला हो चुका है. यही कारण है कि वहां के नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (EOC) को पोलियो टीकाकरण अभियान स्थगित करना पड़ा ताकि लगभग 270,000 पोलियो फील्ड स्टाफ को हिंसा से बचाया जा सके.

पश्चिम में भी अजीबोगरीब रवैया
काफी आधुनिक देश भी वैक्सीन को लेकर पाकिस्तान से अलग नहीं दिखते. पश्चिमी देशों में एक बड़ा तबका ऐसा है, जो वैक्सीन के खिलाफ है. ग्लोबल मार्केट रिसर्च कंपनी YouGov ने इसी साल जून में एक डाटा जारी किया. ब्रिटेन में हुए इस सर्वे के मुताबिक हर 6 में से एक ब्रिटिश को टीका लगाने पर एतराज है. उन्होंने कहा कि कोरोना की वैक्सीन आने के बाद भी उसका टीका नहीं लेंगे.

पाकिस्तान में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कई बार हिंसा का सामना करना पड़ता है- सांकेतिक फोटो


वैक्सीन के खिलाफ चली मुहिम 
इस तरह से दुनियाभर में बहुत से लोग टीका लगवाने के सख्त खिलाफ हैं. इन्हें एंटी-वैक्सर्स (anti-vaxxers) कहा जाता है. वे मानते हैं कि वैक्सीन की दुनिया को जरूरत ही नहीं है, बल्कि सारी खतरनाक बीमारियों को इंसानी शरीर ऐसे ही हरा सकता है. वे यह भी मानते हैं कि वैक्सीन के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और कई दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं. यहां तक गर्भावास्था के दौरान मां को लगने वाली वैक्सीन्स पर भी ये समुदाय सवाल करता है. उसका तर्क है कि बच्चों में बढ़ती मानसिक बीमारियां इसी की देन हैं.

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टीकाकरण के लिए करनी पड़ी सख्ती
विरोध करने वाला ये तबका कितना शक्तिशाली है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि कई जगहों पर वैक्सीन लगाना अनिवार्य करने के लिए कानून लाना पड़ा. जैसे कैलिफोर्निया में 277 बिल लाया गया, वहीं ऑस्ट्रेलिया में इसके लिए कड़ा कानून लगा. No Jab, No Pay के तहत अगर कोई अपने बच्चे का वैक्सीनेशन नहीं कराता तो उस बच्चे को स्कूल में दाखिला तक नहीं मिलेगा. ऐसा ऑस्ट्रेलिया में वैक्सीन के खिलाफ बढ़ते अभियान को रोकने के लिए किया गया.
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