Explained: क्या भारत से लोग Corona Vaccine लेने के लिए विदेश जा सकते हैं?

कोरोना संक्रमण के बीच ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि हर्ड इम्युनिटी बन सके- सांकेतिक फोटो

कोरोना संक्रमण के बीच ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि हर्ड इम्युनिटी बन सके- सांकेतिक फोटो

कुछ समय पहले एक ट्रैवल कंपनी ने दिल्ली से मॉस्को के लिए 1.3 लाख का पैकेज ऑफर (Delhi to Moscow for Covid-19 vaccine) किया. 24 दिन के पैकेज में घूमने-फिरने के अलावा स्पूतनिक-V के दोनों शॉट (Sputnik-V vaccine) देने की बात भी थी.

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कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा घातक साबित होती दिख रही है, जिसमें अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या पहले से काफी ज्यादा है. इस बीच ज्यादा से ज्यादा टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है ताकि हर्ड इम्युनिटी बन सके और महामारी का ग्राफ नीचे जाए. हालांकि देश के कई राज्यों में टीकों की कमी की खबरों के बीच नया ही ट्रेंड दिख रहा है. लोग टीकाकरण के लिए विदेशों का रुख कर रहे हैं. खासतौर पर रूस से जुड़ी इस तरह की बातें आ रही हैं. इसे वैक्सीन टूरिज्म कहा जा रहा है.

टीकाकरण के लिए 24 दिनों का टूर पैकेज 

कुछ दिनों पहले रिपोर्ट्स आई थीं कि दुबई से काम करने वाली एक ट्रैवल संस्था एक टूर पैकेज दे रही है. इसमें दिल्ली से मॉस्को तक 24 दिन के पैकेज में घूमने-फिरने के अलावा स्पूतनिक-V के दोनों शॉट देना भी शामिल था. बता दें कि स्पूतनिक-V के दोनों डोज के बीच 21 दिन का अंतराल होता है. इस दौरान ट्रैवल एजेंसी लोगों को रूस की सैर भी कराने का वादा करती दिखी. साथ में रहने-खाने का खर्च भी शामिल बताया गया. लेकिन वीजा की फीस अलग से लेने की बात कही गई.

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स्पूतनिक-V के दोनों डोज के बीच 21 दिन का अंतराल होता है- सांकेतिक फोटो (pixabay)

रूस की सैर कराने का वादा 

दिल्ली से रूस जाने और वहां की खूबसूरत जगहों पर सैर-सपाटे के साथ टीकाकरण भी करवाने के लिए एजेंसी लगभग 1.3 लाख रूपए ले रही है. कोरोना वैक्सीन की पहली डोज मॉस्को पहुंचने के अगले दिन लगेगी और फिर पर्यटन शुरू हो जाएगा. ये वादा अपने में काफी लुभावना है, खासकर जब बीते लगभग डेढ़ सालों से लोग बंदी और बीमारी के कहर से जूझ रहे हैं, ऐसे में विदेश घूमते हुए टीका लग जाना एक पंथ, दो काज ही कहलाएगा.

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आधिकारिक तौर पर स्पष्टता नहीं दिख रही 

स्पूतनिक-V के अकाउंट से भी वैक्सीन टूरिज्म को लेकर ट्वीट किया गया था. 1 अप्रैल को किए गए इस ट्वीट में इन तमाम बातों के जिक्र के साथ ये बताया गया था कि मॉस्को पहुंचने के बाद लोगों को क्वारंटाइन नहीं किया जाएगा ताकि वे आराम से रूस की सैर कर सकें. हालांकि फ्लाइट में बैठने से पहले उन्हें अपनी कोरोना निगेटिव रिपोर्ट देनी होगी. बाद में इसपर कोई अपडेट नहीं दिखी.

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कोरोना वैक्सीन की कमी से अभी दुनिया जूझ रही है- सांकेतिक फोटो

इस तरह की हो रही डील 

ये ट्रेंड पिछले साल के अंत से ही चलन में आया, जिसे वैक्सीन टूरिज्म भी कहा जा रहा है. सप्ताहभर पहले ही यूरोप के देश सेंट मरीनो ने अपने पहले वैक्सीन टूरिस्ट्स का स्वागत किया, इस दौरान उन्हें स्पूतनिक-V दिया गया. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस और मालदीव भी आपस में किसी करार की प्रक्रिया में हैं. इसके तहत रूस मालदीव को वैक्सीन उपलब्ध कराएगा और मालदीव घूमने के इच्छुक लोग वहां पहुंचकर स्पूतनिक का टीका लगवा सकेंगे. इससे दोनों ही देशों को फायदा होगा.

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इसी तरह से दक्षिण अफ्रीका से लोग टीकाकरण के लिए जिम्बॉब्वे जा रहे हैं. वहीं कनाडा और दक्षिण अमेरिका से लोग अमेरिका का रुख कर रहे हैं. इसका मकसद केवल टीकाकरण नहीं, बल्कि दूसरे देश की सैर भी है. कई लोग व्यापारिक मकसद से भी ऐसा कर रहे हैं.

क्या वाकई में वैक्सीन के लिए विदेश जा सकते हैं?

इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए विदेश जाने की जरूरत नहीं, साल के अंत तक लगभग सारे उन लोगों का टीकाकरण हो जाएगा, जो इस श्रेणी में आते हैं, वो भी न्यूनतम कीमत पर. हालांकि इसके बाद भी भारत में वैक्सीन के लिए विदेश जाने का ट्रेंड बढ़ता लग रहा है. अप्रैल महीने में ही इंटरनेशनल फ्लाइट बैन लगने से पहले बहुत से लोग इसी मकसद से दुबई गए थे. कथित तौर पर वे यूएई में चीनी वैक्सीन के लिए पहुंचे थे.

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हाल ही में न्यूयॉर्क ने भी अपने यहां पर्यटन को बढ़ाने के लिए बाहरी लोगों को टीका देते हुए वैक्सीन टूरिज्म बढ़ाने की बात की- सांकेतिक फोटो (pixabay)

इन देशों में जा रहे लोग 

वैक्सीन की कमी से अभी दुनिया जूझ रही है. आबादी के लिहाज से वैक्सीन का उतनी तेजी से उत्पादन नहीं हो पा रहा. ऐसे में बहुत से देशों से लोग ऐसे देशों की ओर जा रहे हैं, जहां की वैक्सीन पॉलिसी केवल अपने नागरिकों तक सीमित नहीं. जैसे अमेरिका, रूस, स्लोवाकिया और जिम्बॉब्वे में टीकाकरण नियम उतने सख्त नहीं, लिहाजा लोग यहां पहुंच रहे हैं.

क्यों मिल रहा है इस टूरिज्म को बढ़ावा? 

बता दें कि फिलहाल ऐसा कोई कानून नहीं, जिसमें अपनी सेहत की रक्षा या वैक्सीन लगवाने के लिए विदेश जाने की मनाही हो. यही कारण है कि हाल ही में न्यूयॉर्क ने भी अपने यहां पर्यटन को बढ़ाने के लिए बाहरी लोगों को टीका देते हुए वैक्सीन टूरिज्म बढ़ाने की बात की. इससे लॉकडाउन के कारण इकनॉमी में कमजोरी से जूझ रहे देशों को राहत भी मिलेगी.

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